भारत हिंदू राष्ट्र है, मुस्लिम और ईसाइयों को जानबूझकर विश्वास दिलाया गया कि वे हिंदुओं से अलग हैं : मोहन भागवत
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‘भारत एक हिंदू राष्ट्र है’ : बेंगलुरु RSS व्याख्यानमाला में भागवत जी ने बताया- ‘हिन्दू होने का अर्थ और उसकी जिम्मेदारी’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने बेंगलुरु में संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित व्याख्यानमाला में कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और समाज को एक सूत्र में बांधना है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 8, 2025, 07:20 pm IST
in संघ @100, कर्नाटक

बेंगलुरु । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शनिवार को कहा कि मुस्लिम और क्रिश्चियन को जानबूझकर यह विश्वास दिलाया गया है कि वह हिंदुओं से अलग हैं, जबकि पूर्वज सभी के समान हैं और परंपरागत चिंतन भी एक जैसा है। उन्हें कई मुस्लिम और क्रिश्चियन मिले हैं जो अपना गोत्र भी बताते हैं।

संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित व्याख्यानमाला

सरसंघचालक जी संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत यहां आयोजित दो दिवसीय (8 एवं 9 नवंबर) व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन बेंगलुरु के बनशंकरी स्थित होसाकेरेहल्ली रिंग रोड पर पीईएस विश्वविद्यालय में किया गया है। पहले दिन विभिन्न राज्यों के लगभग 1,200 प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् से हुई।

भारत एक हिंदू राष्ट्र — जिम्मेदारी और एकता पर जोर

सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और हिंदू होने का अर्थ है देश के प्रति जिम्मेदार होना। उन्होंने कहा कि विविधता का सम्मान करते हुए एकता बनाए रखना भारत की खूबसूरती है। विविधता हमारी सजावट है। उन्होंने कहा, “बीइंग हिंदू, आय रिस्पॉन्सिबल फॉर भारत।” संघ का कार्य समाज को एक सूत्र में बांधना और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।

संघ का विरोध और समाज में विश्वास

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि इतने वर्षों में संघ के विरोध में बहुत कुछ कहा गया, परंतु विरोध केवल मुख से रहा, दिलों में नहीं। हम जब समाज में घूमे तो कोई विरोधी नहीं मिला। हम सेवा के लिए आए हैं और अब समाज इस पर विश्वास कर रहा है। उन्होंने कहा कि विरोधी भी हमारे लिए उपयोगी हैं, जैसे निंदक नियरे राखिए।

संघ का स्वरूप और इतिहास

संघ के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि यह संस्था अद्वितीय है, जिसकी तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती। संघ किसी प्रतिक्रिया से नहीं जन्मा। वर्ष 1857 की क्रांति के बाद यह विचार किया गया कि थोड़े लोग हम पर शासन कैसे कर रहे हैं। इसमें डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार भी शामिल थे। डॉ. हेडगेवार ने 1916-17 से इस दिशा में प्रयोग शुरू किए और 1925 में संघ के रूप में यह सामने आया। वर्ष 1939 तक कार्यकर्ताओं ने इसे एक सिद्ध मॉडल के रूप में स्वीकार किया।

व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र दोनों आवश्यक हैं। इसी विचार से शाखा की परंपरा बनी — एक घंटे के अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति और समाज दोनों का निर्माण।

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम और उद्देश्य

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 02 अक्टूबर 2025 को अपने 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। इसलिए आरएसएस द्वारा अपने शताब्दी वर्ष पर देशभर में व्याख्यानमालाएं, युवा सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम और संवाद शृंखलाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में जोड़ना है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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