बीते दिनों महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मुंबई स्थित मझगांव सिविल सेशन कोर्ट के क्लर्क-टाइपिस्ट चंद्रकांत वासुदेव को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा, जबकि जज एजाजुद्दीन एस काजी अभी तक फरार हैं। इस मामले में एसीबी की विशेष अदालत ने सोमवार (17 नवंबर) को क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बुधवार (19 नवंबर) को उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। वहीं, एसीबी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सिविल कोर्ट के फरार चल रहे जज की जांच की अनुमति मांगी है।
जांच एजेंसी के अनुसार, सिविल कोर्ट के 40 वर्षीय क्लर्क वासुदेव ने दावा किया कि उसने 11 नवंबर 2025 को एक याचिकाकर्ता से जज एजाजुद्दीन काजी के लिए 15 लाख रुपये की रिश्वत ली। जज ने क्लर्क के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। वासुदेव ने गवाहों के सामने एजाजुद्दीन काजी को व्हाट्सऐप कॉल किया था और उन्होंने इस रकम के लिए अपनी सहमती दी थी। जिसके कारण पिछले हफ्ते एसीबी ने जज की ओर से रिश्वत लेते हुए क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव को रंगे हाथों पकड़ा था।
जानें क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला अदालत के शौचालय में क्लर्क और संपत्ति विवाद से जुड़े एक व्यक्ति के बीच हुई बातचीत से शुरू हुआ था। क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव ने उस व्यक्ति से कहा था, “साहब (जज) के लिए कुछ करो तभी फैसला तुम्हारे पक्ष में आएगा।” बताया जा रहा है कि क्लर्क ने याचिकाकर्ता से पहले 25 लाख रुपये की मांग की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, क्लर्क वासुदेव ने याचिकाकर्ता से एक कैफे में मुलाकात की और 25 लाख रुपये मांगे। 10 लाख अपने लिए और 15 लाख जज काजी के लिए। मांग ठुकराए जाने के बाद वासुदेव ने अपने सहकर्मी को व्हाट्सऐप कॉल किया और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो उनके खिलाफ आदेश जारी कर दिया जाएगा। हालांकि बातचीत के बाद रिश्वत की फाइनल रकम 15 लाख रुपये तय की गई।
एसीबी ने क्लर्क को पकड़ने के लिए जाल बिछाया
वासुदेव ने याचिकाकर्ता को 10 नवंबर को कहा कि वह अगले दिन चेंबूर के एक कैफे में रिश्वत की रकम लेकर पहुंचे। लेकिन याचिकाकर्ता ने समझदारी से काम लेते हुए रिश्वत की मांग के बारे में एसीबी को सूचित किया और जिन्होंने दोषियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। इसके बाद जब वासुदेव निर्धारित स्थान पर रिश्वत लेने आया, तो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने उसे 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। वहीं जज एजाजुद्दीन काजी फरार है। क्लर्क ने अधिकारियों को बताया कि उसने जज एजाजुद्दीन काजी की ओर से यह रिश्वत ली थी। एसीबी के निर्देश पर वासुदेव ने गवाहों की मौजूदगी में काजी को फोन किया। वासुदेव से फोन पर बात करते हुए, काजी ने रिश्वत की रकम लेने की बात स्वीकार की और वासुदेव को पैसे अपने घर लाने को कहा। पूछताछ के दौरान वासुदेव ने बताया कि वह एक साल से अदालत में क्लर्क के तौर पर काम कर रहा था और जज के साथ उसके अच्छे संबंध थे। उसने आगे बताया कि जज उसके निजी और पारिवारिक मामलों में उसकी मदद करते थे, जिसके कारण उनके बीच अक्सर व्हाट्सऐप पर बातचीत होती थी।
एसीबी ने मामले से जुड़े अहम सबूत जब्त किए
एसीबी की एक टीम 12 नवंबर को जज के घर गई, तो वहां पर ताला लगा हुआ मिला। एसीबी ने मामले से जुड़े अहम सबूत जब्त कर लिए हैं, जिनमें रिश्वत की रकम, कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और वासुदेव का मोबाइल फोन शामिल है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी जज के सहयोगियों और वकीलों के बयान दर्ज किए गए हैं।

















