“हिमालय हमारी चेतना है”-अंतरराष्ट्रीय हिमालयी महिला सम्मेलन में डॉ शैलेंद्र का संदेश
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होम भारत उत्तराखंड

“हिमालय हमारी चेतना है”-अंतरराष्ट्रीय हिमालयी महिला सम्मेलन में डॉ शैलेंद्र का संदेश

हल्द्वानी के देवाशीष बैंकट हॉल में भारत, नेपाल व तिब्बती महिलाओं का अंतरराष्ट्रीय हिमालयी महिला सम्मेलन संपन्न। हिमालयी संस्कृति, पर्यावरण व मातृशक्ति की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Nov 23, 2025, 12:20 pm IST
inउत्तराखंड
Himalayi Sanskriti Sammelan

हल्द्वानी: शहर के देवाशीष बैंकट हॉल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिमालयी महिला सम्मेलन आज गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। भारत, नेपाल और तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह सम्मेलन हिमालयी संस्कृति, महिला नेतृत्व और सामाजिक जागरूकता पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।

चुनौतियों से गुजर रही हिमालयी संस्कृति

सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखण्ड प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा—“हिमालयी संस्कृति कई चुनौतियों से गुजर रही है और भविष्य को संस्कारित, सुरक्षित और सक्षम बनाने की जिम्मेदारी मातृशक्ति की है। परिवार मिलन, संस्कृति, परंपरा और संवाद ही आने वाली पीढ़ियों का सबसे बड़ा संबल हैं।” उन्होंने उत्तराखंड के निर्माण के 25 वर्ष, संघ शताब्दी वर्ष और गौरा देवी जन शताब्दी का उल्लेख करते हुए हिमालयी समाज में चिंतन की नवीन दिशा का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण संकटों का उल्लेख करते हुए कहा—“हिमालय केवल भूगोल नहीं, हमारी चेतना है — उसकी रक्षा समाज की साझा जिम्मेदारी है।”

अन्य विशिष्ट वक्ताओं के विचार हल्द्वानी के महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा—“हिमालयी महिला केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था की धुरी है। नगर स्तर पर संस्कृति को जीवन व्यवहार में उतारना ही वास्तविक विकास है।”

शिक्षा जड़ों से जुड़ती है तो बनती है ज्ञान

दिल्ली विश्वविद्यालय की सीपीडीएचई निदेशक प्रो. डॉ. गीता सिंह ने शिक्षा और संस्कृति को जोड़ते हुए कहा “जब शिक्षा अपनी जड़ों से जुड़ती है तो वह ज्ञान बनती है। हिमालयी महिला इस ज्ञान परंपरा की प्रथम संवाहक और पीढ़ियों की संस्कार वाहक हैं।” तिब्बती पार्लियामेंट-इन-एक्साइल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आचार्य येशी फुंटसोक ने भारत और तिब्बत के सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा—“हिमालय हमारे बीच सीमा नहीं, बल्कि साझा आध्यात्मिक विरासत और बंधुत्व की कड़ी है। इस सम्मेलन ने उस संबंध को पुनः जीवित किया है।”

नेपाली कलाकार बोले-यह आत्मा और साझी संस्कृति का मिलन

प्रसिद्ध नेपाली लोक कलाकार इब्सल संजयाल ने भाषा, लोक-कला और संगीत को संस्कृति का जीवन स्वर बताते हुए कहाने आयोजन समिति, सह-आयोजकों, अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा—“यह केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हमारी साझा आत्मा, संस्कृति और भविष्य का मिलन था। इस मंच ने हिमालयी आवाज़ को एक स्वर, एक दिशा और एक उद्देश्य दिया है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संवाद आगे और व्यापक स्वरूप में जारी रहेगा और भारत–नेपाल–तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत को और मज़बूती मिलेगी।

सम्मेलन में विषयगत चर्चा के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन हुआ। महिलाओं की उत्साही भागीदारी और विभिन्न हिमालयी समुदायों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को जीवंत और ऐतिहासिक स्वर प्रदान किया। इस आयोजन का संचालन भारत–नेपाल हिमालयी लोक संस्कृति परिषद ने किया, जिसमें हिमालय परिवार, हिमालयी अधिवक्ता परिषद तथा नारद संचार सह-आयोजक के रूप में जुड़े रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

Topics: हल्द्वानी सम्मेलनहिमालयी संस्कृतिहिमालयी महिला शक्तिडॉ शैलेन्द्रInternational Himalayan Women's ConferenceHaldwani ConferenceRSSHimalayan CultureHimalayan Women PowerआरएसएसDr. Shailendraअंतरराष्ट्रीय हिमालयी महिला सम्मेलन
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