बिहार में महिलाओं का रुझान एनडीए के पक्ष में बहुत ज्यादा है। ये जानने के लिए किसी सर्वे की रूरत नहीं है। दुनिया भर के लोग अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं कि एनडीए की रैलियों में भाग लेने वाली महिलाओं की संख्या महागठबंधन की तुलना में बहुत अधिक है और उनमें उत्साह भी काफी अधिक है। इस रुझान के बहुत से कारण हैं।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 1 करोड़ 21 लाख महिलाओं को मनचाहा रोजगार अपनाने के लिए उनके बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए हैं और जो महिलाएं इस ‘सीड मनी’ का सदुपयोग करके अपना व्यवसाय अच्छे से चला पाएंगी, उन्हें 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।
वरिष्ठ पत्रकार सचिंद्र सिंह कहते हैं, “नीतीश कुमार ने लगभग बीस वर्षों तक महिला मतदाता वर्ग को पहचाना और उसे संवारा है। 2006 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शुरू की, जिसके तहत स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल खरीदने के लिए पैसे दिए गए। इससे स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या में काफ़ी कमी आई। वे लड़कियां अब महिला बन गई हैं और मतदाता भी। बिहार चुनाव की घोषणा से पहले सरकार ने महिलाओं के खातों में दस हजार रुपये जमा किए। महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाला यह प्रयोग मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी किया गया। इससे एनडीए को वहां के चुनावों में निर्णायक बढ़त मिली।”
वर्ष 2006 में नीतीश कुमार की ये सोच थी कि एक बालिका के लिए साइकिल सिर्फ साइकिल नहीं है। इस से उसकी कल्पना को पंख लग गए हैं। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा विकास था। 1990 से 2005 तक के लालू काल के जंगल राज के दौरान सब से ज्यादा प्रताड़ित महिलाएं थीं। इसीलिए आज मोदी-नीतीश एनडीए सरकार में महिलाओं को सबसे बड़ी राहत और सबसे बड़ी खुशी सुरक्षा मिली है।
मुफ्त बिजली कनेक्शन, मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त इलाज, शौचालय, पंचायती राज में आरक्षण और पीएम आवास योजना के तहत पक्के घर मिलने से महिलाओं को जो खुशी मिली है, वह अपने आप में एक अलग बात है, लेकिन सुरक्षा से उन्हें जो आत्मविश्वास मिला है, वह अतुलनीय है। एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि बिहार में कहीं भी यात्रा करने वाली महिलाएं अपनी यात्रा की निगरानी के लिए शारीरिक और डिजिटल दोनों तरह से पुलिस सहायता प्राप्त करने के लिए 112 डायल कर सकती हैं।
सरकार का एक और पहलू जिसकी बिहार में महिलाओं ने काफी सराहना की है, वह है शराबबंदी कानून, जो अप्रैल 2016 में लागू हुआ। इस कानून से पहले, पुलिस थानों में यह एक आम दृश्य था। शाम को महिलाएं ये शिकायत ले कर आती थीं कि उन के पति ने शराब पी कर उन के साथ मार-पीट की है या शराबखानों के सामने यह आम बात थी, जहां शराब पीकर आवारा लोग ऐसा माहौल बना देते थे कि महिलाओं की तो बात ही छोड़िए, सम्मानित पुरुषों के लिए भी वहां से निकलना मुश्किल हो जाता था।शराबबंदी के कानून से महिलाओं और शरी आदमियों को राहत मिली है।

















