छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। लगातार आत्मसमर्पण कर रहे नक्सलियों से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है, वहीं सरकार की “विश्वास और विकास” की नीति रंग लाती दिख रही है। पिछले दो दिनों में छत्तीसगढ़ में 258 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो यह साबित करता है कि अब बंदूक की नहीं, विश्वास की ताकत जीत रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण अभियान है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 22 महीनों में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि अब नक्सली यह समझ चुके हैं कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता। विकास, शिक्षा और रोजगार ही भविष्य का रास्ता है।
महाराष्ट्र में भी बड़ा आत्मसमर्पण- छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी नक्सल आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के बड़े नेता भूपति समेत 61 नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। उन्होंने कहा कि अब वे संविधान की राह पर चलेंगे और समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे। गढ़चिरौली के इस आत्मसमर्पण ने यह संदेश दिया है कि नक्सल आंदोलन अब अपने अंत के करीब है। जिन इलाकों में कभी सुरक्षा बलों को जाने में भी डर लगता था, अब वहां के लोग शांति और विकास की बात कर रहे हैं।

बस्तर में ऐतिहासिक सरेंडर- छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हाल ही में 210 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। उन्होंने 153 घातक हथियार जमीन पर रखे और हाथ में संविधान की प्रति और गुलाब का फूल लेकर हिंसा छोड़ने की शपथ ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे देश का सबसे बड़ा नक्सल आत्मसमर्पण बताया। उन्होंने कहा, “यह इस बात का प्रमाण है कि अब नक्सली विश्वास कर रहे हैं कि सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन दे सकती है। अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर को हम नक्सली हिंसा से मुक्त घोषित कर चुके हैं।”
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— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) October 17, 2025
मार्च 2026 तक नक्सलवाद का अंत- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। शाह ने बताया कि जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद से अब तक 2100 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, 1785 गिरफ्तार किए गए हैं, और 477 मारे गए हैं। उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि एक समय नक्सल आतंक का गढ़ रहे अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर को आज हिंसा से मुक्त घोषित किया गया है। अब केवल दक्षिण बस्तर में कुछ नक्सली बचे हैं, जिन्हें जल्द समाप्त कर दिया जाएगा।”

















