यूरोप एक बड़े इस्लामी ‘शरणार्थियों’ के प्रति बहुत ‘बड़ा दिल’ रखने वाले देश जर्मनी में इस्लामी कट्टरपंथ की तूती बोल रही है, कन्वर्जन तेजी से बढ़ रहा है। इस सबके बीच एक हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि उस देश के युवाओं का कट्टर इस्लामीकरण करने के लिए मजहबी गुट पुराने ढर्रे की चीजें छोड़ डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा ले रहे हैं। इसे खास तौर पर नाम दिया गया है ‘टिकटॉक इस्लामिज्म’, जिसके माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के रास्ते युवक—युवतियों को मजहबी कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है। यह नया खतरनाक तरीका विशेष रूप से 15 से 25 वर्ष के लड़के—लड़कियों को टारगेट करता है, क्योंकि इस आयु वर्ग वाले सोशल मीडिया पर कहीं ज्यादा वक्त बिताते हैं और आकर्षक, भावनात्मक और चकाचौंध वाले वीडियो देखकर प्रभावित होते हैं।
जर्मनी की सरकार ने हाल ही में ‘मुस्लिम इंटरएक्टिव’ नामक इस्लामी कट्टरपंथी समूह पर प्रतिबंध लगाया है। यह समूह जर्मनी को एक संवैधानिक लोकतंत्र मानने से इंकार करता है और देश में शरिया कानून लागू कर खिलाफत का राज स्थापित करना चाहता है। इसकी स्थापना 2020 में हुई थी और यह हिज्ब उत तहरीर (एचयूटी) का हिस्सा माना जाता है। यह एचयूटी गुट कई देशों में प्रतिबंधित है। यह संगठन खासतौर पर जर्मनी में जन्मे तीसरी पीढ़ी के मुसलमान युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावित करता है। इसके लिए टिकटॉक जैसे प्लेटफार्म पर अलग अंदाज और आकर्षक शॉर्ट वीडियो बनाकर यह आरोप लगाता है कि मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है और पश्चिमी समाज में उनकी मजहबी स्वतंत्रता छीनी जा रही है। इन वीडियो के जरिये यह युवाओं को ‘इस्लामिक क्रांति’ और ‘वैश्विक खिलाफत’ की नफरती सोच की ओर मोड़ने की कोशिश करता है।
इस तरह के कट्टरपंथी समूहों का मकसद जर्मनी की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करना और एक इस्लामी शासन स्थापित करना है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि पश्चिमी लोकतंत्र मुसलमानों के हितों के खिलाफ है। खासतौर पर गाजा युद्ध जैसे वैश्विक तनावों के बाद, इन विचारों का प्रसार तेजी से बढ़ा है। इस्लामी कट्टरपंथी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके युवाओं में नफरत और अलगाव की भावना पैदा करते हैं। इसके परिणामस्वरूप कई बार जर्मनी में स्कूलों और मस्जिदों में ऐसे युवा समूह पाए गए हैं जो ऑनलाइन देखे गए वीडियो से प्रभावित होकर कट्टरपंथी बन चुके हैं।
जर्मनी की सुरक्षा एजेंसियां इस समस्या को लेकर सतर्क हैं। उन्होंने ‘मुस्लिम इंटरएक्टिव’ जैसे समूहों पर सख्त कार्रवाई की है, जिसमें इनके सोशल मीडिया चैनल बंद करने, चार मस्जिदें सील करने और सदस्यों पर कानूनी कार्यवाही करने जैसे कदम शामिल हैं। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस्लाम एवं पांथिक स्वतंत्रता के नाम पर हिंसा या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, यह भी प्रयास किया जा रहा है कि युवाओं को डिजिटल माध्यमों के सही उपयोग के बारे में जागरूकता दी जाए और उन्हें कट्टरपंथ से दूर रखा जाए।
‘टिकटॉक इस्लामिज्म’ एक नया और आधुनिक तरीका है जिसमें सोशल मीडिया एप्स का इस्तेमाल कर लुभावने और भड़काने वाले वीडियो बनाकर युवाओं में अन्य मत—पंथों के विरुद्ध कट्टर नफरत भरी जाती है। ऐसे वीडियो देखकर युवाओं में मजहबी भेदभाव पैदा कर, उन्हें समाज से अलगाव की ओर ले जाते हैं और इस्लामी शासन के लिए समर्थन जुटाने का काम करते हैं। ऐसे प्रयासों को जर्मनी सरकार एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देखती है और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

















