2014 से पहले भारत में चिकित्सा क्षेत्र शुरुआत के दौर में था, लेकिन तेजी से विकसित हो रहा था। उस वक्त सस्ते इलाज के लिए हर वर्ष अनुमानत: 2.5 से 3 मिलियन भारतीय विदेश जाते थे, मुख्यत: अमेरिका, यूरोप, और मिस्र जैसे देशों में, जबकि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के लिए हर साल लगभग 0.5 से 0.7 मिलियन विदेशी मरीज भारत आते थे। 2025 तक भारत की चिकित्सा सेवा में व्यापक सुधार और विस्तार हुआ है।
नए मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 808 हो गई है, जिससे लगभग 141 प्रतिशत स्नातक और 144 प्रतिशत स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों में वृद्धि हुई है। साथ ही, भारत मेडिकल टूरिज्म में विश्व में प्रमुख गंतव्य बन चुका है।
ब इलाज के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या घटकर लगभग 1 मिलियन हो गई है, जबकि इलाज के लिए 1.5 से 2 मिलियन विदेशी मरीज भारत आ रहे हैं।
इस वृद्धि के पीछे भारत में सस्ती और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और बेहतर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास है। भारत अब मेडिकल टूरिज्म में दुनिया के शीर्ष देशों में गिना जाता है।

















