नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हलाला मीट परोसने पर रेलवे को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी ( NHRC) ने लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी एवं डॉक्टर अंबेडकर जनकल्याण समिति की शिकायत पर रेलवे को सेक्शन 12 के तहत नोटिस जारी किया है।
क्या है मामला?
शिकायत में आरोप है कि रेलवे अपने नॉन-वेज खाने में सिर्फ हलाल-प्रोसेस्ड मीट ही परोसता है। जिससे पारंपरिक मीट व्यापार से जुड़े हिंदू अनुसूचित जाति समुदाय की आजीविका और बराबरी के अवसर प्रभावित होते हैं। साथ ही हिंदू और सिख यात्रियों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नॉन-वेज विकल्प नहीं मिलते। बता दें कि हिंदू धर्म में हलाल मीट खाने की मनाही है और रेलवे में नॉन वेज के तौर पर सभी यात्रियों को हलाल मीट ही परोसा जाता है।
शिकायत में कहा गया है कि रेलवे में हलाल प्रोसेस्ड मीट ही परोसना समानता, धर्म की स्वतंत्रता, खाने की पसंद, रोजगार के अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जैसे अधिकारों का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह नीति संविधान की धर्मनिरपेक्षता, अभेदभाव-रहित व्यवस्था और जीविका के अधिकार के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके बाद NHRC ने इस मामले में रेलवे को नोटिस भेजा है।
क्या है NHRC का कहना?
NHRC का कहना है कि रेलवे में हलाल-प्रोसेस्ड मीट परोसने के आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। NHRC सदस्य प्रियांक कानूंगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले में संज्ञान लिया है और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस भेजकर आरोपों की जांच कराने और दो सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
यह सही है कि कई बार सार्वजनिक तौर पर ऐसी बहस और शिकायतें मिलती रही हैं कि रेलवे में सिर्फ हलाल मीट ही क्यों परोसा जाता है। अब इस पर NHRC ने रेलवे से जवाब मांगा है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की डिटेल रिपोर्ट भी मांगी है। NHRC के इस नोटिस का मकसद इंडियन रेलवे की कैटरिंग सर्विस में सभी समुदायों के अधिकारों का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलने वाली खाने की पॉलिसी पक्का करना है।

















