अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे चीन को नुकसान पहुंचाने के मूड में नहीं हैं, लेकिन अगर बीजिंग कुछ रियायतें दे तो चीनी सामानों पर लगे टैरिफ कम करने को तैयार हैं। इन रियायतों में अमेरिकी सोयाबीन की ज्यादा खरीदारी और दुर्लभ मिट्टी के खनिजों पर प्रतिबंध हटाना शामिल है। ये बातें ट्रंप ने सोमवार को एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से कही। ये बयान ऐसे समय में आए जब अमेरिका ने चीनी आयात पर अतिरिक्त 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो व्यापार तनाव को और बढ़ा रहा है।
ट्रंप के टैरिफ और रियायतों पर बयान
ट्रंप ने साफ कहा कि चीन अमेरिका को टैरिफ के जरिए भारी रकम चुका रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “वे हमें बहुत सारा पैसा टैरिफ में दे रहे हैं, जबरदस्त रकम। वे शायद इसे कम करना चाहेंगे। हम इस पर काम करेंगे, लेकिन उन्हें भी हमें कुछ चीजें देनी होंगी।” ट्रंप ने बताया कि चीन ने उनके पहले कार्यकाल में भी अच्छा-खासा पैसा दिया था, लेकिन अब ये रकम “अविश्वसनीय” स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने जोड़ा, “वे शायद इतना ज्यादा नहीं चुका सकते। और मुझे इससे कोई परेशानी नहीं। हम इसे कम कर सकते हैं, लेकिन बदले में उन्हें हमारे लिए कुछ करना होगा। ये अब एकतरफा सड़क नहीं रही।”
ट्रंप का कहना है कि टैरिफ कम करने का फैसला चीन की मांग पर निर्भर करेगा। उन्होंने बाड़ और अन्य सामानों पर 20 फीसदी टैरिफ का जिक्र किया, जो कुल मिलाकर 157 फीसदी तक पहुंच सकता है। ट्रंप चीन के पाले में गेंद फेंकते हुए कहते हैं, “मैं चीन की मदद करना चाहता हूं। उन्हें नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं है। लेकिन बदले में उन्हें हमें चीजें देनी होंगी।”
कम टैरिफ के बदले ट्रंप की उम्मीदें
ट्रंप ने साफ-साफ बता दिया कि कम टैरिफ के एवज में वे क्या चाहते हैं। इसमें अमेरिकी सोयाबीन की खरीदारी बढ़ाना और फेंटेनिल जैसे ड्रग्स पर रोक लगाना शामिल है। उन्होंने कहा, “बहुत सामान्य चीजें। मैं नहीं चाहता कि वे रेयर अर्थ मिनरल्स के खेल में उलझें।” ट्रंप ने अमेरिकी सोयाबीन किसानों का जिक्र किया, जिन्हें चीन ने बातचीत के दबाव में बहिष्कृत किया था। वे बोले, “हमारे किसान महान हैं, खासकर सोयाबीन वाले। मैं चाहता हूं कि वे कम से कम पहले जितनी मात्रा में सोयाबीन खरीदना शुरू करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो डील नहीं बनेगी। मुझे लगता है कि वे ये कर पाएंगे।”
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क्या है पूरा मामला
ट्रंप के ये बयान अमेरिका की तरफ से चीनी आयात पर अतिरिक्त 100 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बाद आए हैं। ये कदम चीन के दुर्लभ मिट्टी के निर्यात पर लगाए प्रतिबंधों का जवाब है। इससे कुल टैरिफ 130 फीसदी हो गया। ये बढ़ोतरी व्यापार युद्ध को और तेज कर रही है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही है।
क्या कहते हैं ट्रंप
ट्रंप के बयानों के बीच अमेरिका और चीन “जितनी जल्दी हो सके” नई व्यापार वार्ता शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसका मकसद और टैरिफ से बचना है। ये घोषणा बीजिंग के मुख्य वार्ताकार उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के बीच वीडियो कॉल के बाद हुई। चीनी सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, ये बातचीत “ईमानदार, गहन और रचनात्मक” रही। टेंशन तब बढ़ी जब ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “चीन के इस अभूतपूर्व रुख को देखते हुए, अमेरिका 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा, जो पहले से चल रहे टैरिफ के अलावा होगा।”
इसके जवाब में बीजिंग ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका आगे बढ़ा तो जवाबी कार्रवाई होगी। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शिन्हुआ को बताया, “उच्च टैरिफ की धमकियां चीन के साथ सही रिश्ता बनाने का तरीका नहीं हैं।” हालांकि, ट्रंप के पहले के बयान के बावजूद, जहां उन्होंने कहा था कि वे इस महीने के एपीईसी शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग से नहीं मिलेंगे, लेकिन ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट ने कहा कि कोरिया में दोनों नेताओं की मुलाकात अभी भी संभव है। “वह पार्टी चेयर शी से मिलेंगे – मुझे लगता है कि ये मीटिंग हो जाएगी।”

















