पुरी साइबर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भुवनेश्वर से एक रियल एस्टेट कारोबारी को गिरफ्तार किया है, जिस पर भगवान जगन्नाथ मंदिर के पवित्र महाप्रसाद की अवैध ऑनलाइन बिक्री का आरोप है। आरोपी की पहचान डिस्पोजा पटनायक के रूप में हुई है, जो shreeprasad.org नामक एक वेबसाइट संचालित करता था, जिसमें दावा किया गया था कि भक्त मंदिर की रसोई से सीधे महाप्रसाद का ऑर्डर दे सकते हैं, जो उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पटनायक ने एक अन्य प्लेटफॉर्म Shrimahaprasad पर भी विज्ञापन प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि भक्त मंदिर से सीधे प्राप्त महाप्रसाद ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इस भ्रामक विज्ञापन के वायरल होते ही भक्तों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने इसे भगवान जगन्नाथ के पवित्र प्रसाद का व्यावसायीकरण करार दिया।
शिकायत के बाद कार्रवाई
इस बारे में जानकारी मिलने के बाद श्रीजगन्नाथ मंदिर के सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार पाढी , ने इस वेबसाइट की शिकायत पुरी साइबर पुलिस से की। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि यह वेबसाइट मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा रही है और भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रही है। पुलिस जांच में पाया गया कि वेबसाइट पर दिए गए फोन नंबर 9658824596 का संबंध डिस्पोजा पटनायक से है, जिसके बाद उसे भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की पुष्टि और बयान
पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि 22 अक्टूबर को पुरी साइबर पुलिस में महाप्रसाद की अवैध ऑनलाइन बिक्री को लेकर शिकायत दर्ज की गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि भुवनेश्वर के रियल इस्टेट व्यवसायी डिस्पोजा पटनायक इस वेबसाइट के पीछे थे। उन्होंने स्वीकार किया है कि अपने साले की मदद से यह वेबसाइट बनाई गई थी। इस अवैध गतिविधि में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसपी सिंह ने बताया कि महाप्रसाद केवल मंदिर के आनंद बाजार से ही खरीदा जा सकता है। मंदिर प्रशासन ने भी यह स्पष्ट किया है कि महाप्रसाद का कोई व्यावसायिक उपयोग या ऑनलाइन बिक्री अधिकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि महाप्रसाद केवल भगवान जगन्नाथ का प्रसाद है, इसका व्यावसायीकरण धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
गहरी जांच जारी
पुलिस ने यह भी बताया कि अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि क्या इस अवैध ऑनलाइन नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं। अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि अन्य वेबसाइटें भी इसी तरह की धोखाधड़ी में लिप्त हो सकती हैं। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि वेबसाइट पर अन्न (चावल), दाली (दाल), और कणिका (मीठा चावल) जैसे भोगों को ₹700 से ₹1,000 प्रति पैकेट तक की कीमत पर बेचा जा रहा था। इतना ही नहीं, सुखिली भोग (सूखा प्रसाद) और खिचड़ी (मसालेदार चावल) जैसे प्रसाद भी “श्रीमंदिर महाप्रसाद” के नाम से ऑनलाइन बेचे जा रहे थे। इससे महाप्रसाद की प्रामाणिकता और धार्मिकता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुरी पुलिस ने भक्तों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर विश्वास न करें और केवल मंदिर परिसर में स्थित अधिकृत स्थानों से ही महाप्रसाद प्राप्त करें।
अन्य फर्जी वेबसाइटों पर भी नजर
हाल के महीनों में कई फर्जी वेबसाइटें और मोबाइल एप्लिकेशन सामने आई हैं, जो भक्तों से होटल बुकिंग, दर्शन स्लॉट और महाप्रसाद के नाम पर रुपये वसूल रही हैं। कुछ वेबसाइटें तो अमेरिकी डॉलर में भी भुगतान स्वीकार कर रही थीं। इन फर्जी गतिविधियों पर मंदिर सेवक समुदाय ने नाराजगी जताई है और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, राज्य सरकार ने पहले भी कुछ संगठनों के महाप्रसाद को ऑनलाइन बेचने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। राज्य के विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा था कि भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद केवल मंदिर परिसर में ही वितरित किया जा सकता है। इसे ऑनलाइन बेचना न केवल अवैध है बल्कि धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी है। पुरी साइबर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, ताकि भगवान जगन्नाथ की परंपरा और भक्तों की भावनाओं की रक्षा की जा सके।

















