छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में पाञ्चजन्य के ‘दंतेश्वरी Dialogue’ में वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से ‘भविष्य का छत्तीसगढ़’ विषय पर बात की। इस मौके पर ओपी चौधरी ने कहा कि अब तक लोगों में नक्सलवाद के चलते ‘परसेप्शन’ की समस्या थी। लेकिन जिस तेजी से नक्सलवाद खात्मे की ओर बढ़ा है तो उससे इसमें परिवर्तन आया है। यहां निवेश बढ़ा है और इससे राज्य की संभावनाएं अनलॉक हुई हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और क्षेत्र भी विकास की राह पर है। इसका सरकार के राजकोष पर कितना सकारात्मक असर आप देखते हैं?
छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में ये टर्निंग पॉइंट है। आज जिस मोड़ पर हम खड़े हैं, वो निश्चित तौर पर बहुत बड़ा है। बस्तर की बात करें तो क्षेत्रफल की दृष्टि से केरल से भी बड़ा है। वहीं दिल्ली से ये 30 गुना बड़ा है। ऐसे में अमित शाह जी की कोशिशों के कारण वहां नक्सलवाद खत्म हो रहा है। वहां विकास की यूनीक संभावनाएं हैं, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ का 40 प्रतिशत एरिया वनों से ढका है। यहां बहुत ही अद्भुत वन संपदा है और यहां पर्यटन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को यूनेस्को ने दुनिया के बेस्ट 20 टूरिज्म गांव के तौर पर चुना है। कांगेरवैली नेशनल पार्क को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तौर पर चुना है। इन सबके अलावा आर्गेनिक फार्मिंग भी बस्तर में तेजी से उभर रही है।
देश में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग के मामले में सिक्किम की चर्चा होती है, लेकिन बस्तर रेंज के अंतर्गत आने वाला दंतेवाड़ा जिला 70 फीसदी ऑर्गेनिक सर्टिफाइड हो चुका है। ये पूरे सिक्किम के कुल कृषि क्षेत्र से अधिक बड़ा है। इसके अलावा आने वाले वक्त में यहां के हवा की गुणवत्ता की चर्चा होगी। दिल्ली के हालात देख चुके हैं। अगर आप केवल नवा रायपुर की ही बात करें तो यहां का 28 फीसद क्षेत्र ग्रीन जोन है। यहां का एक्यूआई 50 के आसपास है। आने वाले वक्त में ये होगा कि जहां की हवा शुद्ध होगी, वहां लोग घंटे के हिसाब से पैसा चुकाने को तैयार होंगे।
क्या नक्सल के खात्मे के बाद सरकार की ‘पोस्ट नक्सल ग्रीन’ या ‘इकोनोमिक जोन’ बनाने की योजना है?
बस्तर सांस्कृतिक तौर पर यूनीक है। बस्तर के वनवासियों की अपनी भावनाएं भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हम सभी को अपनी नीतियां बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। निश्चित तौर पर हम बस्तर की जनजातियों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेंगे। हमने संवेदनाओं को भी ध्यान में रखना है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी बस्तर के लिए बहुत ही सेंसिटिव अप्रोच रखते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य को देखते हुए सरकार की दीर्घकालीन योजनाएं किस प्रकार की हैं?
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को देखें तो जहां, देश में सर्विस सेक्टर का योगदान 55 प्रतिशत का है, तो प्रदेश में ये मुश्किल से 30 फीसदी के आसपास है। प्राकृतिक संसाधनों कोयला, लोहा, सीमेंट आदि के कारण हमारा सेकंडरी सेक्सन मजबूत है। लेकिन, छत्तीसगढ़ केवल इसी के लिए न जाना जाए, इसको ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट-2047 को ध्यान में रखते हुए हम इसे डाइवर्सिफाई करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके तहत हम नई औद्योगिक नीति के तहत हॉस्पिटल और नए इमर्जिंग सेक्टरों को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। कोशिश के प्रदूषण रहित और अधिक रोजगार पैदा करने वाली इंडस्ट्री को बढ़ावा दें।
हमने नई नीति में ये निर्णय लिया है कि अगर हमारे युवाओं को अधिक रोजगार देंगे तो ही छूट मिलेगी। टूरिज्म के सेक्टर में नौकरियां बनाने पर सब्सिडी दी जा रही है। नवा रायपुर को हमने तेजी से वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया है। इसके अलावा इसे हम पिछले डेढ़ साल में शिक्षा, स्वास्थ्य डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित कर रहे हैं। इसी नवा रायपुर में ही देश का पहला एआई सेंटर स्थापित किया गया है।
क्या नक्सल के खात्मे के साथ निजी कंपनियों का आत्मविश्वास बढ़ा है?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और आदरणीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में जिस प्रकार से माओवाद का खात्मा हो रहा है तो इसके कारण अतुलनीय परिवर्तन आए हैं। सरकार की नीतियों के कारण न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। पहले चाहे पर्यटन हो या फिर कोई और क्षेत्र उसमें दृष्टिकोण एक सबसे बड़ी समस्या थी। माओवाद के खात्मे के साथ ही सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है।

















