पटना । भारतीय जनता पार्टी ने राजद द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र “प्रण पत्र” पर निशाना साधते हुए उसे “ढकोसला पत्र” बताया है। साथ ही भाजपा ने तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी से तीखे सवाल भी पूछे हैं।
बीजेपी ने कहा — राजद द्वारा जारी किया गया तथाकथित “प्रण पत्र” असल में बिहार की जनता को फिर से ठगने का प्रयास है। यह कोई घोषणा पत्र नहीं, बल्कि “ढकोसला पत्र” और “प्रायश्चित पत्र” है — जो उनके भ्रष्टाचार, अपराध और जंगलराज के पापों को ढकने की नाकाम कोशिश है।
भ्रष्टाचार की पाठशाला कहकर किया हमला
भाजपा ने पत्र जारी कर कहा — राजद भ्रष्टाचार की पाठशाला रही है। तजस्वी यादव यह भलीभांति जानते हैं कि उनकी सरकार कभी नहीं बनने वाली, इसलिए अब वे हवाई किले और झूठे वादों का खेल खेल रहे हैं। उनके दावे न तो 2025 के बजट में फिट होते हैं, न 2050 के। दरअसल, यह घोषणाएं सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए की जा रही हैं।
“जमीन और जमीर दोनों” बेचने वाले अब दे रहे हैं वादे
बीजेपी ने आगे कहा — जिस दल के राज में “जमीन और जमीर दोनों” बचाना मुश्किल था, वही आज “घर-घर नौकरी” का सपना बेच रहा है। तेजस्वी का परिवर्तन दरअसल अपराधियों का पुनर्जीवन है — शाहबुद्दीन को महिमामंडित करना, ओसामा जैसे अपराधियों को टिकट देना, और रीता लाल या अशोक महतो की पत्नी को आगे कर फिर से खून-खराबे का खेल शुरू करने की साजिश रचना।
जनता के सवाल तेजस्वी यादव से
भाजपा ने कहा- जनता पूछती है– तेजस्वी पहले यह वादा करें कि अब उनके घर से अपहरण के सौदे नहीं होंगे, उनके गुंडे रंगदारी नहीं वसूलेंगे, और महिलाओं को उनके मंचों पर अपमानित नहीं किया जाएगा। बिहार को फिर से जंगलराज में झोंकने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2005 से पहले और बाद का बिहार
बीजेपी ने आगे कहा कि 2005 से पहले बिहार में अराजकता, बेरोजगारी, पलायन और भय का माहौल था। एनडीए सरकार के आने के बाद राज्य में शिक्षा, रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव हुए। हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक खुले, लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली और उद्योगों के लिए बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 लागू किया गया।
प्रशांत किशोर और तेजस्वी पर दोहरे वोटर कार्ड का आरोप
भाजपा ने प्रशांत किशोर और तजस्वी पर दोहरे वोटर कार्ड का आरोप लगते हुए कहा- आज जब बिहार विकास के रास्ते पर है, तब राजद और उनके नए साथी प्रशांत किशोर फिर से “सिस्टम चोर” बनकर उभर रहे हैं। प्रशांत किशोर के दो वोटर कार्ड सामने आना साबित करता है कि ये लोग लोकतंत्र के साथ भी खेल कर रहे हैं।
जब उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव और “सिस्टम सुधारक” कहे जाने वाले किशोर खुद “दो वोटर कार्ड” रखते हैं, तो यह सिर्फ गलती नहीं बल्कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों का जानबूझकर उल्लंघन है।
‘प्रण पत्र’ नहीं ‘ढकोसला पत्र’
अंत में बीजेपी ने कहा- बिहार की जनता अब समझ चुकी है — ये ‘प्रण पत्र’ नहीं, बल्कि “ढकोसला पत्र” है। राजद का यह खेल अब नहीं चलेगा। बिहार अब विकास, सुशासन और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ चुका है — और वहीं रहेगा।

















