ग्रेटर नोएडा । उत्तर प्रदेश एटीएस (Anti-Terrorist Squad) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कासना थाना क्षेत्र से फरहान नबी सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। फरहान पर विदेशी फंडिंग, हवाला के ज़रिए धन मंगवाने, धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और नफ़रत फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। एटीएस ने बताया कि फरहान नबी एक प्राइवेट कंपनी M/s Istanbul International Pvt. Ltd. का को-डायरेक्टर है और लंबे समय से संदिग्ध विदेशी फंडिंग से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था।
विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि फरहान ने टर्की और जर्मनी से हवाला चैनलों के माध्यम से लगभग ₹11 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बताया जा रहा है कि इस धनराशि का इस्तेमाल अमरोहा और पंजाब में कई ज़मीनों की खरीद में किया गया। एटीएस सूत्रों के मुताबिक, विदेशी फंडिंग का उपयोग भारत में ऐसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिनसे देश के धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचे।
प्रिंटिंग यूनिट और संदिग्ध किताबें
फरहान नबी ग्रेटर नोएडा के कासना क्षेत्र में स्थित अपनी प्रिंटिंग यूनिट Hakikat Printing Publication के माध्यम से कई भाषाओं — हिंदी, उर्दू, अरबी और बांग्ला — में किताबें छापता था। जांच में सामने आया कि इन पुस्तकों में धार्मिक नफ़रत फैलाने वाले कंटेंट प्रकाशित किए गए थे। छापेमारी के दौरान एटीएस ने कई संदिग्ध किताबें, लैपटॉप, मोबाइल और विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज़ जब्त किए हैं।
पूछताछ में खुलासे
एटीएस ने बताया कि फरहान नबी से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। उसने स्वीकार किया कि उसकी संस्था और संबंधित संगठन Hakikat Vakfi Foundation तथा Real Global Express Logistic Pvt Ltd के ज़रिए विदेशी फंडिंग को भारत लाने की कोशिश की जा रही थी। इसके अलावा, फरहान पर यह भी आरोप है कि उसने विदेशी नागरिकों और कुछ बांग्लादेशी प्रवासियों को बिना किसी सरकारी सूचना के ठहरने की सुविधा दी थी।
नेटवर्क की गहन जांच
फरहान नबी की गिरफ्तारी के बाद एटीएस अब उसके नेटवर्क, बैंक खातों, संपत्तियों और विदेशी संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन पैसों का इस्तेमाल कहां-कहां और किन लोगों तक किया गया।
अदालत में पेशी और न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद फरहान नबी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एटीएस ने साफ किया है कि इस मामले में विदेशी एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है ताकि फंडिंग चैनल और संबंधित व्यक्तियों की पूरी श्रृंखला का खुलासा किया जा सके।
संपत्तियों और सहयोगियों पर संभावित कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में अमरोहा, मेरठ और नोएडा में स्थित उसकी संपत्तियों पर भी एटीएस की टीम छापेमारी कर सकती है। यह भी संदेह है कि फरहान नबी के कुछ सहयोगी अभी विदेश में छिपे हुए हैं और भारत में नफ़रत फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं।
एटीएस के लिए बड़ी सफलता
यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश एटीएस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि यह केस सीधे विदेशी फंडिंग और भारत में वैचारिक विभाजन फैलाने के नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फरहान नबी से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और नामों का पर्दाफाश हो सकता है।

















