महाराष्ट्र की जीसीसी नीति-2025: विकास की नई दृष्टि
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महाराष्ट्र की जीसीसी नीति-2025: विकास की नई दृष्टि

महाराष्ट्र की जीसीसी नीति-2025, ज्ञान और तकनीक आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्योगों के विकेंद्रीकृत विकास को प्रोत्साहित करती है। मजबूत प्रतिभा-संसाधन इसकी प्रमुख ताकत है

Written byसुमित मेहतासुमित मेहता
Nov 26, 2025, 01:06 pm IST
in भारत, विश्लेषण, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र भारत की आर्थिक धुरी है। वित्त वर्ष 2025 के लिए राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 49.39 ट्रिलियन खरब रुपये आंका गया है, जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 13.3 प्रतिशत है। भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई देश के सबसे सक्रिय बंदरगाहों तथा समुद्री ढांचे का केंद्र भी है। अब महाराष्ट्र की दृष्टि इस दिशा में है कि वह बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों की तरह सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी सक्षम सेवाओं का अग्रणी केंद्र बने।

सुमित मेहता
चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं ‘डाइग्नोसिंग जीएसटी फॉर डॉक्टर्स’ के लेखक

इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने 30 सितंबर, 2025 को ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर (जीसीसी) नीति की घोषणा की। दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का वीजा याचिका शुल्क लगाने के 9 दिन बाद की गई थी। ट्रंप के इस निर्णय ने भारतीय राजनयिक और आर्थिक हलकों में व्यापक असंतोष और चिंता पैदा कर दी थी। इस कदम का सबसे उपयुक्त समाधान यही माना गया कि भारत को ऑनशोर (तटीय) अवसरों पर निर्भर रहने के बजाय ऑफशोरिंग (अपतटीय) निवेश अवसरों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की जीसीसी नीति पर काम डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी कामगारों के लिए अमेरिका में लगाए गए विवादित प्रतिबंधों की घोषणा से काफी पहले शुरू हो चुका था। फिर भी, महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस नीति की घोषणा का समय अपने आप में एक बड़ा संदेश था। यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत उसने अमेरिका के दबाव और धमकी भरे रवैये का डटकर जवाब देने तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकेत दिया।

1700 जीसीसी, 25 लाख को रोजगार

भारत में वर्तमान में 1,700 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो लगभग 25 लाख पेशेवरों को रोजगार देते हैं और लगभग 65 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं। इन 1,700 से अधिक केंद्रों में से लगभग 400 महाराष्ट्र में स्थित हैं, जहां लगभग 4 लाख लोग कार्यरत हैं। महाराष्ट्र की जीसीसी नीति का उद्देश्य अगले पांच वर्ष यानी 2029-30 तक 400 नए जीसीसी को आकर्षित करना है। इस नीति के माध्यम से लगभग 50,600 करोड़ रुपये का निवेश लाने और 4 लाख उच्च-कुशल नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस नीति का उद्देश्य केवल मुंबई महानगरीय क्षेत्र और पुणे जैसे विकसित आर्थिक केंद्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय नाशिक, नागपुर और छत्रप‍ति संभाजीनगर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी संतुलित विकास को प्रोत्साहित करना है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन के अनुरूप है। इस नीति के तहत जिन प्रमुख क्षेत्रों पर निवेश आकर्षित करने के लिए ध्यान केंद्रित किया जाएगा, उनमें एयरोस्पेस, रक्षा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, दवा निर्माण, रसायन, नवीकरणीय ऊर्जा, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी/ आईटीईएस तथा रत्न और आभूषण उद्योग शामिल हैं।

इस लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य सरकार जीसीसी को विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। इसमें अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक का पूंजी अनुदान, किराए, वेतन और ब्याज पर सब्सिडी, साथ ही अनुसंधान एवं विकास तथा पेटेंट आवेदन के लिए अनुदान और सहायता शामिल है। इन लाभों के अतिरिक्त, महाराष्ट्र में स्थापित होने वाले जीसीसी को स्टांप ड्यूटी, संपत्ति कर और बिजली शुल्क पर छूट भी प्रदान की जाएगी।

