दिल्ली का असली निर्माता कौन? इतिहास की परतों में दबा अनंगपाल तोमर का सच
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दिल्ली का असली निर्माता कौन? इतिहास की परतों में दबा अनंगपाल तोमर का सच

तमाम ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक साक्ष्य एक अलग कहानी बयां करते हैं - यह कि दिल्ली की नींव हिंदू सम्राट महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय ने रखी थी। उन्होंने ढिल्लिकापुरी नामक नगर बसाया, जिसे बाद में दिल्ली कहा जाने लगा। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम द्वारा खोजे गए अभिलेख भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Sudhir Kumar Pandey
Oct 28, 2025, 06:45 pm IST
in भारत, दिल्ली

पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने मांग की है कि दिल्ली का अंग्रेजी नाम DELHI बदलकर DILLI किया जाए। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है कि यह कदम भारतीय संस्कृति और पहचान को और मजबूत करेगा। दिल्ली सरकार 1 नवंबर को जब राज्य का नया लोगो जारी करे तो उसमें DILLI लिखा हो।

इस बीच यह भी जानना जरूरी है कि दिल्ली का नाम कैसे पड़ा और इसे बसाया किसने। मध्यकालीन भारतीय इतिहास को लिखने के दौरान कई सच्चाइयों को या तो दबा दिया गया या तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। परिणाम यह हुआ कि आज यह भ्रम गहराता गया कि आखिर दिल्ली की असली पहचान किससे जुड़ी है – उस विदेशी आक्रांता कुतुबुद्दीन ऐबक से, जिसने 12वीं सदी में महरौली के 27 जैन मंदिरों को नष्ट कर उनके अवशेषों से ‘कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद’ का निर्माण कराया, या फिर अलाउद्दीन खिलजी से, जिसे कुछ इतिहासकारों ने दिल्ली का शिल्पकार बताया?

लेकिन तमाम ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक साक्ष्य एक अलग कहानी बयां करते हैं – यह कि दिल्ली की नींव हिंदू सम्राट महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय ने रखी थी। उन्होंने ढिल्लिकापुरी नामक नगर बसाया, जिसे बाद में दिल्ली कहा जाने लगा। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम द्वारा खोजे गए अभिलेख भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।

अनंगताल: दिल्ली के इतिहास का जीवंत साक्ष्य

अनंगताल झील का निर्माण 1052 ईस्वी में महाराजा अनंगपाल द्वितीय ने कराया था। कहा जाता है कि उन्होंने 1052 से 1060 के बीच ढिल्लिकापुरी नगर की स्थापना की थी जो बाद में दिल्ली बनी। अनंगपाल ने ढिल्लिका या ढिल्ली शहर की नींव रखी थी जिसका उल्लेख बिजोलिया, सरबन और अन्य संस्कृत शिलालेखों में मिलता है।

इसी काल में उन्होंने लौह स्तंभ को स्थापित किया और लाल कोट नामक दुर्ग का निर्माण करवाया – जिसे आज भी “किला राय पिथौरा” के नाम से जाना जाता है।

एएसआई में रहते हुए पुरातत्वविद् डॉ. बी.आर. मणि ने 1993–95 के दौरान इस क्षेत्र में खुदाई कराई थी, जिससे यहां बने सरोवर, मंदिरों और दीवारों के अवशेष सामने आए।

लाल कोट और दिल्ली की प्रारंभिक संरचना

पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार लाल कोट की परिधि लगभग 3.6 किलोमीटर थी, जबकि किला राय पिथौरा इससे आगे तक फैला था। इन दुर्गों के अवशेष यह साबित करते हैं कि अनंगपाल द्वितीय के शासनकाल में दिल्ली एक संगठित, सुरक्षित और सुव्यवस्थित नगरी थी। उनकी स्थापत्य दृष्टि और जल-संरक्षण प्रणाली — जैसे अनंगपुर दुर्ग, अनंग बांध और सूरजकुंड — उस युग की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण हैं।

कौन थे महाराजा अनंगपाल द्वितीय?

इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा अनंगपाल तोमर द्वितीय तोमर वंश के 16वें शासक थे। ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल कनिंघम ने अबुल फज़ल की आईन-ए-अकबरी में उल्लिखित सूचियों और बीकानेर, ग्वालियर, कुमाऊं तथा गढ़वाल की प्राचीन पांडुलिपियों के अध्ययन से तोमर राजवंश के कुल 19 राजाओं की जानकारी दी है।

अनंगपाल द्वितीय ने 1051 ईस्वी में अपने पिता कुमारपाल तोमर के निधन के बाद गद्दी संभाली। अपने शासनकाल में उन्होंने राजधानी को अनंगपुर से स्थानांतरित कर योगिनीपुर और महिपालपुर के बीच स्थित ढिल्लिकापुरी (वर्तमान दिल्ली) में स्थापित किया। संवत् 1109 (लगभग 1052 ईस्वी) में उन्होंने लौह स्तंभ की स्थापना की और इसी को आधार बनाकर लाल कोट किले सहित अनेक भव्य निर्माण कराए।

ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि उस काल में योगिनीपुर नामक क्षेत्र में एक विशाल मंदिर परिसर था, जिसे बाद में तोमर काल में ढिल्ली या ढिल्लिका कहा जाने लगा। कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के शिलालेखों तथा अन्य पुरातात्त्विक स्रोतों से यह संकेत मिलता है कि अनंगपाल द्वितीय ने लगभग 27 महल और मंदिरों का निर्माण कराया था।

उन्होंने लौह स्तंभ के निकट अनंगताल सरोवर का निर्माण कराया, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में लगभग 169 फीट लंबा और पूर्व-पश्चिम में 152 फीट चौड़ा था। सरोवर के समीप एक भव्य भवन भी बनवाया गया था, जिसे लाल कोट की दीवारों ने चारों ओर से घेर रखा था।

इन निर्माणों से स्पष्ट होता है कि तोमर वंश के समय की दिल्ली अपेक्षाकृत छोटी थी, लेकिन संगठित शहरी ढांचे और इंजीनियरिंग दृष्टि से अत्यंत उन्नत थी। फरीदाबाद के पास स्थित अनंगपुर दुर्ग, अनंग बांध और सूरजकुंड जलाशय उस युग की उत्कृष्ट जल-संरक्षण तकनीक के उदाहरण हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा अनंगपाल द्वितीय का निधन 1081 ईस्वी में हुआ, और उन्होंने लगभग 29 वर्ष 6 माह 18 दिन तक दिल्ली पर शासन किया।

Topics: दिल्ली का असली नामदिल्ली का नामदिल्ली किसने बसाईदिल्ली का निर्माण किसने कियाराजा अनंगपाल तोमरदिल्ली का इतिहासपाञ्चजन्य विशेषदिल्ली किसकी
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