इसरो ने सबसे भारी 'बाहुबली' रॉकेट जीसैट-7 अंतरिक्ष में भेजा, रचा इतिहास, नौसेना की बनेगा तीसरी आंख
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इसरो ने सबसे भारी ‘बाहुबली’ रॉकेट जीसैट-7 अंतरिक्ष में भेजा, रचा इतिहास, नौसेना की बनेगा तीसरी आंख

स्वदेश में डिजाइन और विकसित इस उपग्रह से न केवल समुद्री इलाकों में संचार सुविधा मिलेगी, बल्कि अंतरिक्ष में नौसेना के लिए तीसरी आंख का काम करेगा।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Sudhir Kumar Pandey
Nov 2, 2025, 10:55 pm IST
in भारत, विज्ञान और तकनीक
इसरो ने बाहुबली रैकेट अंतरिक्ष में भेजा

इसरो ने बाहुबली रैकेट अंतरिक्ष में भेजा

नई दिल्ली, (हि.स.)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को सबसे भारी ‘बाहुबली’ रॉकेट जीसैट-7 लॉन्च करके इतिहास रचा दिया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन केंद्र से अंतरिक्ष में भेजा गया यह उपग्रह भारतीय नौसेना के लिए बहुत खास है। स्वदेश में डिजाइन और विकसित इस उपग्रह से न केवल समुद्री इलाकों में संचार सुविधा मिलेगी, बल्कि अंतरिक्ष में नौसेना के लिए तीसरी आंख का काम करेगा।

इसरो ने आज शाम को निर्धारित 5.26 बजे अपना अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट सीएमएस-03 देश को जमीन से लॉन्च कर दिया। यह सैटेलाइट 4410 किलो वजन का है और इसे एलवीएम3-एम5 रॉकेट के माध्यम से गेसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में भेजा गया है। यह भारत के लिए एक अहम उपग्रह माना जा रहा है, क्योंकि ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से सीखे गए सबकों को इससे मजबूती मिलेगी। इस उड़ान में भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह सीएमएस-03 अंतरिक्ष में भेजा गया है। सीएमएस-03 एक बहु-बैंड संचार उपग्रह है, जो भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत महासागरीय क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा।

भारतीय नौसेना के मुताबिक यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत संचार उपग्रह होगा। यह उपग्रह नौसेना की अंतरिक्ष आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र जागरुकता क्षमताओं को मजबूत करेगा। स्वदेश में डिजाइन और विकसित इस उपग्रह में कई अत्याधुनिक घटक शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। जटिल होती सुरक्षा चुनौतियों के इस युग में जीसैट-7आर आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग कर राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने के भारतीय नौसेना के अटूट संकल्प का प्रतीक है।

नौसेना के मुताबिक जीसैट-7आर उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक और बेहतर दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में ऐसे उन्नत ट्रांसपोंडर लगाए गए हैं, जो विभिन्न संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक को सपोर्ट करने में सक्षम हैं। उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ के साथ यह उपग्रह भारतीय नौसेना के जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और समुद्री संचालन केंद्रों के बीच सुरक्षित, निर्बाध तथा वास्तविक समय संचार को सुनिश्चित करेगा, जिससे नौसेना की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। एलवीएम3 के पिछले मिशन ने चंद्रयान-3 मिशन का प्रक्षेपण किया था, जिसमें भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना था।

Topics: इसरोभारतीय नौसेनाबाहुबली रैकेटजीसैट-7 लॉन्च
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