बांग्लादेश से आ रहे समाचार बताते हैं कि अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने अपनी सरकार के दो मंत्रियों से इस्तीफा मांगा है। ये दोनों मंत्री भारत विरोधी रुख दिखाते रहे हैं और भारत के हितों के विरुद्ध बयान देते रहे हैं। इन मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम आगामी आम चुनावों से पहले अंतरिम सरकार की छवि सुधारने और भारत के साथ संबंधों को संतुलित करने की कोशिश जैसा कहा जा सकता है।
पिछले साल 5 अगस्त को बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार का गठन हुआ था, जिसकी अगुआई नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं। इस सरकार में विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से ‘आंदोलनकारी छात्र नेताओं’ को भी सलाहकार यानी मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। इन्हीं में से दो प्रमुख नाम हैं, महफूज आलम और आसिफ महमूद।
ये दोनों तथाकथित छात्र नेता 2024 के छात्र आंदोलन में अग्रणी भूमिका में थे, जिन्होंने शेख हसीना सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने में बढ़—चढ़कर भाग लिया था। लेकिन अब इन दोनों पर भारत विरोधी रुख अपनाने और नेशनल सिटिजन पार्टी के पक्ष में झुकाव रखने के आरोप लगे हैं।

महफूज और आसिफ पर आरोप है कि उन्होंने भारत के खिलाफ कई बार सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जिनमें भारत की बांग्लादेश नीति, सीमा विवाद और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर तीखी आलोचना शामिल है। इसके अलावा, इन छात्र नेताओं पर यह भी आरोप है कि वे बांग्लादेश की विदेश नीति को भारत से दूर करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव और बढ़ सकता था।
इन बयानों और गतिविधियों से यूनुस सरकार की ‘तटस्थता और संतुलन की नीति’ पर सवाल उठने लगे थे। खासकर जब बांग्लादेश में आगामी चुनावों की तैयारी चल रही है, तब भारत जैसे पड़ोसी देश के साथ संबंधों को बिगाड़ना अंतरिम सरकार के लिए जोखिम भरा हो सकता है। बांग्लादेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस ने इन दोनों मंत्रियों से इस्तीफा मांगकर यह संकेत दिया है कि उनकी सरकार कट्टरपंथी या पक्षपाती रुख को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असल में, यूनुस सरकार में पहले से ही बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टर मजहबी दलों का दबाव है। इन दलों ने महफूज और आसिफ पर एनसीपी की ओर झुकाव दिखाने का आरोप लगाया था।
यह कोई छुपी बात नहीं है कि पड़ोसी के नाते भारत बांग्लादेश का प्रमुख रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसे में सत्ता पलट के बाद, हिन्दुओं पर अत्याचार से तीखे हुए रिश्तों में इन मंत्रियों के भारत विरोधी बयानों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आती जा रही थी। इसलिए यूनुस सरकार की यह कोशिश है कि वह एक निष्पक्ष और संतुलित छवि के साथ चुनावों में उतरे ताकि जनता का भरोसा जीता जा सके।
अभी तक की चर्चा के अनुसार, बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव 2026 की शुरुआत में कराए जाने की संभावना बन रही है। हालांकि अभी तक किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों और अंतरिम सरकार की तैयारियों को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि चुनाव जनवरी-फरवरी 2026 के बीच हो सकते हैं।
मंत्रियों को जल्दी इस्तीफा देने को कहा गया है। इनके इस्तीफे मांगने से एक चीज यह भी स्पष्ट हुई है कि यूनुस सरकार भीतरी दबावों से जूझ रही है। मोहम्मद यूनुस के लिए कट्टरपंथी ताकतों और ‘उदारवादी’ विचारधारा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
इन मंत्रियों को सरकार से बाहर करने की खबरों से भारत को एक सकारात्मक संकेत गया है कि यूनुस सरकार द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देने का मन बना रही है। ठीक वैसे, जैसे मालदीव में हुआ था। वहां भी मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने दो मंत्रियों के इस्तीफे ले लिए थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबंध में अभद्र टिप्पणियां की थीं। उसके बाद, मालदीव का पर्यटन उद्योग औंधे मुंह जा गिरा था और जीडीपी घुटनों पर आ गई थी। मुइज्जू ने फौरन स्थिति भांपकर भारत से संबंध सुधारने की पहल की थी और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की थी। वे अक्तूबर 2024 में भारत के दौरे पर भी आए थे।

बहरहाल, बांग्लादेश में मंत्रियों का इस्तीफा मांगना आगामी चुनावों में यूनुस सरकार की छवि सुधारने में शायद मदद करे, खासकर उन मतदाताओं के बीच जो भारत के साथ अच्छे संबंधों के पक्षधर हैं। महफूज आलम और आसिफ महमूद की मंत्रिमंडल से छुट्टी करने की मंशा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखी जा रही है। यह यूनुस सरकार की ओर से यह संकेत है कि वह कट्टरपंथी और भारत विरोधी रुख से दूरी बनाकर एक संतुलित और समावेशी शासन की ओर बढ़ना चाहती है। आगामी चुनावों में यह रुख कितना कारगर साबित होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

















