कौशल और रोजगार
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों ने करोड़ों युवाओं को प्रशिक्षित किया है। स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से उद्योग आधारित कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं। आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का आधुनिकीकरण हुआ है। अटल टिंकरिंग लैब्स और विकसित भारत बिल्डाथॉन जैसे प्रयासों ने स्कूल स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहन दिया है। जब विश्व के कई देशों में बेरोजगारी बढ़ रही है तब भारत का युवा जनसंख्या आधारित कौशल पूल उत्पादन और सेवा क्षेत्र दोनों को स्थायित्व दे रहा है।
निर्माण और औद्योगिक आत्मनिर्भरता
भारत ने रक्षा उत्पादन में 2024 -25 तक एक लाख पचास हजार करोड़ रु. का आंकड़ा पार किया और निर्यात 23622 करोड़ रुपये तक पहुंचा। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारे जैसे प्रकल्प स्थानीय निर्माण को बल दे रहे हैं। मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाओं से मोबाइल फोन इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन निर्माण में वैश्विक निवेश आया है। एप्पल-सैमसंग और फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों ने उत्पादन इकाइयां बढ़ाई हैं। नौसेना का स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत और वंदे भारत ट्रेनें आत्मनिर्भर औद्योगिक क्षमताओं की प्रतीक बन चुकी हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि उत्पादक की भूमिका निभा रहा है।

स्टार्टअप और नवाचार
भारत में डीपीआईआईटी पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है और 17 लाख से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। फिनटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक और डीपटेक जैसे क्षेत्रों में नवाचार से भारत एशिया का अग्रणी ‘स्टार्टअप हब’ बन गया है। ओएनडीसी और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे मंचों ने इंटरऑपरेबिलिटी की अवधारणा को व्यावहारिक बनाया है। कई भारतीय स्टार्टअप वैश्विक बाजार में निर्यात योग्य उत्पाद दे रहे हैं। सीमित पूंजी के बावजूद नवाचार और नीति समर्थन से भारत अब पूंजी और विचार दोनों का स्रोत बन रहा है।
हरित ऊर्जा और हाइड्रोजन
भारत की कुल ऊर्जा क्षमता 2025 में 476 गीगावॉट पहुंची जिसमें 235 गीगावॉट नवीकरणीय है। सौर ऊर्जा में 127 गीगावॉट और पवन में 45 गीगावॉट की स्थापना हुई है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत चार लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता स्वीकृत की गई है। इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों ने गीगावॉट स्तर की इकाइयां स्थापित की हैं। सेकी और पीएलआई योजनाओं से सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता दोगुनी हुई है। ऊर्जा संकट और तेल निर्भरता के युग में भारत स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है।
डिजिटल शासन और नीति आधारित प्रगति
भारत का डिजिटल सार्वजनिक ढांचा विश्व का सबसे बड़ा खुला प्लेटफॉर्म है। यूपीआई को सिंगापुर-यूएई सहित कई देशों ने अपनाया है। अकाउंट एग्रीगेटर और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने डेटा सुरक्षा और सेवा समन्वय के नए मानक तय किए हैं। मेक इन इंडिया उत्पादन से लेकर डिजिटलीकरण तक नीति आधारित दृष्टिकोण ने प्रशासन को पारदर्शी बनाया है। ओपन एपीआई और नीति समर्थन ने भारत को प्रोडक्ट आधारित शासन मॉडल की दिशा दी है। आज नीतिगत स्थिरता और तकनीकी विश्वसनीयता भारत को बदलते विश्व समीकरणों में नेतृत्व की स्थिति दे रही है।
गतिशीलता और अवसंरचना
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने सड़क, रेल और बंदरगाहों के एकीकरण को सक्षम किया है। वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों से तेज और स्वदेशी रेल सेवा का विस्तार हुआ है। यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म ने परिवहन डेटा को एक मंच पर जोड़ा है। फास्टैग और डिजीयात्रा ने यात्रा को डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। इन्वेस्टमेंट और निर्माण की गति बढ़ाने से भारत की अवसंरचना 2030 तक पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए तैयार मानी जा रही है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधाओं के बीच भारत ने अपने परिवहन तंत्र को विश्वसनीय बनाया है।

















