देश में नक्सलवाद अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षा बल लगातार बड़ी कार्रवाई कर रहे हैं और माओवादी संगठन कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। वर्षों तक सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना कुख्यात माओवादी कमांडर मादवी हिडमा आखिरकार मुठभेड़ में मारा गया है। उसकी मौत को नक्सलवाद के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन था हिडमा- मादवी हिडमा का जन्म साल 1981 में सुकमा क्षेत्र (तत्कालीन मध्य प्रदेश, वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था। साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर वह धीरे-धीरे माओवादी संगठन का सबसे खतरनाक और चालाक चेहरा बन गया। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की एक बटालियन का कमांडर था। CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य भी था। बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल इकलौता आदिवासी सदस्य था। हिडमा पर केंद्र और कई राज्यों की सरकारों ने मिलाकर करीब 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। अकेले केंद्र सरकार ने ही 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
दो दर्जन से ज्यादा हमलों का मास्टरमाइंड- हिडमा को देश में हुए कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। सबसे चर्चित हमले- 2013 का दरभा घाटी नरसंहार, जिसमें कई बड़े राजनीतिक नेता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 2017 का सुकमा हमला, जिसमें CRPF के कई जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा भी वह दर्जनों घात लगाकर किए गए हमलों, अपहरणों और गांवों में दहशत फैलाने की घटनाओं में शामिल रहा।
कैसे मारा गया हिडमा- आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मरेदुमिल्ली मंडल के घने जंगलों में मंगलवार सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ सुबह 6.30 से 7 बजे के बीच चली। जिले के पुलिस अधीक्षक अमित बरदार ने पुष्टि की कि इस मुठभेड़ में छह माओवादी ढेर हुए हैं। इन्हीं में कुख्यात माओवादी कमांडर हिडमा भी शामिल था। सुरक्षा बलों को लंबे समय से उसकी तलाश थी, क्योंकि वह माओवादी गतिविधियों का मुख्य संचालनकर्ता और कई इलाकों में हिंसा फैलाने का प्रमुख चेहरा था। कुछ ही समय पहले हिडमा की मां ने सार्वजनिक रूप से बेटे से आत्मसमर्पण करने की भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वह हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आए। लेकिन हिडमा ने मां की बात नहीं मानी और हथियार उठाए रखा।चूंकि वह लगातार जंगलों में छिपकर सुरक्षाबलों पर हमला करता रहा, इसलिए आखिरकार उसे ढूंढकर कार्रवाई करनी पड़ी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हिडमा की मौत नक्सल संगठन की रीढ़ तोड़ने वाला फैसला साबित होगी।











