दुनियाभर में टैरिफ लगाकर अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड को चीन से झटका लगा तो अब वे नए पार्टनर तलाशने लगे। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और डोनाल्ड ट्रंप ने रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई को लेकर चीन को काउंटर करने के लिए एक डील साइन की है। ये $8.5 बिलियन का डील है। इस समझौते को लेकर ट्रंप ने कहा कि ये कई महीनों से चल रही बातचीत का नतीजा है। ये समझौता चीन की हरकतों के खिलाफ एक बड़ा कदम है, जहां वो रेयर अर्थ मटेरियल्स के एक्सपोर्ट पर सख्त कंट्रोल लगा रहा है।
डील से क्या फायदा?
दोनों नेताओं के बीच मीटिंग के दौरान ट्रंप ने बड़े जोश में कहा, “एक साल बाद हम इतने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ इकट्ठा कर लेंगे कि आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप उसका क्या करें। ये $2 बिलियन के बराबर होंगे!” अल्बनीज ने भी खुशी जताई, “ये समझौता हमारे रिश्ते को नेक्स्ट लेवल पर ले जाता है।” व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हासेट ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की माइनिंग इकोनॉमी दुनिया की बेस्ट है। वहां रिफाइनर्स शानदार हैं और रेयर अर्थ रिसोर्सेज की भरमार है। अल्बनीज के साथ उनके रिसोर्सेस, इंडस्ट्री और साइंस मिनिस्टर्स भी आए थे। ऑस्ट्रेलिया के पास अमेरिका को चाहिए वाले दर्जनों क्रिटिकल मिनरल्स हैं, जो जेट इंजन्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, लैपटॉप्स और फोन्स में यूज होते हैं।
चीन की चालबाजी क्यों चिंता की बात?
इस महीने ही बीजिंग ने ऐलान किया कि विदेशी कंपनियों को चाइनीज टेक्नोलॉजी वाले मैग्नेट्स एक्सपोर्ट करने के लिए सरकारी मंजूरी लेनी पड़ेगी, भले ही उनमें रेयर अर्थ का थोड़ा सा भी ट्रेस हो। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि इससे चीन को ग्लोबल इकोनॉमी पर कंट्रोल मिल जाता है, खासकर टेक सप्लाई चेन पर। हासेट ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया हमें वैश्विक इकोनॉमी को कम रिस्की बनाने में मदद करेगा। चीन की ये रेयर अर्थ ब्लैकमेल जैसी हरकतें बंद होनी चाहिए।”
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ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने भी कहा, “चीन कमांड-एंड-कंट्रोल इकोनॉमी है। हम और हमारे दोस्त न कमांड होंगे, न कंट्रोल। बीजिंग के बाबू ग्लोबल सप्लाई चेन नहीं चला सकते।” ये टैक्टिक्स चीन को काउंटर करने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जहां वो अपनी डोमिनेंस को हथियार बना रहा है।
AUKUS सबमरीन पैक्ट पर भी चर्चा?
मीटिंग में AUKUS पर भी बात हुई, जो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके के बीच सिक्योरिटी पैक्ट है। ये जो बाइडेन के समय साइन हुआ था। ट्रंप ने कहा, “ये पैक्ट थोड़ा पुराना है, लेकिन अब ये तेजी से आगे बढ़ रहा है।” अल्बनीज ने जोर दिया, “AUKUS हमारी डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनरशिप के लिए बेहद जरूरी है।” नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन ने बताया कि अमेरिका ओरिजिनल फ्रेमवर्क को बेहतर बनाना चाहता है, ताकि दोनों देशों को फायदा हो। उन्होंने कहा, “इसमें कुछ अम्बिग्युइटी क्लियर करनी है। ये सबके लिए विन-विन होगा।”
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने ट्रेड वार के बीच चीन पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ ठोंक दिया था। इसके बाद चीनी उत्पादों पर टैरिफ बढ़कर 130 प्रतिशत हो गया था। पलटवार में चीन ने अमेरिका को सप्लाई होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स पर लगाम कस दिया था। इसके बाद तो ट्रंप धमकियां देने पर उतर आए थे।

















