बांग्लादेश की राजनीति कट्टरपंथी बनती जा रही है। इसका एक ताजा उदाहरण सामने आया है। वहां से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद जहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है, बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी के नेता नूरुल हुदा ने बेहद भड़काऊ और अलगाववादी टिप्पणी की है।
नूरुल हुदा का भड़काऊ वीडियो संदेश
दरअसल, बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के नेता नूरुल हुदा ने एक वीडियो जारी कर सीधे तौर पर भारत की अखंडता को चुनौती दी है। उनके इस बयान ने न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी देशों में भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
नूरुल हुदा ने ममता बनर्जी से अपील की कि वे हार स्वीकार कर इस्तीफा न दें, बल्कि पश्चिम बंगाल को भारत से स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दें। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली (केंद्र सरकार) के खिलाफ जंग का ऐलान करने का समय आ गया है। नेता ने दावा किया कि यदि ममता बनर्जी अलगाववाद का रास्ता चुनती हैं, तो बांग्लादेश के 17 करोड़ मुसलमान उनके पीछे खड़े होंगे। इस बयान को विशेषज्ञों द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजे
बता दें कि, मई 2026 के शुरुआती हफ्ते में आए नतीजों ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। 15 साल के ममता बनर्जी के शासन का अंत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस बार के चुनाव में न केवल टीएमसी पार्टी की हार हुई बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके अपने गढ़ भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के भीतर और बाहर भारी उथल-पुथल मची हुई है। यही नहीं ममता बनर्जी ने सीएम के पद से इस्तीफा देने से भी इंकार कर दिया है।
नूरुल हुदा के इस अलगाववादी बयान की भारत के सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। जानकारों का कहना है कि पड़ोसी देश के किसी राजनीतिक नेता द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना द्विपक्षीय संबंधों के लिए घातक है। यह बयान ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ की उस पुरानी और खतरनाक विचारधारा को हवा देने की कोशिश है, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा।

















