देहरादून में परिवार रजिस्टरों में हेराफेरी का खुलासा, मुस्लिम आबादी के बढ़ते प्रभाव की जांच शुरू
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देहरादून में परिवार रजिस्टरों में हेराफेरी का खुलासा, मुस्लिम आबादी के बढ़ते प्रभाव की जांच शुरू

देहरादून जिले में परिवार रजिस्टरों एक षडयंत्र के तहत हेर फेर करके मुस्लिम आबादी का विस्तार किया गया है?

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Oct 16, 2025, 04:19 pm IST
in उत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून जिले में परिवार रजिस्टरों एक षडयंत्र के तहत हेर फेर करके मुस्लिम आबादी का विस्तार किया गया है? ये मामला प्रारंभिक जांच में सामने आ गया है और शासन प्रशासन ने अब इसके पीछे किस किस की भूमिका है इस पर और गहनता से जांच पड़ताल कराई जा रही है। खबर है कि इस मामले के उजागर होते ही उक्त परिवार रजिस्टरों पर प्रशासन ने पहरा बैठा दिया है। जिन अधिकारियों और जनप्रतिधिनियों की इसमें मिलीभगत है वो बैचेनी में इधर उधर दौड़ लगा रहे है कि किसी भी तरह ये मामला दब जाए। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल सभी परिवार रजिस्टरों पर उप जिलाधिकारियों का पहरा बिठा दिया गया है।

डेमोग्राफी चेंज

देहरादून जिले का क्षेत्र जिसे पछुवा दून इलाके में डेमोग्राफी चेंज की समस्या उत्तराखंड सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।, यूपी बिहार और अन्य राज्यों से आई मुस्लिम आबादी ने यहां की बेशकीमती सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बसावट कर ली है, सरकार की विशेष रूप से ग्राम सभा की जमीनों पर मुस्लिम आबादी को बसाने में स्थानीय मुस्लिम ग्राम प्रधानों,प्रधान पतियों की संदेहजनक भूमिका सामने आई है साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे है।

अन्य राज्यों से आई मुस्लिम आबादी ने पछवा दून की नदियों व नहरों के किनारे तथा वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से कच्चे व पक्के मकान बना लिए हैं और अब उनके नाम आधार कार्ड व मतदाता सूचियों में दर्ज कर लिए गए हैं तथा उन्हें संरक्षण देने के बदले में वोट बैंक की राजनीति के साथ-साथ करोड़ों रुपए का खेल खेला गया है। राज्य बनने के समय देहरादून जिले पछुवा क्षेत्र के 28 गांव जो कभी हिंदू बाहुल्य हुआ करते थे वो अब मुस्लिम बाहुल्य हो गए है। आबादी की घुसपैठ का ये खेल कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुआ जो अब भी जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में बराबर चल रहा है। इन ग्रामों में मुस्लिम प्रधानों की हुकूमत चल रही है जो कभी भी मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी थे ही नहीं। यूपी,बिहार, असम,बंगाल,यहां तक की बंग्लादेशी, म्यामार के रोहिग्या मुस्लिम आबादी यहां पछुवा दून में आकर कैसे बसती चली गई?

खबर है कि खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट के बाद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई है। देहरादून जिले में प्रेम नगर से हिमांचल पोंटा साहिब तक तक जाने वाली शिमला बाई पास, चकराता रोड के आसपास के इलाको में देवभूमि उत्तराखंड का सांस्कृतिक, सामाजिक,आर्थिक, धार्मिक स्वरूप बिगड़ चुका है। मुख्य सड़कों पर फड़ खोकों का कब्ज़ा है और उनके पीछे अवैध बस्तियाँ बस रही हैं। इसके अलावा, सरकारी ज़मीन पर सौ से ज़्यादा मस्जिदों और मदरसों की ऊँची मीनारें दिखाई देती हैं।

