‘लक्ष्य है गरीबों, कमजोरों को सशक्त बनाना’
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‘लक्ष्य है गरीबों, कमजोरों को सशक्त बनाना’

‘जन-स्वास्थ्य’ सत्र में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने अपने विचार रखे

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 25, 2025, 02:32 pm IST
inविश्लेषण, मध्य प्रदेश, पाञ्चजन्य इवेंट
मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके से बातचीत करतीं तृप्ति श्रीवास्तव

मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके से बातचीत करतीं तृप्ति श्रीवास्तव

संपतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का अवसर उनके जीवन का बड़ा सुखद क्षण था। प्रधानमंत्री ने उनके क्षेत्र के बारे में बात की, पूरी बात सुनी और बहुत सहजता से चर्चा की। वे कहती हैं कि इससे उन्हें आत्मविश्वास भी मिला और यह भी महसूस हुआ कि देश का नेतृत्व वास्तव में जनता और जनप्रतिनिधियों के विचारों को महत्व देता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी काम में सबसे बड़ी संपत्ति ईमानदारी और मेहनत है। उनका मानना है कि यदि आप दृढ़ निश्चय कर लें और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर चलते रहें, तो कोई भी कठिनाई स्थायी नहीं रहती। वे स्वीकार करती हैं कि जीवन में बहुत संघर्ष रहा-गरीबी, साधनहीनता, पढ़ाई के लिए चुनौतियां और रास्ते में अनेक बार अवरोध भी आए-परंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी ताकत है। जब लोग किसी प्रतिनिधि को भरोसे के साथ देखते हैं, तो वह प्रतिनिधि भी हर दिन अपने दायित्व को अधिक गंभीरता से निभाता है। समाजसेवा ही उनके जीवन का हमेशा से केंद्र रहा है। उन्होंने शुरू से ही लोगों के बीच रहकर काम किया है और राजनीति को भी वे समाजसेवा का विस्तारित रूप मानती हैं।

अपने प्रारंभिक जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में संसाधन बहुत कम थे। पढ़ाई करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था और कभी-कभी दूरी, साधन और सामाजिक सीमाएं भी बड़ी बाधा बनती थीं। किंतु परिवार ने हमेशा प्रेरित किया कि शिक्षा ही वह मार्ग है जो जीवन को बदल सकता है। इसी प्रेरणा ने उन्हें भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

वे कहती हैं कि यही अनुभव उन्हें आज भी संवेदनशील बनाते हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि कठिनाइयां कैसी होती हैं। उइके ने कहा कि उनके क्षेत्र में पानी सबसे बड़ी समस्या थी। वे कहती हैं कि वर्षों से लोग पीने के पानी के लिए परेशान थे और यह समस्या कई गांवों में गंभीर थी। उन्होंने बताया कि जब वे इस विषय को लेकर आगे बढ़ीं, तो योजनाएं बनीं, काम हुआ और आज कई जगहों पर पानी की व्यवस्था बेहतर हुई है। वे इसे अपने काम का सबसे संतोषजनक हिस्सा मानती हैं।

वे यह भी कहती हैं कि जनप्रतिनिधि होना केवल पद पाना नहीं, बल्कि हर समय लोगों के प्रति जवाबदेह रहना है। उनका कहना है कि उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं की पूरी जानकारी रहती है और वे लगातार उनके समाधान के लिए काम करती रहती हैं। वे इस बात पर भी जोर देती हैं कि विकास तभी सफल है जब वह हर व्यक्ति तक पहुंचे। उनका लक्ष्य हमेशा यही रहा है कि समाज, विशेषकर गरीब और कमजोर वर्ग, सशक्त हो। वे विश्वास जताती हैं कि यदि निष्ठा और पारदर्शिता से काम किया जाए, तो जनसेवा सिर्फ एक दायित्व नहीं रहती, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन जाती है।

उन्होंने कहा कि वे खुद जनजाति समाज से आती हैं। पहले यहां लालच देकर जनजातीय लोगों का कन्वर्जन करा लिया जाता था, लेकिन उनकी सरकार अब बहुत गंभीरता से काम कर रही है, खुद उनके समाज के लोग भी इसको लेकर गंभीर हैं। जनजातीय समाज हमेशा से सनातनी रहा है। वह अपनी संस्कृति को बचाकर रखे, इसके लिए भी वे लगातार काम कर रहे हैं।

Topics: संपतिया उइकेसमाजसेवाजनजातीय समाजसुशासन संवादअपनी संस्कृतिपाञ्चजन्य विशेष
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