लखनऊ । विगत कुछ महीनों से एसटीएफ को आधार कार्ड बनाने वाले अधिकृत साफ्टवेयर को अनाधिकृत कम्प्यूटर सिस्टम पर रिमोट एक्सेस लेकर फर्जी आधार कार्ड, जाति, आय, निवास, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, बनाने वाले ऐसे गिरोहों के बारे में सूचनायें प्राप्त हो रही थी। इस दौरान ज्ञात हुआ कि जीवनगढ़ गली नं० 12. थाना क्षेत्र क्वार्सी, जनपद अलीगढ़ में अवैध रूप से फर्जी आधार कार्ड एवं अन्य प्रमाण पत्र बनाने का काम किया जा रहा है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम द्वारा स्थानीय पुलिस के सहयोग से कुछ जनसुविधा केन्द्रों में छापा मारकर उपरोक्त दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में अभियुक्त साजिद ने बताया कि वह आधार कार्ड बनाने वाली टेक स्मार्ट कम्पनी में वर्ष-2016-17 बतौर आपरेटर का काम करता था। वर्ष 2020 के बाद बैंक व पोस्ट आफिस के माध्यम से आधार कार्ड बनाये जाने के कारण उसकी कम्पनी का काम खत्म हो गया तो स्वयं का जन सूविधा केन्द्र खोलकर जिलाधिकारी कार्यालय के अनुमति से जाति, निवास, आय, जन्म, मृत्यु आदि प्रमाण पत्रों के आवेदन पत्रों की डेटा फीडिंग का काम करने लगा। इसी दौरान गुजरात में डिपार्टमेन्ट आफ वीमेन एण्ड चाइल्ड डेवलेपमेण्ट की ओर से अधिकृत तौर पर आधार कार्ड बनाने वाले आपरेटर प्रशान्त से सम्पर्क हुआ, जिसके माध्यम से वास्तविक आधार कार्ड सापटवेयर का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर फर्जी आधार कार्ड भी बनाने लगा।
प्रशान्त के अतिरिक्त उसने पश्चिम बंगाल के आधार कार्ड बनाने वाले आपरेटर नोमान, मुजीबुर तथा अमीन के साथ मिलकर फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम किया है। वर्तमान समय में उसके एक लैपटाप पर जन्म, मृत्यु, निवारा आदि प्रमाण पत्र बनाने वाला पोर्टल https://domicile.xyz/admin इन्सटॉल है, जिसे लॉगिन आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से खोलने पर एक डैशबोर्ड प्रदर्शित होता है, जिसमें सम्बन्धित ग्रहको का विवरण अंकित कर वांछित प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है। प्रति प्रमाण पत्र 50-100 रूपये उसके बैंक खाते से डेबिट होते है एवं ग्राहको से वह 500-1000 रूपये प्रति प्रमाण पत्र लेता है।
इसी प्रकार उसके दूसरे लैपटॉप पर आधार कार्ड बनाने से सम्बन्धित साफ्टवेयर adhar enrolment client/ecmp.cmd इन्सटॉल है। ग्राहक का फर्जी आधार बनाने अथवा नाम व पता परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले पोर्टल https://domicile.xyz/admin के माध्यम से आवश्यतानुसार फर्जी जन्म/निवास प्रमाण पत्र तैयार करता है।
उसके बाद कम्प्यूटर पर एनीडेस्क के माध्यम से रिमोट आईडी वाट्सएप नम्बर पर दिल्ली निवासी आकाश नाम के व्यक्ति को भेजता है। आकाश द्वारा उसके कम्प्यूटर सिस्टम में डिपार्टमेन्ट आफ वीमेन एण्ड चाइल्ड डेवलेपमेण्ट उत्तराखण्ड को आवंटित आपरेटर से सम्बन्धित आधार कार्ड के साफ्टवेयर की डेटा फाईल इन्टॉल कर देता है। उक्त डेटा फाइल (साफ्टवेयर) में सम्बन्धित आपरेटर की आईडी, नाम, फोन नम्बर व पासवर्ड डालने पर डैशबोर्ड दिखाई देता है, जिसमें ग्राहक का विवरण डालकर आवश्यक प्रमाण पत्र अपलोड करने पर फर्जी आधार कार्ड तैयार होता है।
पूछताछ के दौरान अभियुक्त नईमुद्दीन द्वारा बताया गया कि वह बेवसाइट https://dccrorgi.co.in/admin पर अपना यूजर आईडी पासवर्ड डालकर फर्जी निवास, जन्म/मृत्यु आदि प्रमाण पत्र तैयार करता है तथा आधार कार्ड बनाने के लिए adhar enrolment client/ecmp.cmd को खोलकर आपरेटर आईडी JEPC_MKS_GIR_NS896988, आपरेटर नेम, फोन नम्बर व पासवर्ड डालने पर डैशबोर्ड प्रदर्शित होता है, जिसमें ग्राहक से सम्बन्धित विवरण अंकित करने एवं सम्बन्धित प्रमाण पत्र अपलोड करने पर आधार कार्ड बनकर तैयार हो जाता हैं, जिसका प्रिन्ट लेकर ग्राहक को सुपुर्द किया जाता है।
गिरफ्तार दोनों अभियुक्तो ने बताया कि फिंगर प्रिन्ट एवं आईरिस स्कैनर का इस्तेमाल ग्राहक का बायोमेट्रिक डेटा कैप्चर करने में किया जाता है। फर्जी बेवसाइट के माध्यम से काल्पनिक जन्मतिथि एवं निवास के आधार पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते है। उक्त प्रमाण पत्र तैयार करने में आवश्यक ग्राम प्रधान, पार्षद एवं राजपत्रित अधिकारी से सम्बन्धित प्रमाण पत्र स्वयं तैयार करते है, जिनसे सम्बन्धित मोहर आदि जन सुविधा केन्द्र से बरामद भी हुई है। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर कूटरचित एवं फर्जी आधार कार्ड उनके द्वारा तैयार किया जाता है तथा अनाधिकृत तौर पर आधार कार्ड बनाने के एवज में प्रति माह 50 हजार रूपये अधिकृत आपरेटर को देना पड़ता है।
अभियुक्तों के विरूद्ध थाना क्वार्सी जनपद अलीगढ़ में मु०अ०सं० 1069/2025 धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 342, 111 बी०एन०एस० एवं 66सी, 66डी, 73, 74 आईटी एक्ट का पंजीकृत कराया गया।

















