न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए 4 नवंबर 2025 यानी आज चुनाव होने जा रहे हैं। इसमें भारतीय मूल के 34 वर्षीय जोहरान ममदानी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं और बाकी उम्मीदवारों के मुकाबले उनके जीतने के आसार अधिक हैं। अगर कट्टर मुस्लिम ‘वोक’ जमात के चहीते ममदानी न्यूयार्क के पहले मुस्लिम मेयर के नाते चुनाव जीतते हैं तो यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गले नहीं उतरने वाला है। चुनाव की पूर्व संध्या पर उन्होंने साफ कह दिया है कि ‘कम्युनिस्ट’ जोहरान ममदानी ने अगर यह चुनाव जीते तो उनका प्रशासन न्यूयॉर्क शहर को दी जा रही फेडरल फंडिंग रोक देगा या उसे एकदम कम कर देगा। बेशक, ट्रंप का यह बयान न्यूयार्क के रहने वालों के लिए एक चेतावनी जैसा ही है, क्योंकि ममदानी के बयान और काम उन्हें इस्लामवादी विचारधारा से मेल खाता दिखाते हैं।
ममदानी के बारे में लोगों का सचेत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा है कि ममदानी के नेतृत्व में न्यूयॉर्क शहर ‘आर्थिक और सामाजिक संकट’ का सामना करेगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘कम्युनिस्ट’ ममदानी के हाथों यह महान शहर प्रभावित होगा और वहां का पैसा बर्बाद होगा। उन्होंने कहा कि ममदानी जीतते हैं तो वे न्यूयार्क शहर को कानूनी तौर पर जितनी कम से कम हो सके उतनी ही फंडिंग जारी करेंगे, शहर की ‘मदद’ करने को ज्यादा फंड नहीं देंगे। ममदानी की बजाय ट्रंप ने निर्दलीय उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा नहीं, बल्कि पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

इस चुनाव में ममदानी ने कई दावे किए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर वे जीते तो महंगाई कम कर देंगे, किराए पर नियंत्रण और सामान्य जनता के लिए जीवन को आसान बनाएंगे। चुनाव से संबंधित हाल के सर्वेक्षणों में ममदानी को 45.8 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी एंड्रयू कुओमो (31.1 प्रतिशत) और कर्टिस स्लिवा (17.3 प्रतिशत) से कहीं अधिक हैं। उन्हें लेकर ट्रंप का सख्त रवैया ममदानी के प्रति उनकी अरुचि साफ दर्शाता है।
ट्रंप का ममदानी विरोध राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वे ममदानी को डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर से एक कहीं ज्यादा रैडिकल, कम्युनिस्ट विचारधारा वाला व्यक्ति मानते हैं। उनका कहना है कि ममदानी पूर्व मेयर बिल डी ब्लासियो से भी खराब काम करेंगे। ट्रंप का यह बयान न्यूयॉर्क की फंडिंग रोकने की धमकी के रूप में भी सामने आया है। असल में फंडिंग एक बड़ा राजनीतिक हथियार मानी जाती है, खासकर जब किसी शहर को वाशिंगटन से पैसों की जरूरत हो।

ट्रंप की इस चेतावनी के बाद न्यूयार्क के मतदाता असमंजस में हैं। ट्रंप के समर्थक इसे ममदानी के खिलाफ एक अहम लड़ाई मान रहे हैं, जबकि ममदानी समर्थक इसे ट्रंप द्वारा बढ़ाई गई राजनीतिक दमन की रणनीति और एक झूठा आरोप समझ रहे हैं। ममदानी ने अपनी जीत के लिए उम्मीदें पाली हुई हैं। वे अपना एजेंडा सुधारवादी बताते हैं।
लेकिन गत कुछ दिनों जोहरान ममदानी के कार्यक्रम और बयान साफ दिखाते हैं कि वे पहले मुस्लिम हैं बाद में अमेरिकी। मस्जिद में जाकर अमेरिका पर आतंकवादी हमले के साजिशकर्ता इमाम सिराज वहाज से मिलना, उसके साथ तस्वीर खिंचवाकर सोशल मीडिया पर पूरी बेशर्मी के साथ साझा करना दिखाता है कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि वे कट्टर मजहबी सोच और साजिशी लोगों से मिलें। अगर वे जीते तो उन मजहबी उन्मादी ‘शरणार्थियों’ का हौसला बढ़ेगा ही जो अमेरिका के विभिन्न शहरों में अपनी मजहबी मनमानियां कर रहे हैं और विरोध करने वाले पर ‘नस्लवादी’ होने का आरोप लगाकर विक्टिम कार्ड खेलते हैं। यह रोग पूरे यूरोप में फैलकर उसे बर्बाद कर रहा है, लेकिन ममदानी जैसे ‘सेकुलर’ इस ओर आंखें मूंदे रहते हैं।
संभवत: ट्रंप का इसी बात का भय है कि ममदानी के जीतने से कट्टर मजहबी सोच वालों को बल मिलेगा और शहर उपद्रवों की भेंट चढ़ जाएगा, ठीक वैसे जैसे लंदन में मेयर सादिक खान के राज में हो रहा है। वहां आम लंदनवासी मजहबी उत्पातों और दखल से बेहद आतंकित है, लेकिन मेयर सादिक खान के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है बल्कि वे उलटे मूल लंदन वालों को ही नस्लवादी ठहरा देते हैं।
इस चुनाव में जोहरान ममदानी के सबसे आगे चलने, ट्रंप के ममदानी विरोध और एंड्रयू कुओमो की वापसी के प्रति समर्थन से राजनीतिक पारा बहुत चढ़ा हुआ है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का जोहरान ममदानी को लेकर दिया उक्त बयान गौर करने लायक है। क्या न्यूयॉर्क के नागरिक इस चेतावनी को समझेंगे या ‘सेकुलर’ रहकर न्यूयार्क को पहला मुस्लिम मेयर सौंपेंगे? आज का दिन न्यूयार्क शहर के लिए वास्तव में अहम रहने वाला है।

















