हरियाणा पुलिस में इन दिनों खासी हलचल मची हुई है। आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस घटना के आठवें दिन, यानी मंगलवार को, सरकार ने बड़ा कदम उठाया। डीजीपी शत्रुजीत कपूर को अचानक छुट्टी पर भेज दिया गया, और उनकी जगह आईपीएस ओमप्रकाश सिंह (OP Singh) को कार्यवाहक डीजीपी बना दिया गया। ये फैसला सोमवार रात को लिया गया, जबकि सुबह ही ओपी सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई।
पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार, उनके विधायक साले अमित रतन कोटफत्ता, एससी समाज के लोग इस मामले में लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ये लोग डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजराणिया को न सिर्फ हटाने, बल्कि गिरफ्तार और निलंबित करने की मांग कर रहे थे। सरकार ने पहले ही बिजराणिया का तबादला कर दिया था, लेकिन अब डीजीपी को भी छुट्टी पर भेज दिया है। उधर मृतक आईपीएस की पत्नी ने इस मामले में डीजीपी को गिरफ्तार करने की मांग की थी। हालांकि, आरोप है कि आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
सात दिन बाद भी पोस्टमार्टम का इंतजार
इस मामले लेकिन सबसे बड़ी परेशानी तो ये है कि पूरन कुमार का शव अभी तक पोस्टमार्टम के लिए लटका हुआ है। घटना को सात दिन हो चुके हैं, लेकिन परिवार तैयार नहीं हो रहा। सोमवार शाम को पुलिस ने दूसरा नोटिस भेजा। रविवार को भी अमनीत को चेतावनी दी गई थी कि देर होने पर सबूत नष्ट हो सकते हैं। परिवार ने पहले पत्र पर ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस इतना बोला कि थोड़ा वक्त और चाहिए। पुलिस वाले परेशान हैं, क्योंकि बिना पोस्टमार्टम के जांच कैसे आगे बढ़ेगी।

















