ओडिशा के जनजाति बहुल सुंदरगढ़ जिले के बोणाई ब्लॉक के टिकायतपाली थाना अंतर्गत सरसरा बलांग स्थित सगिडीही में ईसाई मिशनरियों द्वारा आयोजित एक कथित प्रार्थना सभा के माध्यम से भोले-भाले लोगों को कनवर्ट कराने के प्रयास सफल नहीं हो सके। स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रशासन ने इस प्रार्थना सभा को रोक दिया। जब स्थानीय लोगों को इस सभा के माध्यम से कनवर्जन की जानकारी मिली, तो उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रशासन ने इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया।
सुंदरगढ़ में कनवर्जन कार्यक्रम के विरोध में स्थानीयों का आक्रोश
यह उल्लेखनीय है कि सुंदरगढ़ जिला हमेशा से ही ईसाई मिशनरियों के निशाने पर रहा है। “जीसस हेवेनली लैडर मिनिस्ट्री” नामक ईसाई संस्था द्वारा बोणाई ब्लॉक के टिकायतपाली थाना अंतर्गत सगिडीही में एक प्रार्थना सभा के आयोजन की बात कही गई थी। इस सूचना के बाद स्थानीय लोगों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई और उन्होंने इस प्रकार के कनवर्जन संबंधी कार्यक्रमों का विरोध किया। यह कार्यक्रम 13-15 नवंबर तक आयोजित किया जाना था। स्थानीय लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया। इस संबंध में उन्होंने स्थानीय थाना अधिकारी से लेकर एसडीपीओ, आरक्षी अधीक्षक और डीआईजी तक को ज्ञापन की प्रति प्रदान की थी।
गांवों में जबरन धर्म परिवर्तन की आशंका पर ग्रामीणों की शिकायत
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ व्यक्ति, जो कथित रूप से एक ईसाई मिशनरी समूह से जुड़े हुए हैं, दूरदराज के गांवों का दौरा कर रहे हैं और हिन्दुओं को ईसाई मत अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे तथाकथित “पवित्र जल” का प्रयोग कर रहे हैं और लोगों से यह वादा कर रहे हैं कि यदि वे ईसाई धर्म अपनाते हैं, तो उन्हें बीमारी, कष्ट और गरीबी से मुक्ति मिल जाएगी। ऐसे कार्य न केवल स्थानीय हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं का अपमान करते हैं, बल्कि यह बलपूर्वक या धोखे से धर्म परिवर्तन से संबंधित कानूनों का उल्लंघन भी प्रतीत होते हैं। यदि इन गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो यह क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव और सार्वजनिक शांति भंग का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने अपने ज्ञापन में आगे कहा कि यह जानकारी मिली है कि उक्त “आशीर्वाद (प्रार्थना उत्सव)” के आयोजक विभिन्न कार्यों में लिप्त हैं, जिनमें झूठे वादे कर लोगों को हिन्दू धर्म से ईसाई मत में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित करना शामिल है- जैसे कि चमत्कारिक उपचार, व्यक्तिगत और आर्थिक समस्याओं का समाधान, तथा बेहतर जीवन की गारंटी देना। तथाकथित “पवित्र जल” और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रयोग कर लोगों को आध्यात्मिक बहाने से गुमराह करना, प्रलोभन, लालच और मिथ्या प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना आदि शामिल हैं, जो कि ओडिशा फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 1967 की धारा 3 और 4 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
इस तरह की गतिविधियों से धार्मिक तनाव उत्पन्न हो सकता है और सार्वजनिक शांति तथा साम्प्रदायिक सौहार्द को बाधित किया जा सकता है। इसलिए ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए और उचित कार्रवाई की जाए, ताकि बणाई गढ़ क्षेत्र में सभी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अखंडता सुरक्षित रह सके। सुंदरगढ़ सरपंच संघ के अध्यक्ष उग्रेसन किशान ने पत्रकारों से बातचीत में ऐसे आयोजनों की कड़ी आलोचना की थी।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में आने वाले मुख्य अतिथि पर कई गंभीर आरोप भी हैं। उन पर अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से भ्रामक और झूठे प्रचार करने का आरोप लगा है, जैसे कि बीमार होने पर दवा न लेना, डॉक्टर की सलाह न मानना आदि। इस शिकायत के आधार पर जांच करने के बाद, पुलिस ने कार्यक्रम स्थल का दौरा कर प्रार्थना सभा को कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी । इस कार्रवाई से क्षेत्र के वनवासी लोगों ने राहत की सांस ली है और कहा है कि वे धर्मांतरण और अंधविश्वास से बचने में सफल रहे हैं।
विश्व हिन्दू परिषद के जिला संगठन मंत्री हेमंत कुमार ने प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ईसाई मिशनरियों के इस तरह के कार्यक्रम का मूल उद्देश्य भोले-भाले लोगों को विभिन्न गैरकानूनी तरीकों से उनके पूर्वजों की संस्कृति से अलग करना है। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण मिशनरियों की यह चाल सफल नहीं हो पाई। विश्व हिन्दू परिषद ओडिशा (पश्चिम) प्रांत के सामाजिक समरसता प्रमुख शांतनु कुसुम ने भी पुलिस प्रशासन के कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा के नाम पर इस तरह की चंगाई सभाओं का आयोजन कर ईसाई मिशनरी अंधविश्वासों को बढ़ावा देते हैं। इसलिए केवल यही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में इसी प्रकार की किसी भी चंगाई सभा का आयोजन नहीं होने दिया जाना चाहिए।

















