गत 7-9 नवंबर तक कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में वार्षिक युवा संवाद ‘विमर्श-2025’ का आयोजन हुआ। इसका विषय था- संविधान भारत की आत्मा। युवा (यूथ यूनाइटेड फार विजन एंड एक्शन) संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कविंदर तालियान ने ‘युवा’ के उद्देश्य और उसकी यात्रा का परिचय देते हुए कहा कि जैसी दिशा युवाओं को मिलेगी, वैसी ही देश की दशा होगी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. अशोक कुमार नागावत (कुलपति, डी.एस.ई.यू.) ने संविधान की समकालीन प्रासंगिकता पर अपना विचार रखा। प्रो. पवित्रा भारद्वाज (प्राचार्या, कमला नेहरू कॉलेज) ने युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित किया। प्रो. बलराम पाणी (डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कहा कि विमर्श जैसा मंच युवाओं को विचारशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा प्रदान करता है।
मुख्य वक्ता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. गोयल ने कहा कि भारत का संविधान विश्व के सबसे जीवंत संविधानों में से एक है, जिसमें शासन का ढांचा ही नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन भी समाहित है। विमर्श के दूसरे दिन का विषय था- ‘सेवा और राष्ट्र निर्माण के 100 वर्ष : आत्मनिर्भर भारत की ओर।’ मुख्य अतिथि मुकुंद बिहारी ने कहा कि अंग्रेजों ने न केवल हमारी शिक्षा और अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचाई, बल्कि हमें हमारी सांस्कृतिक पहचान से भी दूर करने का प्रयास किया। संघ ने समाज को पुनः उसकी जड़ों से जोड़ा।
संघ विचारक रतन शारदा ने कहा कि संघ सेवा को अपना मूल उद्देश्य मानता है। स्वतंत्र पत्रकार राहुल रौशन ने कहा कि लंबे समय तक मीडिया में एक ही विचारधारा का वर्चस्व रहा, लेकिन अब वैचारिक विविधता का विस्तार हो रहा है। तीसरे दिन समापन सत्र का विषय था- ‘संवैधानिक द्वंद्व : सांस्कृतिक मार्क्सवाद के संदर्भ में चुनौतियां और समाधान।’
सत्र की शुरुआत डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी के संबोधन से हुई, जिन्होंने तीन दिवसीय विमर्श की प्रमुख चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया और इसे युवा विचारों के संवाद और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक बताया। मुख्य वक्ता प्रफुल्ल केतकर (संपादक, ऑर्गनाइज़र) ने कहा कि जहां-जहां मार्क्सवाद फैला है, वहां-वहां लोकतंत्र का गला घोंटा गया।
मुख्य अतिथि प्रो. मनीष आर. जोशी (सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने युवाओं से हीन भावना को त्यागने का आग्रह करते हुए कहा कि हमें अपनी महान भारतीय धरोहर को पहचानना और अपनाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो.पवित्रा भारद्वाज ने कार्यक्रम को ‘विचारों का उत्सव’ बताया। इस अवसर पर युवा संगठन की वेबसाइट का शुभारंभ भी हुआ।

















