'H-1 B वीज़ा है बड़ा धोखा' : अमेरिकी CEO ने किया खुलासा, कहा- भारतीय कामगारों का हो रहा शाेषण
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‘H-1 B वीज़ा है बड़ा धोखा’ : अमेरिकी CEO ने किया खुलासा, कहा- भारतीय कामगारों का हो रहा शाेषण

अमेरिकी निवेशक जेम्स फिशबैक ने H-1B वीज़ा को 'घोटाला' बताया। भारत से सस्ते श्रमिकों की भर्ती पर अमेरिकी कंपनियों को आड़े हाथों लिया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Oct 28, 2025, 03:58 pm IST
inभारत, विश्व
Trump Administration H-1B Visa

प्रतीकात्मक तस्वीर

वाशिंगटन (हि.स.) । प्रमुख अमेरिकी निवेश कंपनी ‘एजाेरिया’ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और पूर्व सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) में अहम भूमिका निभाने वाले जेम्स फिशबैक ने “एच-1 बी वीज़ा कार्यक्रम” को ‘बड़ा धोखा’ करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने उन कंपनियों की भी आलोचना की है जो ‘अमेरिकी प्रतिभाओं’ को छोड़कर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं।

भारतीय श्रमिकों की नियुक्ति पर फिशबैक का आरोप

फिशबैक ने आरोप लगाया कि भारत से “सस्ते श्रमिकों” को नियुक्त करने से योग्य अमेरिकी कामगारों का शोषण होता है, जिससे उन्हें नौकरी के अवसर नहीं मिलते। इसके साथ ही इस कार्यक्रम से विदेशी श्रमिकों का भी शोषण होता है।

अमेरिकी कंपनियों पर गंभीर आरोप

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, फ़िशबैक ने लिखा, “तथाकथित अमेरिकी कंपनियाँ कहती हैं कि उनके पास एच-1 बी कार्यक्रम का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि उन्हें इन नौकरियों के लिए अमेरिकी नहीं मिल रहे हैं।”

फ़िशबैक के अनुसार, वर्तमान भर्ती प्रक्रियाएँ नौकरी के विज्ञापनों को अस्पष्ट करके और विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर अमेरिकी कर्मचारियों की उपेक्षा करती हैं।

फिशबैक बोले — ‘अब खत्म होना चाहिए H-1B घोटाला’

उन्होंने कहा, “यह एक कड़वी सच्चाई है। वे अमेरिकियों की तलाश ही नहीं कर रहे हैं। वे उनका साक्षात्कार लेने से इनकार करते हैं। वे ‘बॉक्स चेक’ करने के लिए अस्पष्ट समाचार पत्रों में नौकरी के विज्ञापन छिपाते हैं, और जब कोई आवेदन नहीं करता, तो वे एक और विदेशी कर्मचारी को आयात करते हैं। एक और योग्य अमेरिकी को नौकरी, वेतन और इन दोनों के साथ आने वाले सम्मान और उद्देश्य से वंचित करते हैं। यह शर्मनाक है। अब समय आ गया है कि एच-1 बी घोटाले को पूरी तरह से खत्म किया जाए।”

ट्रम्प प्रशासन के निर्णय के बाद आई प्रतिक्रिया

फिशबैक की यह टिप्पणी ट्रम्प प्रशासन द्वारा एच-1 बी वीज़ा आवेदनों के लिए शुल्क बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने की घोषणा के कुछ हफ़्तों बाद आई है। यह कार्यक्रम विशेष तौर पर विदेशी कर्मचारियों के लिए सालाना 65,000 वीज़ा प्रदान करता है, जिनका उपयोग मुख्य रूप से तकनीकी कंपनियाँ करती हैं।

भारतीय सबसे बड़े लाभार्थी

एच-1 बी वीज़ा के सबसे बड़े प्राप्तकर्ता भारतीय हैं, जिनका वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत कुल आवेदनों में 70% से अधिक हिस्सा है। इस बीच अपने पोस्ट में फिशबैक ने दावा किया कि अमेरिका में भारतीय कामगारों का भी शोषण हो रहा है।

भारतीय और चीनी श्रमिकों पर भी टिप्पणी

उन्होंने कहा, “भारतीय और चीनी सोचते हैं कि वे बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन अंततः उनका भी शोषण होता है। हालाँकि मुझे उनसे कोई सहानुभूति नहीं है, क्योंकि वे अमेरिकी नागरिकों को दोयम दर्जा देने और हमारे साथ अपने ही देश में गुलामों जैसा व्यवहार करने में मुख्य रूप से भागीदार हैं।”

विदेशी श्रमिकों के कारण अमेरिकी अवसरों पर असर

फिशबैक ने आरोप लगाया कि भारत से सस्ते विदेशी श्रमिक लाने से कंपनियों की स्थिति बेहतर नहीं होती, बल्कि योग्य अमेरिकी कामगारों की स्थिति और भी बदतर होती है क्योंकि उनके पास उस कंपनी में काम करने और आय अर्जित करने का अवसर नहीं रहता।

कानूनी आव्रजन पर फिशबैक की सख्त राय

कानूनी आव्रजन की धारणा को अस्वीकार करते हुए, फिशबैक ने इसके पूर्ण “स्थगन” की माँग की और ज़ोर देकर कहा कि देश के नागरिकों में पर्याप्त प्रतिभा और क्षमता मौजूद है।
उन्होंने कहा, “मुझसे अक्सर पूछा जाता है, ‘क्या आप कानूनी आव्रजन का समर्थन करते हैं? ऐसा आव्रजन जो अमेरिका को बढ़ने में मदद करे?’ और यह सुनने में अच्छा लगता है। सचमुच करता भी है। यह उचित, उदार, यहाँ तक कि देशभक्तिपूर्ण भी लगता है। लेकिन सच यह है कि मैं ऐसा नहीं मानता। मैं पूर्ण रूप से ‘आव्रजन रोक’ का समर्थन करता हूँ। क्योंकि अमेरिका को खास बनाने वाली चीज़ वह नहीं है जिसे हम आयात करते हैं—बल्कि वह है जो हमारे पास पहले से ही है।”

‘अमेरिकी प्रतिभा और साहस ही असली शक्ति’

उन्होंने कहा, “यह देश प्रतिभा, साहस और मेहनत से भरपूर है। लाखों अमेरिकी कम रोज़गार, कम वेतन या उपेक्षित हैं। हालांकि वे कड़ी मेहनत और योगदान देने के लिए उत्सुक हैं।”
फिशबैक के इस बयान ने अमेरिका में एच-1 बी वीज़ा नीति और विदेशी श्रमिकों की भूमिका पर एक नई बहस छेड़ दी है।

Topics: भारतीय आईटी प्रोफेशनलअमेरिका-भारत संबंधH-1B घोटालाट्रम्प प्रशासनअमेरिकी इमीग्रेशनभारतीय श्रमिकविदेशी श्रमिक विवादटेक कंपनियांH-1B वीज़ाH-1B वीज़ा विवादजेम्स फिशबैकअमेरिकी रोजगारH-1B वीज़ा घोटालाअमेरिका रोजगार नीति
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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