जाेहो (Zoho) एक प्रमुख भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो अपनी उत्पादशीलता और व्यावसायिकता बढ़ाने वाले टूल्स के लिए दुनिया में पहचान रखती है। इसके दो उत्पाद-जोहो मैसेंजर अरत्तई (Arattai)-व्हाट्सएप, जीमेल, टेलीग्राम जैसी वैश्विक कंपनियों को टक्कर दे रहे हैं। खास बात है कि जोहो मेल 73 भाषाओं के विकल्प हैं। इसमें संस्कृत के अलावा भारत की कई क्षेत्रीय भाषाएं जैसे-मैथिली और मराठी भी शामिल हैं। उपयोगकर्ता मेल की सेटिंग में जाकर भाषा बदल सकते हैं।
जोहो मेल को भारत सरकार ने लगभग 12 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की ईमेल सेवा के लिए अनिवार्य कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कई केंद्रीय विभाग अपने ईमेल सिस्टम को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) से हटाकर जोहो मेल के स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर चुके हैं। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत डिजिटल सुरक्षा, डेटा निजता और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
श्रीधर वेम्बू जोहो के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। उन्होंने 1996 में जोहो की स्थापना की, जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम व्यवसायों को क्लाउड-आधारित प्रोडक्टिविटी साधन प्रदान करना था। जोहो श्रीधर वेम्बू का कहना है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल डेटा प्राइवेसी पर आधारित है और यूजर का डेटा मार्केटिंग के लिए उपयोग नहीं किया जाता। जोहो मेल पूरी तरह से सुरक्षित और भरोसेमंद है। इसे भारतीय सरकारी संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन किया गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई हस्तियां जोहो मेल का निजी तौर पर प्रयोग कर रही है।

जोहो मेल में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, स्पैम फिल्टर, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे सुरक्षा फीचर्स के साथ विज्ञापन-मुक्त इनबॉक्स, बड़े अटैचमेंट भेजने की सुविधा, टीम के लिए स्ट्रीम्स, कैलेंडर और नोट्स जैसे उपकरण इसे सरकारी और कॉर्पोरेट उपयोग के लिए आदर्श बनाते हैं। यह जीमेल से कई मायनों में बेहतर विकल्प प्रदान करता है। टीम वर्क को सरल बनाने के लिए इसमें सोशल मीडिया जैसे फीचर्स हैं, जहां यूजर पोस्ट बना सकते हैं, टास्क असाइन कर सकते हैं और टीम से संवाद कर सकते हैं। साथ ही, यह कंपनियों को कानूनी एवं डेटा प्रबंधन जरूरतों के लिए मदद करता है और डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ईमेल की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इसमें भेजे गए ईमेल को कुछ समय के भीतर वापस लेने की भी सुविधा है।
जोहो का मैसेंजर एप ‘अरत्तई’ कम इंटरनेट स्पीड और लो-बैंडविड्थ क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है। यह विशेष रूप से ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों के लिए उपयुक्त है। अरत्तई तमिल शब्द ‘कैजुअल चैट’ से लिया गया है, जो व्हाट्सएप को कड़ी टक्कर दे रहा है। अरत्तई में नवंबर 2025 से टेक्स्ट मैसेजिंग पर भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सुरक्षा सुविधा उपलब्ध होगी, जो यूजर्स की निजता को सुनिश्चित करेगी। एंड्रॉइड टीवी सपोर्ट फीचर यूजर्स को बड़ी स्क्रीन पर मैसेजिंग और कॉलिंग का अनुभव देता है, जो व्हाट्सएप में अभी तक नहीं है।
जोहो का ‘Ulaa’ ब्राउज़र क्रोम को टक्कर दे रहा है। हाल ही में ऐप स्टोर रैंकिंग में गूगल क्रोम को पीछे छोड़ दिया है। इस भारतीय ब्राउजर को ‘प्राइवेसी-फर्स्ट’ बताया गया है, जो इसे एक सुरक्षित विकल्प बनाता है। यह बिल्ट-इन एड ब्लॉकर व सभी डिवाइसों पर सिंक होने जैसी सुविधाएं देता है। जोहो मेल, अरत्तई और Ulaa सेवाएं आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा हैं।















