आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव एक और घोटाले में आरोपी मान लिए गए हैं। अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। ये घोटाला है लैंड फॉर जॉब (नौकरी के बदले जमीन) से जुड़ा है। मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी रबड़ी देवी,बेटे तेजस्वी, तेज प्रताप, मीसा भारती समेत कुल 46 लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
मामला क्या है?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का बताया जा रहा है। उस दौरान लालू प्रसाद यादव भारत के रेल मंत्री थे। लैंड फॉर जॉब मामले की जांच कर रही सीबीआई का आरोप है कि उस दौरान रेलवे में ग्रुप डी के कई पोस्ट (जैसे ट्रैकमैन, हेल्पर आदि) पर लोगों को नौकरी दिलाई गई। लेकिन ये नौकरियां बिना नियमों के, सिर्फ इसलिए दी गईं क्योंकि कुछ लोगों ने लालू के परिवार या उनके करीबियों के नाम पर जमीनें दीं या ट्रांसफर कीं। यानि कि जमीन के बदले नौकरी दी गई। खास तौर पर वेस्ट सेंट्रल रेलवे जोन (जबलपुर, मध्य प्रदेश) में ऐसे मामले सामने आए हैं। सीबीआई कहती है कि रेल मंत्रालय की तरफ से दबाव डालकर ये नियुक्तियां कराई गईं। जमीनें अक्सर बेनामी तरीके से या बाजार से कम दाम पर ली गईं, और कैश में ट्रांजेक्शन हुए। सीबीआई ने इसे भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साजिश का मामला बताया है।
सीबीआई की चार्जशीट में दम
कोर्ट ने सीबीआई के चार्जशीट को देखते हुए पाया कि लालू प्रसाद और उनके परिवार पर प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) केस बनता है। जज ने कहा कि लालू ने रेल मंत्रालय को अपनी पर्सनल संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया और नौकरियों को जमीन लेने का साधन बनाया। परिवार के सदस्यों और करीबियों के साथ मिलकर एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया गया। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट में बताया कि कुल 103 आरोपियों में से 5 की मौत हो चुकी है।
लालू के पूरे परिवार समेत 46 लोगों पर आरोप तय
बाकी में से करीब 46 लोगों पर चार्ज फ्रेम किए गए हैं, जिनमें लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी (पूर्व बिहार सीएम), बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव शामिल हैं। करीब 52 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया, जिनमें ज्यादातर रेलवे के अधिकारी थे।लगे चार्ज क्या हैं?लालू प्रसाद पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराएं (13(1)(d), 13(2)) लगाई गई हैं, साथ ही धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) आईपीसी की।
परिवार के अन्य सदस्यों पर मुख्य रूप से धोखाधड़ी और साजिश की धाराएं लगी हैं। कोर्ट ने आरोपियों की डिस्चार्ज की याचिकाएं खारिज कर दीं। उन्होंने कहा कि अभी इस स्टेज पर डिस्चार्ज का कोई आधार नहीं है।
क्या कहते हैं आरोपी
लालू और उनके परिवार ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि ये सारा केस राजनीतिक बदले की भावना से चलाया जा रहा है। कोई गलत काम नहीं हुआ और नौकरियां या जमीन के ट्रांसफर में कोई गड़बड़ी नहीं थी। फिलहाल कोर्ट ने फॉर्मल चार्ज फ्रेम करने की तारीख 29 जनवरी तय की है। उस दिन आरोपियों से ये पूछा जाएगा कि वे आरोप मानते हैं या नहीं।

















