दिल्ली का असली निर्माता कौन? इतिहास की परतों में दबा अनंगपाल तोमर का सच
August 20, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

दिल्ली का असली निर्माता कौन? इतिहास की परतों में दबा अनंगपाल तोमर का सच

तमाम ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक साक्ष्य एक अलग कहानी बयां करते हैं - यह कि दिल्ली की नींव हिंदू सम्राट महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय ने रखी थी। उन्होंने ढिल्लिकापुरी नामक नगर बसाया, जिसे बाद में दिल्ली कहा जाने लगा। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम द्वारा खोजे गए अभिलेख भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Sudhir Kumar Pandey
Oct 28, 2025, 06:45 pm IST
inभारत, दिल्ली

पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने मांग की है कि दिल्ली का अंग्रेजी नाम DELHI बदलकर DILLI किया जाए। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है कि यह कदम भारतीय संस्कृति और पहचान को और मजबूत करेगा। दिल्ली सरकार 1 नवंबर को जब राज्य का नया लोगो जारी करे तो उसमें DILLI लिखा हो।

इस बीच यह भी जानना जरूरी है कि दिल्ली का नाम कैसे पड़ा और इसे बसाया किसने। मध्यकालीन भारतीय इतिहास को लिखने के दौरान कई सच्चाइयों को या तो दबा दिया गया या तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। परिणाम यह हुआ कि आज यह भ्रम गहराता गया कि आखिर दिल्ली की असली पहचान किससे जुड़ी है – उस विदेशी आक्रांता कुतुबुद्दीन ऐबक से, जिसने 12वीं सदी में महरौली के 27 जैन मंदिरों को नष्ट कर उनके अवशेषों से ‘कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद’ का निर्माण कराया, या फिर अलाउद्दीन खिलजी से, जिसे कुछ इतिहासकारों ने दिल्ली का शिल्पकार बताया?

लेकिन तमाम ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक साक्ष्य एक अलग कहानी बयां करते हैं – यह कि दिल्ली की नींव हिंदू सम्राट महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय ने रखी थी। उन्होंने ढिल्लिकापुरी नामक नगर बसाया, जिसे बाद में दिल्ली कहा जाने लगा। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम द्वारा खोजे गए अभिलेख भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।

अनंगताल: दिल्ली के इतिहास का जीवंत साक्ष्य

अनंगताल झील का निर्माण 1052 ईस्वी में महाराजा अनंगपाल द्वितीय ने कराया था। कहा जाता है कि उन्होंने 1052 से 1060 के बीच ढिल्लिकापुरी नगर की स्थापना की थी जो बाद में दिल्ली बनी। अनंगपाल ने ढिल्लिका या ढिल्ली शहर की नींव रखी थी जिसका उल्लेख बिजोलिया, सरबन और अन्य संस्कृत शिलालेखों में मिलता है।

इसी काल में उन्होंने लौह स्तंभ को स्थापित किया और लाल कोट नामक दुर्ग का निर्माण करवाया – जिसे आज भी “किला राय पिथौरा” के नाम से जाना जाता है।

एएसआई में रहते हुए पुरातत्वविद् डॉ. बी.आर. मणि ने 1993–95 के दौरान इस क्षेत्र में खुदाई कराई थी, जिससे यहां बने सरोवर, मंदिरों और दीवारों के अवशेष सामने आए।

लाल कोट और दिल्ली की प्रारंभिक संरचना

पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार लाल कोट की परिधि लगभग 3.6 किलोमीटर थी, जबकि किला राय पिथौरा इससे आगे तक फैला था। इन दुर्गों के अवशेष यह साबित करते हैं कि अनंगपाल द्वितीय के शासनकाल में दिल्ली एक संगठित, सुरक्षित और सुव्यवस्थित नगरी थी। उनकी स्थापत्य दृष्टि और जल-संरक्षण प्रणाली — जैसे अनंगपुर दुर्ग, अनंग बांध और सूरजकुंड — उस युग की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण हैं।

कौन थे महाराजा अनंगपाल द्वितीय?

इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय तोमर वंश के 16वें शासक थे। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम ने अबुल फज़ल की आईन-ए-अकबरी में उल्लिखित सूचियों और बीकानेर, ग्वालियर, कुमाऊं तथा गढ़वाल की प्राचीन पांडुलिपियों के अध्ययन से तोमर राजवंश के कुल 19 राजाओं की जानकारी दी है।

अनंगपाल द्वितीय ने 1051 ईस्वी में अपने पिता कुमारपाल तोमर के निधन के बाद गद्दी संभाली। अपने शासनकाल में उन्होंने राजधानी को अनंगपुर से स्थानांतरित कर योगिनीपुर और महिपालपुर के बीच स्थित ढिल्लिकापुरी (वर्तमान दिल्ली) में स्थापित किया। संवत् 1109 (लगभग 1052 ईस्वी) में उन्होंने लौह स्तंभ की स्थापना की और इसी को आधार बनाकर लाल कोट किले सहित अनेक भव्य निर्माण कराए।

ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि उस काल में योगिनीपुर नामक क्षेत्र में एक विशाल मंदिर परिसर था, जिसे बाद में तोमर काल में ढिल्ली या ढिल्लिका कहा जाने लगा। कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के शिलालेखों तथा अन्य पुरातात्त्विक स्रोतों से यह संकेत मिलता है कि अनंगपाल द्वितीय ने लगभग 27 महल और मंदिरों का निर्माण कराया था।

उन्होंने लौह स्तंभ के निकट अनंगताल सरोवर का निर्माण कराया, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में लगभग 169 फीट लंबा और पूर्व-पश्चिम में 152 फीट चौड़ा था। सरोवर के समीप एक भव्य भवन भी बनवाया गया था, जिसे लाल कोट की दीवारों ने चारों ओर से घेर रखा था।

इन निर्माणों से स्पष्ट होता है कि तोमर वंश के समय की दिल्ली अपेक्षाकृत छोटी थी, लेकिन संगठित शहरी ढांचे और इंजीनियरिंग दृष्टि से अत्यंत उन्नत थी। फरीदाबाद के पास स्थित अनंगपुर दुर्ग, अनंग बांध और सूरजकुंड जलाशय उस युग की उत्कृष्ट जल-संरक्षण तकनीक के उदाहरण हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा अनंगपाल द्वितीय का निधन 1081 ईस्वी में हुआ, और उन्होंने लगभग 29 वर्ष 6 माह 18 दिन तक दिल्ली पर शासन किया।

Topics: दिल्ली का इतिहासपाञ्चजन्य विशेषदिल्ली किसकीदिल्ली का असली नामदिल्ली का नामदिल्ली किसने बसाईदिल्ली का निर्माण किसने कियाराजा अनंगपाल तोमर
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

बंटवारे के दाैरान भारत की सीमा की ओर बढ़ते हिदू शरणार्थी

विभाजन की विभीषिका : सत्ता के लिए अखंडता की बलि

जनकदुलारी

विभाजन की विभीषिका : महीनों भूखे प्यासे रहकर पहुंचे इस पार

रजनी पंजाबी

विभाजन की विभाषिका  :  सैकड़ों एकड़ जमीन छोड़नी पड़ी

स्वतंत्रता के 79 साल: चुनौतियों से आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति तक की सशक्त यात्रा

आज का श्लोक : स्वमङ्गलसमाशंसी यः स्वराष्ट्रमुपेक्षते

एक शिविर में राहत सामग्री का वितरण करते संघ के स्वयंसेवक (फाइल चित्र)

विभाजन की विभीषिका : संघ ने संभाला

Load More

ताज़ा समाचार

EPFO

PF खाताधारकों के लिए जरूरी खबर! EPFO ने बताया- इन जानकारियों को किसी से शेयर न करें

उत्तराखंड: रवि टम्टा की उपलब्धि,  इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल के विकास पर मिला सम्मान

इस्लामाबाद में भारत के हाई कमीशन से हटे बैरिकेड्स, अब दिल्ली में PAK दूतावास के बाहर बड़ा एक्शन

श्री मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के कनाडा दौरे के समर्थन में 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने पीएम कार्नी को लिखा पत्र

बंटवारे के दाैरान भारत की सीमा की ओर बढ़ते हिदू शरणार्थी

विभाजन की विभीषिका : सत्ता के लिए अखंडता की बलि

Nitin Nabeen Uttarakhand visit

कांग्रेस ने किया ‘वंदे मातरम’ का संस्थागत अपमान, नितिन नबीन बोले-‘ये असली मुस्लिम लीग’

महुआ मोइत्रा, तृणमूल नेता

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा होंगी गिरफ्तार? भारतीय सेना और गृहमंत्री पर विवादित टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद

मुंबई 26/11 हमला: हाफिज सईद समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू, BNSS के तहत कार्रवाई

जनकदुलारी

विभाजन की विभीषिका : महीनों भूखे प्यासे रहकर पहुंचे इस पार

प्रतीकात्मक तस्वीर

कार्बन उत्सर्जन न घटा तो सदी के अंत तक पश्चिमी हिमालय की मौसमी बर्फ गायब हो सकती है

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies