बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की वापसी की कोशिश कमजोर पड़ गई, जबकि NDA शुरुआती रुझानों में 200 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ प्रचंड जीत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लगातार कमजोर संगठन, सीमित जातीय समीकरण और जंगल राज की मजबूत नैरेटिव ने विपक्ष की संभावनाओं को कमजोर कर दिया।
RJD का MY समीकरण हुआ कमजोर
RJD ने चुनाव अपनी परंपरागत मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक के भरोसे लड़ा, जो कुल 30% मतदाता हैं। लेकिन तेजस्वी यादव EBC, दलित और युवा वोटर को आकर्षित नहीं कर सके। 2023 का जाति सर्वे भी वोट में तब्दील नहीं हुआ और यह कदम महज राजनीतिक हथकंडा बताकर आलोचना का विषय बना रहा।
‘जंगल राज’ की छाया से नहीं निकल पाया RJD
1990-2005 के बीच का दौर जिसे जंगल राज कहा जाता है, आज भी बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। अपहरण, हत्या, जातीय हिंसा और कानून व्यवस्था की बदहाली के आंकड़े आज भी लोगों की स्मृति में दर्ज हैं। इसी नैरेटिव ने तेजस्वी की छवि पर गहरा असर डाला।
NDA ने शांति, स्थिरता और सुशासन को बनाया आधार
Nitish Kumar और BJP ने चुनावों में हिंसा-मुक्त माहौल और स्थिर शासन को प्रमुख मुद्दा बनाया। 2025 में जहां एक भी री-पोल नहीं हुआ, वहीं 1990 के दशक में 60 से 80 मौतें और सैकड़ों बूथों पर री-पोल आम था। यह तुलना NDA के लिए बेहद प्रभावी रही।
कांग्रेस बनी महागठबंधन की कमजोर कड़ी
कांग्रेस का प्रदर्शन फिर कमजोर रहा। इस बार 60 सीटों पर लड़ने के बावजूद पार्टी केवल कुछ सीटों पर बढ़त में थी। 2020 में जिस “ड्रैग फैक्टर” का आरोप कांग्रेस पर लगा था, वह 2025 में और स्पष्ट रूप से दिखा।
आंतरिक कलह और ‘फ्रेंडली फाइट’ का नुकसान
महागठबंधन के अंदर RJD, कांग्रेस, CPI, CPM और VIP के बीच 11 सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” हुई, जिससे वोट कटे और NDA को लाभ मिला। 2020 में NDA और MGB के बीच केवल 0.03% वोट का अंतर था, इसलिए इस तरह की सीटों का असर निर्णायक रहा।
VIP और अन्य सहयोगियों का कमजोर प्रदर्शन
मुकेश सहनी और उनकी पार्टी VIP अपनी अपेक्षित निषाद-EBC वोटर को नहीं जोड़ सकी। इसी तरह CPI-ML और अन्य दलों की रणनीतियाँ एकजुट नहीं दिखीं।
मतदाताओं ने विकास, स्थिरता और सुशासन को चुना
मतदाता वोट चोरी और SIR में धांधली के आरोपों पर ध्यान नहीं दे रहे थे। वे महिला विकास, स्थानीय शासन, वेलफेयर स्कीम्स और जीविका दीदी कार्यक्रमों को अधिक महत्व दे रहे थे।
NDA की रणनीति और मोदी फैक्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा, JD(U)-BJP की तालमेल भरी कैंपेन और सामाजिक स्थिरता की छवि ने NDA को भारी समर्थन दिलाया। नीतीश कुमार की सरकारी योजनाओं, खासकर जीविका दीदी के खातों में ₹1 करोड़ (₹10,000 प्रति दीदी) डालने की घोषणा बेहद प्रभावी साबित हुई।
2025 के चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग
बिहार ने 67.13% वोटिंग के साथ इतिहास बनाया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से काफी अधिक रही। यह रुझान भी NDA के पक्ष में गया, क्योंकि महिलाएं नीतीश सरकार की योजनाओं से जुड़ी रही हैं।
2020 बनाम 2025: आंकड़ों में तुलना
2020 में NDA 125 और MGB 110 सीटें लाया था। तब BJP 74, JD(U) 43, RJD 75 और Congress 19 सीटों पर जीती थी। 2025 में NDA इससे कहीं आगे बढ़ता दिख रहा है और संभवतः 243 में से 200+ सीटों का आंकड़ा छू सकता है।

















