बांग्लादेश में जुलाई 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बीएनपी की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनी और मुहम्मद यूनुस इसके मुख्य सलाहकार बने। लेकिन अब खबर आ रही है कि दशकों से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के डी फैक्टो चीफ तारिक रहमान ने हाल ही में कहा है कि वे जल्द ही देश लौटकर फरवरी 2026 के चुनाव लड़ेंगे। 58 साल के तारिक पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं, और बीएनपी को जीत दिलाने की उम्मीदें उन पर टिकी हैं। तारिक ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा, “समय आ गया है, अल्लाह की मेहरबानी से मैं जल्द लौटूंगा।” लेकिन सवाल ये है कि क्या वे अगले प्रधानमंत्री बन पाएंगे?
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को बोगुरा में हुआ था। उनके पिता जियाउर रहमान थे। मां खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, जो बाद में तीन बार सत्ता में रहीं। तारिक ने शाहीन हाई स्कूल से एसएससी और एचएससी पास किया, फिर ढाका रेसिडेंशियल मॉडल कॉलेज गए। ढाका यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस और पॉलिटिकल साइंस पढ़ा। शादी डॉक्टर जुबैदा रहमान से की और बिजनेस में कदम रखा – टेक्सटाइल और शिपिंग में कई कंपनियां शुरू कीं।
वहीं अगर तारिक के राजनीतिक सफर की बात करें तो इसकी शुरुआत बीएनपी के बोगरा कमिटी से शुरू होती है। 1991 के चुनावों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई, जब आठ साल की सैन्य सत्ता के बाद बीएनपी ने भारी जीत हासिल की। खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। 2001 में फिर सत्ता लौटी, तो तारिक को सीनियर जॉइंट सेक्रेटरी जनरल बनाया गया। 2009 में सीनियर वाइस चेयरमैन बने। लेकिन हसीना की वापसी के ठीक पहले वे लंदन चले गए। वहां से वीडियो कॉल, व्हाट्सएप और जूम से पार्टी चलाते रहे।
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सजायाफ्ता अपराधी है तारिक
तारिक रहमान का विवादों से पुराना नाता रहा है। 2004 में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड से हमला तारिक ने किया था, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी। 2018 में भ्रष्टाचार के केस में सजा, 2023 में पत्नी संग अमानत से ज्यादा संपत्ति जुटाने के इल्जाम में नौ साल की सजा हुई। अमेरिकी केबल में उन्हें ‘भ्रष्टाचार का प्रतीक’ कहा गया, जो सरकारी ठेकों और नियुक्तियों में रिश्वत मांगते थे। हसीना ने उन पर विदेश से हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। 2015 में कोर्ट ने उनकी स्पीच पब्लिश करने पर बैन लगा दिया। लेकिन हसीना गिरने के बाद सभी केस खारिज हो गए।
लंदन में निर्वासन की जिंदगी
2008 से लंदन में रह रहे तारिक ने कम प्रोफाइल रखा। बांग्लादेशी डायस्पोरा की शादियों या राष्ट्रीय दिनों पर नजर आते। जेल की यातनाओं के बारे में स्पीच देते, लेकिन मीडिया से दूर। खालिदा जिया की गिरफ्तारी के बाद वे डी फैक्टो लीडर बने। 2020 में मां को हाउस अरेस्ट में रखा गया। 2023-24 में बीएनपी की आंदोलनों को लीड किया, जिसमें हजारों गिरफ्तारियां हुईं। हसीना ने कहा, “लंदन से आदेश देकर लोगों को मार रहे हैं।” तारिक ने जवाब दिया, “हसीना का चुनाव फर्जीवाड़ा है।”
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हसीना गिरने के बाद नया दौर
अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन से हसीना के तख्तापलट के बाद खालिदा की रिहाई हुई। जनवरी 2025 में उन्हें बरी कर दिया। तारिक की स्पीच पर बैन हटा। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने फरवरी 2026 के चुनाव घोषित किए। तारिक ने यूनुस से लंदन में मुलाकात की। बीएनपी ने ‘जुलाई घोषणा’ का समर्थन किया, जो हसीना के ट्रायल और विद्रोहियों को सम्मान की मांग करता है।

















