रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत का दो दिवसीय दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। ये 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। पुतिन के दौरे से पहले ही भारत को और S-400 एयर डिफेंस स्क्वाड्रन खरीदने का प्रस्ताव, साथ ही रूस के सुखोई-57 फाइटर जेट्स पर चर्चा हो रही है।
यात्रा का न्योता और कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर पुतिन 4 दिसंबर को भारत पहुंचेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनसे मिलेंगी और उनके सम्मान में भोज का आयोजन करेंगी। 5 दिसंबर को मोदी के साथ विस्तृत बातचीत होगी। विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ये दौरा दोनों देशों के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को मजबूत करने का मौका देगा। नेता द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति की समीक्षा करेंगे, भविष्य की दिशा तय करेंगे और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करेंगे।
आखिरी बार 2021 में आए थे भारत
राष्ट्रपति पुतिन का पिछला दौरा दिसंबर 2021 में हुआ था, जब वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत में ही आयोजित हुआ। ये सम्मेलन हर साल बारी-बारी से दोनों देशों में होता है। सबसे हालिया शिखर सम्मेलन जुलाई 2024 में मॉस्को में था, जहां मोदी गए थे। तब से रिश्ते और मजबूत हुए हैं, खासकर रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में।
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एजेंडे में रक्षा सौदे
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त खरीदभारत को पांच और S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस स्क्वाड्रन खरीदने का प्रस्ताव है। ये सिस्टम पहले से ही बेहद कारगर साबित हो चुके हैं, जैसे ऑपरेशन सिंदूर में। इसके साथ ही मौजूदा सिस्टम के लिए बड़ी मात्रा में सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का स्टॉक भी मांगा जाएगा। ये चर्चा 5 दिसंबर की बैठक में प्रमुख होगी। S-400 रूस की उन्नत तकनीक है, जो भारत की हवाई रक्षा को और मजबूत करेगी। पहले ही चार स्क्वाड्रन खरीदे गए हैं, और ये अमेरिकी दबाव के बावजूद चले।
सुखोई-57 फाइटर जेट्स पर फैसला लंबित
रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 फाइटर जेट्स बेचने के लिए जोर दे रहा है। ये अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II का विकल्प हो सकते हैं। लेकिन भारत ने अभी दो या तीन स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला नहीं लिया। स्रोतों के अनुसार, ये भी एजेंडे पर होगा। सुखोई-57 स्टेल्थ फाइटर है, जो हाई-टेक हथियारों से लैस है। भारत पहले से रूसी जेट्स इस्तेमाल करता है, जैसे सुखोई-30 MKI। ये सौदा रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है।

















