गत दिनों कोरापुट (ओडिशा) जिले के जयपुर नगर में एक रैली आयोजित हुई। यह रैली जयपुर के पुराने सरकारी बस स्टैंड से शुरू होकर मुख्य सड़क मार्ग से होते हुए सूर्यमहल तक गई। वहां एक सभा हुई। सभा में वक्ताओं ने कहा कि पूरे देश में कन्वर्जन पर पूर्ण रूप से रोक लगे। कन्वर्जन कराने के प्रयास करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। विदेशी शक्तियों द्वारा किए जा रहे कन्वर्जन के कारण जनजातीय संस्कृति पर खतरा मंडरा रहा है।
जनजातीय संस्कृति का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। स्वतंत्रता के पहले से ही भारत में ईसाई मिशनरियों द्वारा पूरे देश में सरल और भोले-भाले जनजातीय, वनवासी एवं अनुसूचित जाति के लोगों को तरह-तरह के प्रलोभनों के माध्यम से कन्वर्जन कराया जा रहा है।
महात्मा गांधी ने कन्वर्जन को महापाप बताया था और कहा था कि यदि सत्ता उनके पास होती तो वह कन्वर्जन का पूरा धंधा ही खत्म कर देते। गांधी जी के देश में कन्वर्जन होना बड़ी शर्मनाक बात है।
वक्ताओं ने कहा कि विदेश से पैसे लाकर कन्वर्जन का खेल खेला जा रहा है। इसके पीछे काफी बड़ी साजिश है। इसलिए कन्वर्जन को पूर्ण रूप से रोका जाए। वक्ताओं ने कहा कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 25 यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
‘प्रचार’ का अर्थ ‘कन्वर्जन’ नहीं है, जैसा कि हमारे न्यायालयों ने अनेक मामलों में स्पष्ट किया है। स्वतंत्रता के बाद, देश के कई संतों और प्रमुख व्यक्तियों ने कन्वर्जन को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने की मांग की थी। संविधान सभा में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन उस समय की सत्तारूढ़ पार्टी का मत था कि ऐसे कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य सरकारों के पास है।

















