हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने मुंबई में आयोजित ‘साइबर सुरक्षा जागरूकता माह’ के उद्घाटन समारोह में उनकी बेटी के साथ ऑनलाइन गेमिंग के दौरान हुई एक घटना का जिक्र किया। अभिनेता ने बताया कि ऑनलाइन गेम खेलते वक्त उनकी 13 साल की बेटी से न्यूड तस्वीरें मांगी गईं। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को साइबर अपराध के बढ़ते खतरों से सुरक्षित रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार से स्कूलों में साप्ताहिक साइबर पीरियड शुरू करने का आग्रह भी किया। यह घटना न केवल साइबर अपराध की गंभीरता को रेखांकित करती है, बल्कि हर माता-पिता के लिए सबक बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने भी डिजिटल युग में बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी चुनौतियों से लड़ने के लिए विशेष कानून व प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने शनिवार (11 अक्टूबर) को एक कार्यक्रम में कहा, “लड़कियों के लिए आज ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर बुलिंग, डिजिटल स्टॉकिंग, निजी डेटा के दुरुपयोग और डीपफेक तस्वीरें बड़ी चिंता बन गई हैं। उन्हें इन खतरों से बचाने के लिए पुलिस और अधिकारियों को खास ट्रेनिंग देने की जरूरत है, ताकि वे ऐसे मामलों को समझदारी और संवेदनशीलता से संभाल सकें।”
ऑनलाइन गेम, सोशल मीडिया से साइबर अपराध का ज्यादा खतरा
आज साइबर अपराध अब बहुत आगे बढ़ गया है। बच्चों को इसके प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। उनके लिए ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में अक्सर साइबर अपराध का खतरा होता है। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को मिलकर बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, पासवर्ड सुरक्षा और संदिग्ध संदेशों की पहचान सिखाने की जरूरत है।
देश के हर स्कूल में इस विषय को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और वे ऑनलाइन खतरों व अपराधियों से खुद को बचाने के तरीके सीख सकेंगे अभिभावक भी बच्चों को घर पर क्या सावधानियां बरतें इसके बारे में जागरूक करें। वे उन्हें बताएं कि इंटरनेट से फ्री के नाम पर कोई भी गेम डाउनलोड न करें।
ईमेल, व्हाट्सऐप पर आने वाले किसी भी लिंक के जरिए गेम डाउनलोड करने से बचें। गेम खेलते समय किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी साझा न करें। उसे अपना नाम, घर का पता, उम्र, स्कूल, निजी तस्वीरें और कोई भी व्यक्तिगत जानकारी न दें। खासतौर पर बैंक से जुड़ी कोई भी जानकारी बिल्कुल भी शेयर न करें।
मल्टीप्लेयर गेम्स में अनजान लोगों से चैटिंग न करें। अगर कोई प्लेयर डराए, धमकाए या फिर फोटो-वीडियो मांगे तो रिपोर्ट करें और उसे तुरंत ब्लाक करें। इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग के दौरान वाइस चैट या वेबकैम (एक डिजिटल वीडियो कैमरा) प्रयोग न करें।
ऑनलाइन गेम के कारण कई बच्चों ने जान गंवाई
आज लगभग हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जिक्र होता है। चाहे किसी बीमारी का पता लगाना हो या फिर फसल से संबंधित जानकारी लेनी हो एआई ने ये सब काफी आसान बना दिया है। कुछ ऐसे क्षेत्रों में जिनमें मनुष्य के काम करने में जोखिम हो सकता है, उनमें एआई का इस्तेमाल वरदान सिद्ध हुआ है। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहां इसके अनेक लाभ हैं, वहीं इसके कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं। एआई के जमाने में डीपफेक से कुछ भी हो सकता है। ठग फोटो का इस्तेमाल आपको ब्लैकमेल करने के लिए भी कर सकते हैं।
एआई की मदद से बनाया गया अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो पिछले साल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसे बनाने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इसके बाद भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