सरकार से वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता

राजकोषीय प्रोत्साहनों के अतिरिक्त, सरकार गैर-राजकोषीय प्रोत्साहन भी प्रदान कर रही है। इनमें अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) के साथ-साथ एफएसआई पर देय प्रीमियम में छूट, क्षेत्रीय ज़ोनिंग और भूमि उपयोग से संबंधित नियमों में शिथिलता, ‘मैत्री’ (MAITRI) पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो स्वीकृति व्यवस्था, निरंतर विद्युत आपूर्ति और तीव्र अनुमोदन प्रक्रिया जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार की योजना समर्पित जीसीसी पार्क विकसित करने की भी है, जहां ‘प्लग-एंड-प्ले’ कार्यालय उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सभी उद्देश्यों के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ‘महाराष्ट्र जीसीसी ग्रोथ काउंसिल’ नामक थिंक टैंक का गठन किया गया है, जो राज्य की नीति को बाज़ारी मानकों के अनुरूप बनाए रखने पर कार्य करेगा। इस दिशा में कार्य भी शुरू हो चुका है, जहां सरकार का प्राथमिक ध्यान जीसीसी के लिए आवश्यक ढांचागत विकास पर केंद्रित है। राज्य सरकार ने 12,500 करोड़ रुपये का एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) प्रेस्टिज ग्रुप के साथ किया है, जिसके तहत नाशिक, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में जीसीसी के साथ-साथ डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी अवसंरचनाएं विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने जीसीसी कंसल्टिंग कंपनी एएनएसआर के साथ एक और एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत नवी मुंबई में एक ‘जीसीसी सिटी’विकसित की जाएगी।

उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम भी शामिल

इस नीति में राज्य की शिक्षा प्रणाली में उपयुक्त सुधार किए जाने का भी उल्लेख है, ताकि उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम, तकनीकी क्षेत्र में कौशल उन्नयन और उद्योग तथा सरकार की शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से नीतिगत उद्देश्यों को साकार किया जा सके। सरकार का अनुमान है कि आने वाले पांच वर्ष में लगभग 2.5 से 3 करोड़ वर्ग फीट कार्यालय क्षेत्र का विकास किया जाएगा, जिसमें ये जीसीसी स्थापित होंगे। इस विकास से मुंबई महानगरीय क्षेत्र, पुणे, नागपुर, नाशिक और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों में वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग बढ़ेगी और इसके परिणामस्वरूप आवासीय अचल संपत्ति बाजार को भी नई गति मिलेगी।

इन सभी महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद राज्य को टियर-2 व टियर-3 शहरों में अधोसंरचना की कमी से उत्पन्न कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-विद्युत आपूर्ति, उच्च-गति इंटरनेट कनेक्टिविटी, उच्च गुणवत्ता वाला सड़क एवं रेल संपर्क आदि। दूसरी ओर उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य द्वारा दी जा रही 50 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी वाली वित्तीय प्रोत्साहन योजना अन्य राज्यों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश केवल 99 पैसे प्रति एकड़ की दर से भूमि उपलब्ध कराता है, जबकि मध्य प्रदेश 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान करता है। महाराष्ट्र के सामने एक और बड़ी चुनौती इसकी विस्तृत और धीमी नौकरशाही मशीनरी है। इस पर भी सरकार को विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिए, जिसका नेतृत्व क्षेत्र-विशेषज्ञ एकल संपर्क अधिकारी करें, जो निवेश संबंधी प्रस्तावों पर त्वरित स्वीकृति, अनुमति और प्रोत्साहनों के वितरण की प्रक्रिया संभालें।

संक्षेप में कहा जाए तो महाराष्ट्र की जीसीसी नीति 2025 मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार द्वारा उठाया गया एक साहसिक और महत्वाकांक्षी कदम है, जिसका उद्देश्य ज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास की नई दिशा में राज्य को अग्रसर करना है। यह नीति टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी औद्योगिक वृद्धि को गति देगी। इसमें आकर्षक प्रोत्साहन दिए गए हैं और सरकार की प्रारंभिक कार्रवाइयां भी सुदृढ़ रही हैं। हालांकि, इस नीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकार अधोसंरचना की कमियों को कितनी प्रभावी ढंग से दूर करती है, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से कैसे बचती है और कर्नाटक, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश जैसे प्रतिस्पर्धी राज्यों से कैसे मुकाबला करती है। महाराष्ट्र की अंतर्निहित ताकतें–विशाल प्रतिभा-संसाधन और उच्च शिक्षा संस्थानों की बड़ी संख्या-इस संभावना को मजबूत करती हैं कि निकट भविष्य में महाराष्ट्र भारत की जीसीसी राजधानी बन सकता है।

Topics: नीतिअर्थव्यवस्था और संस्थानविकास की नई दृष्टिजीसीसी नीतिसकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी)वित्तीय राजधानीसूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)‘आत्मनिर्भर भारत’ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर (जीसीसी)विकसित भारतवित्तीय प्रोत्साहनआर्थिक विकासपूंजी अनुदानपाञ्चजन्य विशेषमहाराष्ट्र जीसीसी नीति 2025
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