BSF की माओवादियों को सख्त चेतावनी, 'आत्मसमर्पण करो या फिर मुठभेड़ में मरो!'
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BSF की माओवादियों को सख्त चेतावनी, ‘आत्मसमर्पण करो या फिर मुठभेड़ में मरो!’

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ ) ने चेतावनी दी है कि जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पडेगा । इसमें संभावित मुठभेड़ भी शामिल है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Dec 1, 2025, 08:03 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: ओडिशा में सक्रिय माओवादी संगठनों को कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने चेतावनी दी है कि जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पडेगा । इसमें संभावित मुठभेड़ भी शामिल है।  यह चेतावनी बीएसएफ के इंस्पेक्टर जनरल (फ्रंटियर–स्पेशल ऑपरेशंस) शिव आधार श्रीवास्तव ने बल के 61वें स्थापना दिवस से पूर्व भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

श्रीवास्तव ने कहा कि बीएसएफ मार्च 2026 तक ओडिशा को पूरी तरह माओवादी-मुक्त बनाने के लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे बीएसएफ की “शीर्ष परिचालन प्राथमिकता” बताया और कहा कि यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक दृष्टि के अनुरूप है। उन्होंने दावा किया कि माओवादी गतिविधियों वाले शेष क्षेत्रों में तेजी से कमी आ रही है और कहा कि यह ओडिशा में माओवादी समस्या की ताबूत पर अंतिम कील होगी। हम मार्च 2026 तक इस खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

तेजी से सिमट रहे माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र
उन्होंने बताया कि वर्तमान में बीएसएफ की छह बटालियन कोरापुट, मलकानगिरी, बौध, कालाहांडी, कंधमाल, रायगढ़ा और नबरंगपुर जिलों में तैनात हैं। बल ने एक हाइब्रिड ऑपरेशनल रणनीति अपनाई है जिसमें उन्नत तकनीक, खुफिया जानकारी पर आधारित योजनाएं और ओडिशा पुलिस व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ संयुक्त अभियान शामिल हैं। इस रणनीति का उद्देश्य माओवादी गतिशीलता को रोकना, सप्लाई चेन को बाधित करना और छत्तीसगढ़ व आंध्र प्रदेश से होने वाली घुसपैठ पर अंकुश लगाना है।

मलकानगिरी का ‘कट-ऑफ एरिया’ अब स्वाभिमान अंचल
उन्होने बताया कि बीएसएफ की प्रमुख उपलब्धियों में मलकानगिरी के ‘कट-ऑफ एरिया’ का उल्लेखनीय परिवर्तन शामिल है । यह इलका कभी माओवादियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। श्रीवास्तव ने कहा कि यह इलाका अब स्वाभिमान अंचल के नाम से जाना जाता है, जहां तेजी से विकास हो रहा है और शांति स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन बीएसएफ के लगातार अभियान, सुरक्षा उपस्थिति और समुदाय के साथ बेहतर संवाद की वजह से संभव हुआ है।

ओडिशा में बढ़ी तैनाती, गश्ती और ऑपरेशंस तेज
उन्होंने का कि हाल के महीनों में बीएसएफ ने ओडिशा के मध्य जिलों, विशेषकर कंधमाल में, अपनी तैनाती को और अधिक मजबूत किया है। नए ऑपरेशनल बेस स्थापित किए गए हैं और जवान कठिन वनों और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में लंबी और गहन गश्त कर रहे हैं। इन रणनीतिक बदलावों ने माओवादी नेटवर्क को बड़े पैमाने पर बाधित किया है, जिससे कई नक्सली आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो रहे हैं या बची-खुची मजबूतियों में पीछे हट रहे हैं।

2010 से अब तक बड़े ऑपरेशनल परिणाम
उन्होंने बताया कि ओडिशा में 2010 में तैनाती के बाद से बीएसएफ ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस अवधि में 86 माओवादी मारे जा चुके हैं, 710 को गिरफ्तार किया गया है और 2,508 माओवादी व समर्थकों ने आत्मसमर्पण किया है। बल ने 566 आईडी और अन्य विस्फोटकों का भी पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय किया है, जिससे नागरिकों और सुरक्षा बलों पर होने वाले हमलों का खतरा काफी कम हुआ है। राज्य की सीमाओं के प्रमुख घुसपैठ मार्गों को भी प्रभावी ढंग से सील कर दिया गया है।

शांति स्थापना के लिए विकास और विश्वास बहाली पर जोर
श्रीवास्तव ने कहा कि स्थायी शांति केवल बल प्रयोग से नहीं आएगी। इसलिए बीएसएफ स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास बहाली और विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम चला रहा है। इनमें स्वास्थ्य शिविर, बुनियादी ढांचा सहयोग, आदिवासी युवाओं के लिए विनिमय कार्यक्रम, रोजगार मेले और जागरूकता अभियान शामिल हैं। उनका कहना था कि ये पहलें माओवादी कैडर और उनके परिवारों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

ओडिशा सरकार की बेहतर पुनर्वास नीति
इंस्पेक्टर जनरल श्रीवास्तव ने ओडिशा सरकार की सुधरी हुई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का भी उल्लेख किया, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जा रही है। उनका कहना था कि यह नीति माओवादियों को हिंसा छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने के लिए और अधिक प्रोत्साहित करेगी।

हालांकि अनेक सफलताओं के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं। कालाहांडी, कंधमाल और बौध के घने जंगलों में अभी भी कुछ माओवादी गतिविधियां दर्ज होती हैं। आईईडी हमलों का खतरा भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके साथ ही अवैध गांजा खेती जैसी नशीली गतिविधियां माओवादी नेटवर्क को आर्थिक आधार प्रदान करती हैं जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक चुनौतीपूर्ण पहलू बना हुआ है।

14 जवानों ने दी बलिदान
श्रीवास्तव ने बताया कि 2010 से अब तक ओडिशा में माओवादी विरोधी अभियानों के दौरान बीएसएफ के 14 जवान वीर गति को प्राप्त हुए हैं । उन्होंने कहा कि ओडिशा, जो कभी नक्सल हिंसा का पर्याय था, अब शांति और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर खुफिया जानकारी, संयुक्त अभियान और जनता के सहयोग के साथ 2026 की समय सीमा तक माओवादी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।

Topics: BSFnaxalismOdishaMaoismBSF warning to Maoists
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