वहीं पिछले महीने लखनऊ में एक छात्र ने ऑनलाइन गेम खेलते समय अपने पिता के बैंक अकाउंट से 14 लाख साइबर अपराधियों के खाते में ट्रांसफर करने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
इस वर्ष अगस्त में इंदौर में एक 12 वर्षीय बच्चे ने ऑनलाइन गेम की लत के चलते घर में फांसी ली, क्योंकि गेम खेलते वक्त उसकी मां के खाते से 3000 रुपये कट गए थे।
इसी तरह 2024 में पुणे में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने ऑनलाइन गेम की लत के कारण 14वीं मंजिल से छलांग लगा दी थी।
ये उपाय अपनाकर बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग का शिकार होने से बचाएं
नई पीढ़ी को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए यह शिक्षा भी जरूर दी जानी चाहिए कि ऑनलाइन गेमिंग में अक्सर साइबर अपराधी ही प्लेयर बनकर गेम खेलते हैं। वे गेम के टिप्स देकर सामने वाले से दोस्ती करने की कोशिश करते हैं और विश्वास जीतकर उनकी निजी जानकारियां हासिल करते हैं। यही नहीं ऑनलाइन गेम खेलते समय साइबर अपराधी असभ्य भाषा का प्रयोग कर बच्चों को डरा-धमका सकते हैं। इस स्थिति में डरने के बजाय बच्चे घर के बड़े लोगों को बताएं और संबंधित एजेंसियों की मदद लें। इसके लिए सरकार ने साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in बनाया है। या फिर हेल्पलाइन 1930 पर फोन करके शिकायत कर सकते हैं। यह चौबीसों घंटे काम करता है।
भारत में पिछले दो सालों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा
आज डिजिटल दुनिया में जितनी तेजी से भारत आगे बढ़ रहा है, ठीक उतनी ही तेजी से साइबर अपराधों की संख्या भी बढ़ रही है। भारत में वर्ष 2022 में 10.29 लाख साइबर अपराध दर्ज किए गए, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 22.68 लाख तक हो गए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ सबसे अधिक साइबर अपराध बढ़े हैं। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर अपराधों में बच्चों के शिकार होने की घटनाएं 32 प्रतिशत बढ़ी हैं। दूसरी ओर कंप्यूटर सिक्योरिटी कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक 85 प्रतिशत भारतीय बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार हो रहे हैं। यह देश में बढ़ते डिजिटल खतरों और जटिलता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 70 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन गेम खेलते हैं। ऐसे में माता-पिता को उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चे को गेम खेलने की लत है तो उसे इससे होने वाले नुकसान से अवगत कराएं। साथ ही प्राइवेसी सेटिंग में कुछ चीजों का बदलाव करें, जिससे हर कोई आपको मैसेज नहीं भेज सकेगा। केवल वही लोग मैसेज या बातचीत कर सकेंगे, जिनकी रिक्वेस्ट या इनवाइट्स आप स्वीकार करेंगे। इसके अलावा, जब भी आपको महसूस हो कि चैटिंग में कोई अनुचित बात कर रहा है या गलत मैसेज भेज रहा है, तो तुरंत इसकी रिपोर्ट करें ताकि ऐसे यूजर के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जा सके। साइबर अपराध समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। इससे बचने के लिए साइबर सुरक्षा अब हर घर की प्राथमिकता होनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा को लेकर खास अभियान शुरू हो
इसके अलावा डिजिटल दुनिया में लोगों को और अधिक सतर्क बनाने के लिए साइबर सुरक्षा को लेकर एक विशेष अभियान शुरू किया जाना चाहिए। इस अभियान में लोगों को ऑनलाइन सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए जाएं, ताकि वे बिना किसी डर के इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें। यह लोगों को डिजिटल दुनिया के बारे में जागरूक करेगा और उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने में मदद करेगा। यह पहल सभी के लिए फायदेमंद होगी।

















