गत दिनों चित्रकूट जिले के जनजातीय-बहुल गांव बांका में धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके और दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण किया।
इसके बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा देशभक्ति की भावना के प्रखर-पुंज थे। वे मात्र 25 वर्ष की अवस्था में जनजातीय समाज के उत्थान और कल्याण के कार्य से अमर हो गए। केंद्रीय जनजाति राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि बिरसा मुंडा भारत के स्वाभिमान, गौरव, सांस्कृतिक एकता और स्वतंत्रता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज का चित्रण सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋ ग्वेद में भी किया गया है।
भगवान राम के 14 वर्षीय वनवास काल में वनों में रहने वाले जनजाति बंधुओं ने उनकी मदद की और धर्म की स्थापना में अपना योगदान दिया। एक कार्यकर्ता प्रतिमा बागरी ने कहा कि धर्म बदलने से नहीं, शिक्षा ग्रहण करने से जीवन और समाज बदलता है।
उन्होंने कहा कि जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित एकलव्य आवासीय विद्यालय गुरु और शिष्य की आदर्श परंपरा का अनुसरण कर रहे हैं। इनमें जनजातीय वर्ग के छात्र आवासीय शिक्षा ग्रहण कर अपने जीवन के उच्चतम शिखर पर पहुंच सकते हैं। कार्यक्रम का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान एवं जय बिरसा मुंडा ग्रामीण विकास शोध समिति, बांका द्वारा किया गया था।

















