दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने रेलवे टेंडर घोटाला मामले के आरोपितों लालू यादव, रबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया है। सोमवार को लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट के पूछे जाने पर तीनों ने कहा कि वे निर्दोष हैं और ट्रायल का सामना करेंगे। उसके बाद कोर्ट ने तीनों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। वहीं, इस बीच भाजपा ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया।
इसमें लिखा कि लालू यादव ने सुबह वॉक का आनंद लिया और कोर्ट व्हीलचेयर से पहुंचे। कोर्ट ने कहा कि ड्रामा नहीं, अब ट्रायल होगा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसकी फोटो भी वायरल हुईं।
लालू यादव की व्हील-चेयर पर दया बटोरने की कोशिश हुई नाकाम!
कोर्ट ने कहा — ड्रामा नहीं, अब ट्रायल होगा! ⚖️ pic.twitter.com/X4ekE5gYsX
— BJP (@BJP4India) October 13, 2025
भाजपा का राजद पर तंज, कहा- धारा 420 के आरोपों के साथ तेजस्वी बदलेंगे बिहार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर तंज कंसा है। भाजपा ने कहा कि लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। तेजस्वी धारा 420 का आरोप लेकर बिहार बदलने चले हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि आज कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी, तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
ये आरोप बहुत गंभीर हैं।
ये आरोप हैं
सरकारी संपत्ति के आवंटन में भ्रष्टाचार, साजिश रचने, सरकार की निर्णय प्रक्रिया में गड़बड़ करना और आईपीसी 420 की भी धाराएं हैं। तेजस्वी यादव बिहार बदलने 420 का आरोप अपने खिलाफ तय कराकर निकले हैं।
420 का मतलब है धोखाधड़ी, जिसकी सजा है 7 साल।
120बी है आपराधिक षड्यंत्र।
उन्होंने कहा कि लालू यादव के पूरे शासन को अगर हम चार वाक्यों में कहें तो –
चारा खाना,
अलकतरा पीना
और सरकारी संपत्ति बांटने के टेंडर में हेराफेरी करना
और चौथा है जमीन दो, नौकरी लो।
इस मॉडल की एक विशेष बात है कि सारा लाभ परिवार को ही जाना चाहिए, बाहर किसी को नहीं। जमीन दो, नौकरी लो के मामले में ग्रुप डी के लोगों से जमीन ली गई, यानी गरीब लोगों का हक मारा गया और उनसे नौकरी के बदले जमीन ली गई। उन्होंने कहा कि
2005 में पटना में 1 कमर्शियल प्लाट और 1 रेजिडेंशियल प्लाट गोपालगंज में था।
2020 के चुनाव के एफिडेविट के अनुसार 1993 से 2007 के बीच तेजस्वी यादव के पास कृषि योग्य 9 भूमि थी, जिनमें से 3 पटना में और 6 गोपालगंज में थी।
2 गैर कृषि भूमि थी, जो पटना में थी।
ये प्लाट कहां से आए?
रविशंकर ने कहा कि इससे बड़ा धोखा और क्या हो सकता है कि सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति, चाहे वह रेल मंत्री हो या मुख्यमंत्री, अपने पद का दुरुपयोग करके सार्वजनिक संपत्ति लूटकर अपनी जेबें भरता है और बाद में खुद को सामाजिक न्याय का झंडाबरदार बताता है।
जनता के साथ इससे बड़ा धोखा और क्या हो सकता है?
(इनपुट हिंदुस्थान समाचार)
