वोट बैंक, आर्थिक ताकत और राजनीतिक संरक्षण ने बदली इलाके की तस्वीर

आखिर ऐसा कैसे हुआ कि पिछले कुछ सालो में ये इलाका एक दम बदल गया और यहां हिंदू अल्पसंख्यक होते चले गया और मुस्लिम आबादी ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। शुरुआत में कुछ मुसलमान हिंदू बहुल गाँवों में बस गए। धीरे-धीरे, वे अपने रिश्तेदारों को भी अपने साथ लाने लगे। फिर, अपनी आर्थिक ताकत और वोट बैंक का इस्तेमाल करके, वे ग्राम प्रधान बन गए और अपने लोगों को ग्राम सभा की सरकारी ज़मीन पर बसाकर अपना वोट बैंक और मज़बूत कर लिया। मिसाल के तौर पर, अगर किसी लड़की की शादी दूसरे राज्य में होती थी, तो उसका नाम यहाँ नहीं काटा जाता था, और उसके पति और बच्चों के नाम भी यहां परिवार रजिस्टर में दर्ज कर दिए जाते थे। हालात ये हो गए कि यहां दर्जनों मस्जिदें बना दी गईं और मदरसे खोल दिए गए, सरकारी जमीन हड़पने की साजिश रची गई जो आज भी जारी है।

अवैध कब्जे करने का खेल सरकार की सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग की जमीनों पर भी धन बल और वोट बैंक की राजनीति के दमखम पर आज भी चल रहा है और इसमें सत्ता पक्ष विपक्ष के नेताओ का संरक्षण भी मिलता रहा है। राजनीतिक संरक्षण के पीछे मुख्य कारण यहां की नदियों में चल रहा वैध और अवैध खनन है, जहां हजारों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया है और यहां के राजनीतिक नेताओं को वित्तीय शक्ति प्रदान कर रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार या शासन ग्राम सभाओं की जमीनो की जिस दिन गंभीरता से जांच करवा लेगी तो उसे मालूम चल जाएगा कि उसकी ग्राम सभाओं की जमीन आखिर कहां चली गई? कहां बिक बिका का ठिकाने लगा दी गई? इन 28 गांवों के परिवार रजिस्टरों में कैसे बाहरी लोगों के नाम चढ़ते चले गए ? इस पर सवाल उठने लाजमी है। खबर है कि ये मामला प्रकाश में आते ही यहां अवैध रूप से बसे हुए लोगों में हड़कम है। ढकरानी में शक्ति नहर किनारे अवैध कब्जे हुए, धामी सरकार ने दो चरणों में ये अतिक्रमण भी ध्वस्त किए और इसमें कई धार्मिक स्थल भी हटाएं। उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने अपनी ज़मीन की सुरक्षा कंटीले तारों से नहीं की। अब जब उत्तराखंड सरकार यहाँ सौर ऊर्जा परियोजना लगाने की योजना बना रही है, तो देहरादून ज़िला प्रशासन के बुलडोज़र गरज उठे। 700 से ज़्यादा घर ढहा दिए गए। फिर भी, यहाँ रहने वाली आबादी ने उत्तराखंड नहीं छोड़ा है। उन्होंने मुस्लिम नेताओं के संरक्षण में आस-पास की जमीन पर फिर से अवैध कब्ज़ा कर लिया है, इस बार लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की ज़मीन पर बस गए हैं।

इसी प्रकार, सहसपुर, जीवन गढ़, तिमली, हसनपुर कल्याणपुर, केदाखला और सरबा जैसे गांवों में भी ऐसी ही स्थिति है, जहां ग्राम प्रधानों ने ग्राम परिषदों की सरकारी जमीन पर मुस्लिम प्रवासियों को बसा दिया है। सूत्रों से पता चला है कि अतिक्रमणकारियों ने राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र हासिल कर लिए हैं। जिसमें ग्राम प्रधान की मोहर की भूमिका ,संरक्षण देने वाली रही है।

प्रधानों के फर्जी दस्तावेज

ऐसी भी चर्चा है कि ढकरानी और सहसपुर के ग्राम प्रधानों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपना कार्यकाल पूरा कर लिया और उनके मामले अदालत में लंबित हैं। इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उनकी सुरक्षा किसने की।

सीएम पुष्कर सिंह धामी का बयान

परिवार रजिस्टर में मसले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार के संज्ञान में ये गंभीर मामला सामने आया है इसकी गहनता से जांच पड़ताल कराई जा रही है, हम यहां किसी भी सूरत में डेमोग्राफी चेंज नहीं होने देंगे। अतिक्रमण को हर हाल में खाली करवाया जाएगा।

Topics: Uttarakhand NewsCM Pushkar Singh DhamiUttarakhand Latest NewsUttarakhand encroachmentDehradun Muslim populationDemographic Change UttarakhandDehradun Family Register
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