बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी चरम पर है। एनडीए ने अपने घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया है। आज महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों पर समझौता होना था। बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे थे। राष्ट्रीय जनता दल ने पूरे बिहार में तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पोस्टर लगाए थे। ऐसे में दिल्ली के एक कोर्ट ने रेलवे टेंडर घोटाला को लेकर तेजस्वी को अभियुक्त बनाया है। इस कारण जब तक तेजस्वी कोर्ट से बरी नहीं हो जाते, तब तक वह अपने पिता की तरह न तो चुनाव लड़ सकते हैं और न ही कोई सरकारी पद पा सकते हैं।
यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी में दो आईआरसीटीसी होटलों के निविदा आवंटन में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। उस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि होटल आवंटन के बदले परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन के सौदे किए गए। सीबीआई के अनुसार, इन होटलों को लीज पर देने की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की गई और निविदा विनय कोचर की कंपनी मेसर्स सुजाता होटल्स को दिए गए। बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर मनचाहे तरीके से पूरा किया गया और इसमें उस समय आइआरसीटीसी के एमके पीके गोयल की भूमिका रही।
17 जुलाई 2017 को सीबीआई ने लालू यादव समेत पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और विजय व विनय कोचर समेत कई आरोपियों के 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई ने आरोप लगाया कि लालू यादव के परिवार को कोचर बंधुओं के लिए होटल पट्टे हासिल करने के बदले पटना में तीन एकड़ जमीन मिली थी। यह जमीन शुरू में सरला गुप्ता की कंपनी को दी गई थी, जिसे बाद में लालू की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव की कंपनी ने अधिग्रहित कर लिया। इस जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बनाया जा रहा था।
मामले की सुनवाई को लेकर आज लालू यादव व्हीलचेयर पर राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत पहुंचे थे। यहां उनके खिलाफ आइआरसीटीसी होटल घोटाला और नौकरी के बदले जमीन घोटाला में आरोप तय किए गए। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी मौजूद थे।

















