रूस यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने बुधवार को रोसनेफ्ट और लुकोइल पर पाबंदियां लगा दीं, जो रूस के सबसे बड़े तेल निर्यातक हैं। इसी वजह से रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकारी रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने की प्लानिंग कर रही हैं। रिलायंस तो रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीददार है भारत में, और ज्यादातर बैरल सीधे रोसनेफ्ट से टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर लेती है। उसके 35 मिलियन टन के कॉम्प्लेक्स में रूसी तेल करीब आधा हिस्सा भरता है। रिलायंस के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया, “रूसी तेल के आयात में बदलाव चल रहा है, और हम पूरी तरह भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ चलेंगे।”
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रोसनेफ्ट पर पाबंदी नायरा एनर्जी के लिए भी मुश्किलें बढ़ाएगी, जो आधी रोसनेफ्ट की है और सितंबर से यूरोपीय संघ की पाबंदियों से जूझ रही है। गुजरात के वादिनार में उसके 20 मिलियन टन रिफाइनरी के प्रोडक्ट्स बेचना अब और कठिन हो जाएगा। आयातक 21 नवंबर तक कॉन्ट्रैक्टेड शिपमेंट्स ले सकते हैं। पिछली पाबंदियों से अलग, जहां रूसी तेल $60 प्राइस कैप के अंदर ट्रेड हो जाता था, यहां कंपनियों पर सीधी पाबंदी है, जिससे कट-ऑफ डेट के बाद बैरल ‘दागी’ हो जाएंगे।
भारत में रूसी तेल आयात के आंकड़े
इस साल अब तक भारत के 36% कच्चे तेल का आयात रूस से हुआ है, और इसमें रोसनेफ्ट व लुकोइल का हिस्सा करीब 60% है। इंडियनऑयल के एक सीनियर एक्जीक्यूटिव, जो सरकारी रिफाइनरी में रूसी तेल की सबसे बड़ी यूजर है, ने कहा कि उनके क्रूड बास्केट में ये बैरल 15-18% हैं। उन्होंने कहा, “अभी जल्दबाजी ठीक नहीं। हम फाइन प्रिंट देख रहे हैं। लेकिन वेस्ट एशिया, अफ्रीका, अमेरिका जैसे इलाकों से वैकल्पिक सप्लाई जुटाना मुश्किल नहीं होगा। हां, बाकी भी तो उसी बाजार में घुसेंगे, जिससे बेंचमार्क प्राइस और प्रीमियम बढ़ेंगे। इससे मार्जिन पर असर पड़ेगा। लेकिन बैंकिंग इश्यू आ सकते हैं।” उल्लेखनीय है कि ट्रंप के बैन ऐलान के बाद गुरुवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्राइस 5% चढ़ गया, यानी $2.9 प्रति बैरल बढ़कर $65.50 हो गया। उन्होंने ये भी कहा, “अच्छी बात ये है कि प्राइस 60 के दशक में हैं। $70 तक जाएं तो भी संभाल लिया जाएगा।”
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अमेरिकी पाबंदियों के मायने
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव डाल रहे हैं कि रूस से तेल आयात कम करें, ताकि मॉस्को को यूक्रेन विवाद पर बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके। ट्रंप ने भारत पर 25% सेकेंडरी टैरिफ लगाए हैं, रूसी क्रूड खरीद के नाम पर, साथ ही 25% रेसिप्रोकल टैरिफ भी। गुरुवार देर रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जवाब दिया, “ये रूस पर दबाव डालने की कोशिश है। लेकिन कोई सम्मानजनक देश या लोग दबाव में कुछ तय नहीं करते।” उन्होंने ये भी कहा कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बैलेंस बिगड़ने से प्राइस बढ़ेंगे, जो अमेरिका जैसे देशों के लिए असहज होगा।
भारत पर आर्थिक असर
भारत को 85% कच्चा तेल आयात से मिलता है, और सस्ते रूसी तेल के खोने से सालाना $4-5 बिलियन की बचत जा सकती है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के मुताबिक, मार्केट प्राइस पर रिप्लेसमेंट सप्लाई से तेल आयात बिल 2% बढ़ सकता है, जो मैक्रोइकॉनॉमिक पैरामीटर्स को प्रभावित करेगा।

















