अमेरिका में ट्रम्प के “वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट” के अंतर्गत अब कई पाठ्यक्रमों पर पेशेवर दर्जा खोने की तलवार लटक गई है। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इनमें से अधिकतर ऐसे पाठ्यक्रम हैं, जिनमें महिलाएं ही प्रमुखता से हैं। ये पाठ्यक्रम महिलाओं के लिए आय के स्रोत होते हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन का यह कानून कहीं महिला विरोधी तो नहीं है, ऐसा कई लोग प्रश्न कर रहे हैं। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा विभाग के इस कदम से वे तमाम लोग प्रभावित होंगे, जो इस समय महंगी डिग्री हासिल कर रहे हैं, और बाद में वे इसलिए बेकार हो जाएंगे क्योंकि उनकी डिग्री ही “पेशेवर” नहीं होगी। न्यूज वीक के अनुसार नर्सिंग को शिक्षा विभाग द्वारा एक पेशेवर डिग्री की नियामक परिभाषा में पेशेवर डिग्री के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। इसके साथ ही आर्किटेक्ट और अकाउंटेंट जैसे पेशेवर पाठ्यक्रम भी पेशेवर की परिभाषा से बाहर किये जाएंगे।
ये कोर्स किए गए हैं शामिल
इस एक्ट में जिन कोर्स को शामिल किया गया है, उनमें नर्सिंग, फिजीशियन असिस्टेंट प्रोग्राम, फिजिकल थेरेपी, ऑडियोलोजी, स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी, ऑक्युपेशनल थेरेपी, पब्लिक हेल्थ, सोशल वर्क, एजुकेशन डिग्री, जैसे कि टीचर प्रेपरेशन, अकाउंटिंग, आर्किटेक्चर, कुछ चुनिंदा बिजनस मास्टर्स प्रोग्राम, काउंसलिंग एवं थेरेपी प्रोग्राम।
पेशेवर डिग्री केवल 11 ही क्षेत्रों में दी जाएगी, जैसे कि मेडिसन, फार्मेसी, डेंटिस्ट्री, ऑप्टोमेट्री, लॉ, वेटर्नरी मेडिसिन, ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन, पोडियाट्री, काइरोप्रैक्टिक, थियोलॉजी और क्लिनिकल साइकोलॉजी। ये सभी परिवर्तन 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
एजुकेशन लोन पर असर
जिन पाठ्यक्रमों को पेशेवर से बाहर किया जाएगा, उन पर मिलने वाले एजुकेशनल लोन पर भी असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभाव नर्सिंग पर पड़ेगा। denver7.com ने यूएसए टूडे के हवाले से लिखा कि “ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के इस फैसले का मतलब है कि ग्रेजुएट नर्सिंग प्रोग्राम के लिए नई लोन लिमिट हर साल $20,500 और कुल $100,000 होगी। प्रोफेशनल के तौर पर क्लासिफाइड डिग्री करने वाले स्टूडेंट्स को हर साल $50,000 मिल सकते हैं और इसकी लिमिट $200,000 होगी।”
क्या कहते हैं प्रोफेसर
University of Colorado Anschutz में नर्सिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डेनिस स्मिथ ने कहा कि नर्स ही आपको सबसे पहले देखते हैं और यही वे व्यक्ति होते हैं, जो सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीशिया देते हैं और जब आप अस्पताल में होते हैं तो आपके पास रहते हैं और जो कानून बदल रहे हैं, उनसे नर्सिंग के पेशे पर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में इस समय नर्सों की कमी है और यह बहुत कठिन काम है और शारीरिक काम है। इसमें काफी मानसिक श्रम भी है और नर्स के रूप में प्रशिक्षित होने के लिए आपको काफी काम करना पड़ता है। अब इस पाठ्यक्रम को पेशेवर पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। wsws.org के अनुसार theology को शामिल किया गया है, मगर नर्सिंग, टीचिंग और एजुकेशन डिग्री आदि को पेशेवर की सूची से हटा दिया गया है। इनका कहना है कि शिक्षा विभाग इन क्षेत्रों की प्रतिष्ठा को कम कर रहा है जबकि इनके लिए लाइसेंस, आधुनिक शिक्षा, क्लीनिकल ट्रेनिंग और डायरेक्ट प्रैक्टिस की जरूरत होती है और जो जाहिर तौर पर पेशेवर प्रोग्राम की परिभाषा है।
शिक्षकों को मिलता है कम वेतन
इस पोर्टल के अनुसार अमेरिका में वैसे ही सालों के बजट कट के बाद टीचर्स को बहुत ही कम वेतन दिया जा रहा है क्योंकि वह “अर्निंग टेस्ट” को पास करने में विफल रहा है। और ट्रम्प प्रशासन अब शिक्षकों के घटते हुए जीवन यापन मापदंडों को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के बने रहने के लिए खिलाफ घातक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। और यदि टीचर्स को इतना वेतन ही नहीं मिलेगा कि वे एक सम्मानित जीवन जी सकें तो वे किसी और पेशे मे चले जाएंगे।
लोग इस कदम पर प्रश्न उठा रहे हैं क्योंकि अधिकांश पेशों में लड़कियों की भागीदारी अधिक है, जिन्हें पेशेवर डिग्री से अलग किया जा रहा है। यदि किसी पाठ्यक्रम को पेशेवर डिग्री से हटा दिया जाएगा तो उसके लिए लोन कम मिलेगा और यदि कोई व्यक्ति उस पाठ्यक्रम को करना चाहता है, तो उसे सीमित सहायता पर निर्भर रहना होगा या फिर अपनी जेब से पैसा देना होगा। लोगों का कहना है कि जिस समय नर्स जैसे पेशे में लोगों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उस समय ऐसा कदम उठाना उनकी समझ से परे है।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
ये जितने भी पेशे हैं, जिन्हें पेशेवर डिग्री से दूर किया जा रहा है, उनमें लगभग सभी में महिलाएं ही प्रमुखता से कार्य कर रही हैं। कुछ तो ऐसे पेशे हैं, जिनमें हर एक पुरुष की तुलना में नौ महिलाएं हैं। जब इनकी पढ़ाई करनी ही महंगी हो जाएगी तो जाहिर है कि इन क्षेत्रों में महिलाएं भी कम हो जाएंगी।

















