गुजरात का सूरत शहर कपड़ों के कारोबार के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। एक अनुमान के अनुसार यहां कपड़ों के लगभग 70,000 थोक कारोबारी हैं। यहां वस्त्र से संबंधित हर काम होता है। एक ऐसा ही काम है कपड़ों का प्रसंस्करण, जिसे आम तौर पर ‘प्रोसेसिंग’ करना कहते हैं। सूरत में कपड़ों का प्रसंस्करण करने में सालाना 300 करोड़ का कारोबार करने वाली ‘कन्हैया प्रोसेसिंग प्रा. लि.’ एक बड़ा नाम है।
बता दें कि बुनाई के बाद जो भी कपड़ा आता है, वह केवल सलेटी रंग में होता है। उसे ही कपड़ा कारोबारी खरीदते हैं और उसका प्रसंस्करण कराते हैं। इसके बाद ही कपड़ा अपने वास्तविक रूप में आता है। प्रसंस्करण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कपड़े की गुणवत्ता ठीक की जाती है, उसको मनचाहे रंग में रंगा जाता है। इसके साथ ही उसके गुणों को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न रासायनिक और यांत्रिक उपचार किए जाते हैं। इसके बाद ही किसी कपड़े को मिल में भेजा जाता है।
‘कन्हैया’ की कई सहायक कंपनियां हैं- मुरलीवाला प्रोसेस, आरोग्य प्रोसेस, माधव प्रोसेस और आमंत्रण प्रोसेस। इन सबके संस्थापक हैं संजय जालान। 1990 में झुंझुनू से कुछ हजार रुपए लेकर सूरत पहुंचे संजय ने कपड़े की एक छोटी-सी दुकान खोली। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने सूरत में अपनी नई पहचान बनाई। 10 वर्ष तक दुकान चलाने के बाद उन्होंने कुछ नया करने का मन बनाया और कपड़ों की प्रसंस्करण इकाई लगाई।
संजय कहते हैं, “करीब 10 वर्ष तक अकेले ही कपड़े की दुकान चलाई और दिन भर में सिर्फ 1,500 मीटर कपड़ा बेचता था, लेकिन आज अपने 3,000 कामगारों के सहयोग से प्रतिदिन 25 लाख मीटर कपड़ा प्रोसेस कर रहा हूं।”
संजय जालान बहुत ही गर्व के साथ कहते हैं, “कारोबार मेहनत और ईमानदारी चाहता है। जिस भी कारोबारी में ये दोनों चीजें हैं, उसे एक दिन सफलता जरूर मिलती है। मैंने इन दोनों को कभी नहीं छोड़ा और इस कारण ही आज देश की सेवा कर पा रहा हूं। केवल कोविड काल में थोड़ी परेशानी हुई। इसके बाद कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।”
संजय एक सफल कारोबारी के साथ ही बहुत संवेदनशील इंसान भी हैं। इस कारण वे समाज सेवा भी करते हैं। वे सूरत के कई धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़कर समाज की सेवा भी कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने अपनी जन्मभूमि झुंझुनू के एक अस्पताल में वार्ड भी बनवाया है, जिसका उपयोग वहां आने वाले मरीज करते हैं।

















