तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने रविवार को मायिलादुथुराई में एक कार्यक्रम में कहा कि सनातन धर्म ही भारत की असली आत्मा है। ये बात उन्होंने धर्मपुरम अधीनम के 27वें पोंटिफ के 60वें जन्मदिन पर मणि विजया उत्सव के दौरान कही। ये अधीनम एक पुरानी धार्मिक संस्था है, जो तमिल संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में काम करती है। गवर्नर ने अपनी स्पीच में सनातन धर्म की खासियतों पर जोर दिया और तमिलनाडु की भक्ति परंपरा को भी याद किया।
सनातन धर्म की सोच सभी को अपनाने वाली
गवर्नर ने बताया कि सनातन धर्म सबको एक परिवार की तरह देखता है। ये भारत के हर कोने को अपना मानता है। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म, जो भारत की आत्मा है, पूरे भारत को एक परिवार मानता है। यहां तक कि जो इस पर विश्वास नहीं करते, या इसे डेंगू और मलेरिया की तरह बुरा कहते हैं, उन्हें भी हम अपना मानते हैं। क्योंकि सनातन कभी किसी को बाहर नहीं करता।” ये बात उन्होंने उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कही, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म की आलोचना की थी। गवर्नर का कहना था कि ये धर्म इतना उदार है कि आलोचना करने वालों को भी गले लगाता है।
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भारत की सांस्कृतिक ताकत
राज्यपाल आरएन रवि ने स्पष्ट किया कि भारत की असली ताकत उसकी आध्यात्मिक उदारता में है। इसके अलावा धर्मपुरम अधीनम जैसी संस्थाओं की वजह से सदियों से ये ताकत बची हुई है। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं मुश्किल वक्त में भी भारतीय संस्कृति को जिंदा रखती रहीं। ब्रिटिश राज में तो हालात और बुरे थे, जब अंग्रेजों ने हमारी संस्कृति, पहचान और भाषा को मिटाने की कोशिश की।
तमिलनाडु: भक्ति का स्रोत
गवर्नर ने तमिलनाडु को “वो पवित्र भूमि” कहा, जहां से भक्ति की धारा पूरे भारत में फैली। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की ये परंपरा आज भी देश को जोड़ती है। भक्ति आंदोलन ने यहां से शुरू होकर पूरे भारत को प्रभावित किया, और ये आज भी प्रासंगिक है।
















