पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के प्रमुख, जनरल साहिर शमशाद मिर्जा, हाल ही में ढाका पहुंचे। वहां उनकी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस से शनिवार देर रात मुलाकात हुई। इस दौरान यूनुस ने जनरल मिर्जा को एक किताब भेंट की, जिसका नाम है ‘आर्ट ऑफ ट्रायम्फ’। इस दौरान धूर्तता दिखाते हुए यूनुस ने पूर्वोत्तर भारत को बांग्लादेश का हिस्सा करार दे दिया।
किताब के कवर पर छपे नक्शे में पूर्वोत्तर भारत को बांग्लादेश का हिस्सा बताया। इसमें सातों पूर्वोत्तर राज्य—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। यूनुस ने रविवार को इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, जहां वे जनरल को किताब देते नजर आ रहे हैं।
इस्लामी कट्टरता और ग्रेटर बांग्लादेश
इस नक्शे ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है। लोग इसे भारत की संप्रभुता पर हमला बता रहे हैं। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। यह नक्शा कट्टरपंथी इस्लामी समूहों द्वारा प्रचारित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के विचार से जुड़ा लगता है, जो पूर्वोत्तर को बांग्लादेश में मिलाने की कल्पना करता है। यूनुस का यह कदम उनके पिछले बयानों से भी मेल खाता है, जहां वे इस क्षेत्र का बार-बार जिक्र करते रहे हैं।
पाकिस्तान-बांग्लादेश के रिश्तों में बदलाव
पिछले साल अगस्त में यूनुस ने ढाका की सत्ता संभाली, उसके बाद से बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच संबंधों में गर्मजोशी लौट आई है। पहले दोनों देशों के बीच 1971 की जंग की वजह से तनाव था। यूनुस लगातार भारत के खिलाफ विष वमन कर रहे हैं। वे कहते रहे हैं कि ये राज्य बांग्लादेश से घिरे हुए हैं। इस साल अप्रैल में अपनी चीन यात्रा के दौरान यूनुस ने चीनी अधिकारियों से कहा था कि भारत के ये सात राज्य समुद्र तक पहुंचने के लिए बांग्लादेश पर निर्भर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हम इस पूरे क्षेत्र के लिए महासागर का एकमात्र संरक्षक हैं।’ बांग्लादेश की इस महत्वाकांक्षा का उस दौरान भी भारत ने पुरजोर विरोध किया था।
यूनुस की नक्शा वाली राजनीति
इससे पहले पिछले साल भी यूनुस के करीबी नाहिद इस्लाम ने ऐसा ही एक नक्शा शेयर किया था। उसमें पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश का हिस्सा बताया गया था। यह भी ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के विचार को बढ़ावा देता था। आलोचना होने पर यूनुस ने उस पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इससे कट्टरपंथी मानसिकता से सने यूनुस की मंशा का पता चलता है।

















