ओडिशा की हरी-भरी पहाड़ियों में उगाई जाने वाली सुगंधित ‘कोरापुट कॉफी’ को रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 127वें संस्करण में इसे “ओडिशा का गौरव” और “आत्मनिर्भरता तथा सशक्तिकरण का प्रतीक” बताते हुए इसकी विशेष रूप से प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री की इस सराहना पर ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने गर्व और प्रसन्नता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण और आदिवासी व महिला किसानों के परिश्रम को समर्पित सम्मान बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘कोरापुट कॉफी’ न केवल ओडिशा की पहचान बन चुकी है, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि स्थानीय उद्यमिता कैसे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि कोरापुट की कॉफी अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाती है और अब यह ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बन गई है।
यह विशेष रूप से आदिवासी समुदायों और महिला किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरापुट में कई लोग ऐसे हैं जो केवल अपने जुनून के कारण कॉफी की खेती कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो अपने कॉर्पोरेट करियर छोड़ दिए और पूरी निष्ठा से कॉफी उत्पादन में जुट गए हैं। कई महिलाएं भी इस खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि कॉफी की खेती ने कोरापुट के युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोले हैं, जिससे वे कृषि और उद्यमिता की ओर प्रेरित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि अपनी विशिष्ट गुणवत्ता, स्वाद और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण ‘कोरापुट कॉफी’ ने ओडिशा को वैश्विक कॉफी मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान दिलाया है। प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट है कि उन्होंने स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान और किसानों की मेहनत को देश के आत्मनिर्भर अभियान से जोड़ा है।
Koraput coffee is very tasty. It is the pride of Odisha!#MannKiBaat pic.twitter.com/FIp5yRhpT4
— Narendra Modi (@narendramodi) October 26, 2025
कोरापुट की जलवायु कॉफी के लिए है उपयुक्त
कोरापुट की पहचान और इतिहास पूर्वी घाट की खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा कोरापुट जिला लंबे समय तक देश के अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। लेकिन यहां की ठंडी जलवायु और उपजाऊ मिट्टी कॉफी की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। इससे न केवल स्थानीय किसानों की आजीविका में सुधार हुआ है, बल्कि पारंपरिक खेती को भी नई दिशा मिली है। कोरापुट में कॉफी की खेती का इतिहास 1930 के दशक से जुड़ा है। इसकी शुरुआत तत्कालीन राजा राजबहादुर रामचंद्र देव ने की थी। बाद में 1958 में राज्य के मृदा संरक्षण विभाग ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए कॉफी बागानों का विस्तार किया, जिससे स्थानीय कृषि को मजबूती मिली।
हर साल 60 मीट्रिक टन कॉफी खरीदती है सरकार
वर्तमान में, ओडिशा सरकार ट्राइबल डेवलपमेंट कोऑपरेटिव कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (TDCCOL) और कोरापुट एग्रो प्रोडक्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (KAPPCO) जैसी संस्थाओं के माध्यम से वनवासी किसानों से प्रतिवर्ष लगभग 60 मीट्रिक टन कॉफी की खरीद करती है। राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में ‘ब्रांड कोरापुट कॉफी’ के प्रचार और विपणन पर विशेष ध्यान दिया है। 100% अरेबिका बीन्स से तैयार यह कॉफी अपने विशिष्ट स्वाद और सुगंध के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने जताया गर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में ‘कोरापुट कॉफी’ का उल्लेख किए जाने पर ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने अत्यंत हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह सराहना राज्य के किसानों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “जब माननीय प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कोरापुट कॉफी के स्वाद और प्रभाव की चर्चा की, तो गर्व और आनंद का अनुभव हुआ। यह न केवल हमारी भूमि की विविधता का परिचायक है, बल्कि हमारे किसानों की मेहनत और संकल्प का प्रतीक भी है।” उन्होंने कहा कि ‘कोरापुट कॉफी’ ओडिशा की विविध जलवायु, समृद्ध फसल परंपरा और महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी का सजीव उदाहरण है।
This morning, pride brewed with joy when the Hon’ble PM Shri @narendramodi mentioned in his Mann Ki Baat programme about the taste and impact Koraput Coffee has had on Odisha and Bharat. Koraput coffee is a testament of Odisha’s diverse climate and harvest. De facto, it is also a… pic.twitter.com/hyFbt8J6A0
— Mohan Charan Majhi (@MohanMOdisha) October 26, 2025
मुख्यमंत्री माझी ने आगे कहा, “इस रविवार, ओडिशा की अपनी कॉफी बनाएं और परिवार के साथ कुछ सुखद समय बिताएं। भारत की कॉफी, भारत में बनी है — और अब विश्वभर में सराही जा रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की यह सराहना राज्य के आदिवासी क्षेत्रों के किसानों के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जताया आभार

















