ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती घोटाले से संबंधित एक बड़ी कार्रवाई में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। यह कदम अपराध शाखा की प्रारंभिक जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें कई राज्यों में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों की संलिप्तता का पता चला था।
सीएमओ के बयान में कहा गया है, “अब तक की जांच से पता चला है कि इस घोटाले की जड़ें आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तक फैली हुई हैं। इसके अलावा, इसमें अंतरराज्यीय संगठित आपराधिक गिरोहों की संलिप्तता का भी संदेह है। इसे ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला किया है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों को कड़ी सजा मिल सके।” सीएमओ ने आगे कहा कि राज्य सरकार भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए एक स्थायी भर्ती आयोग की स्थापना पर विचार कर रही है।
भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए बड़ा कदम
राज्य सरकार द्वारा मामले को सीबीआई को सौंपने के निर्णय को पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। समीक्षकों का मानना है कि इस कदम के जरिए राज्य सरकार भ्रष्टाचार की पूरी व्यवस्था को उजागर करना चाहती है और इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
भर्ती घोटाला 27 सितंबर को सामने आया था, जब ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) द्वारा आयोजित संयुक्त पुलिस सेवा परीक्षा (सीपीएसई)-2024 में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई थीं।
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब 29 सितंबर की रात को पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के ब्रह्मपुर पुलिस ने 114 उम्मीदवारों और तीन एजेंटों को ले जा रही तीन बसों को रोका। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि ये सभी अभ्यर्थी प्रश्नपत्र लीक रैकेट में शामिल थे।इसके बाद की कार्रवाई में अब तक 123 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें उम्मीदवार, दलाल और बिचौलिए शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन आरोपियों ने प्रश्नपत्र और चयन की गारंटी के बदले अभ्यर्थियों से 20 लाख से 25 लाख रुपये तक की रकम वसूली।
जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड शंकर पृष्टि था, जो भुवनेश्वर स्थित निजी आईटी कंपनी पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक है। यह कंपनी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हुई थी। बताया जा रहा है कि पृष्टि ने एजेंटों के एक नेटवर्क के माध्यम से अभ्यर्थियों से संपर्क किया, उनके मूल प्रमाणपत्र और खाली चेक लिए, और भारी राशि लेकर लीक प्रश्नपत्र मुहैया कराए।
मुख्य आरोपी फरार
कई गिरफ्तारियों के बावजूद मुख्य आरोपी शंकर पृष्टि अभी तक फरार है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह घोटाला उजागर होने के तुरंत बाद नेपाल के रास्ते भारत से भाग गया और वर्तमान में दुबई में छिपा हुआ है। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है और उसकी तलाश में कई टीमों को लगाया गया है। क्राइम ब्रांच ने अब तक चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन पृष्टि की अनुपस्थिति के कारण जांच की गति पर असर पड़ा है।
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
इस बीच, ओडिशा हाईकोर्ट ने बुधवार को इस मामले के मुख्य आरोपी शंकर पृष्टि और उसकी पत्नी दीप्तिमयी साहू की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने दीप्तिमयी साहू को निर्देश दिया कि वे संबंधित निचली अदालत में उपस्थित होकर नियमानुसार नियमित जमानत की अर्जी दाखिल करें। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घोटाला सामने आने के दिन से ही यह दंपत्ति फरार है और उनकी खोज जारी है।
भर्ती प्रक्रिया पर असर
इस घोटाले के कारण, ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने 5 और 6 अक्टूबर, 2025 को होने वाली सब-इंस्पेक्टर परीक्षा स्थगित कर दी है। इस मामले से पूरे राज्य में व्यापक आक्रोश फैल गया है। विपक्षी दलों ने ओपीआरबी के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि इतनी बड़ी लीक बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं हो सकती। सरकार ने आश्वासन दिया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीबीआई जांच से बढ़ी उम्मीदें
अब जबकि मामला सीबीआई को सौंपे जाने की संभावना है, उम्मीद है कि जांच एजेंसी अंतरराज्यीय नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और रैकेट की तह तक जाकर पूरी साजिश का पर्दाफाश करेगी। मुख्यमंत्री माझी के इस कदम को न केवल भर्ती व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता भी बहाल होने की उम्मीद है।
















