अभी हाल ही में इटली में बुर्का पर प्रतिबंध के लिए नया नियम बना है और यह “सांस्कृतिक अलगाववाद” के खिलाफ लाए गए बिल के भाग के रूप में है। यूरोप में यह बहस काफी समय से चल रही है कि बुर्का चूंकि एक अलग पहचान का प्रतीक है, और यह अलगाववाद की भूमिका निभाता है, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। सबसे पहले फ्रांस में वर्ष 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया था और अब 20 से अधिक देशों में इसी प्रकार के प्रतिबंध हैं। ऐसा नहीं है कि यूरोपीय देशों में ही बुर्के पर प्रतिबंध है। कई मुस्लिम देश भी ऐसे हैं, जो बुर्के पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।
मुस्लिम देशों में भी बुर्के पर प्रतिबंध
कज़ाकिस्तान हाल ही में ऐसा मुस्लिम देश बना था, जिसने महिलाओं के बुर्का और हिजाब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान जैसे देशों में भी बुर्के पर प्रतिबंध है। यहाँ तक कि श्रीलंका में भी बुर्के पर प्रतिबंध है। इटली में बुर्के पर प्रतिबंध के कानून के बाद अब ऑस्ट्रेलिया में भी बुर्के पर प्रतिबंध की मांग उठी है और यह मांग उठाई है पौलीन हैन्सन ने। और उन्होंने यह मांग पहली बार नहीं उठाई है। वह कई वर्षों से बुर्के और नकाब पर प्रतिबंध को लेकर मांग उठाती आ रही हैं।
पौलीन हैन्सन ने ऑस्ट्रेलिया में बुर्का बैन की फिर से उठाई मांग
पौलीन हैन्सन ने एक बार फिर से अपनी मांग उठाते हुए अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि- “ऑस्ट्रेलिया को इटली के कदमों का पालन करना चाहिए और बुर्के पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।” उन्होंने आगे लिखा कि- “मैं कई वर्षों से चेतावनी देती आ रही हूँ कि पूरा चेहरा ढकना हमारी सुरक्षा के लिए ख़तरा है और महिलाओं की गरिमा को छीनता है। बुर्के के कारण लड़कियां पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, इसलिए इसे मानवीय गरिमा के खिलाफ कहा जाता है और इसी आधार पर इसका विरोध कई महिलाएं करती हैं।
हैन्सन ने आगे लिखा कि- “अब इटली भी 20 से ज़्यादा देशों के साथ मिलकर इस पर प्रतिबंध लगा रहा है। तो फिर ऑस्ट्रेलिया अब भी इस पर आँखें क्यों मूंदे बैठा है?” बुर्के जैसे परिधान महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं और उन्हें नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं।
उन्होंने लिखा कि- “बुर्का और इसी तरह के इस्लामी परिधान सिर्फ़ पहचान नहीं छिपाते। इनका इस्तेमाल महिलाओं को नियंत्रित करने, उन्हें चुप कराने और उन्हें याद दिलाने के लिए किया जाता है कि वे दोयम दर्जे की हैं। यह आज़ादी नहीं है। हम ऐसे नहीं हैं।”
Australia must follow Italy’s lead and ban the burqa.
For years I’ve warned that full face coverings pose a threat to our safety, and strip women of their dignity.
Now Italy has joined more than 20 countries in banning them. So why is Australia still turning a blind eye?… pic.twitter.com/4DvoFYOryN
— Pauline Hanson 🇦🇺 (@PaulineHansonOz) October 9, 2025
राजनीतिक इस्लाम का प्रतीक बताया बुर्का
बुर्के को लेकर यह भी आरोप लगते हैं कि यह राजनीतिक इस्लाम को फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम है, क्योंकि यह अलग पहचान को आरंभ करता है और एक समुदाय की महिलाओं को उस देश की संस्कृति से अलग करता है। हैन्सन ने भी लिखा कि इसकी असलियत को पहचानकर हमें उसे वही कहना चाहिए जो वह है — अर्थात राजनीतिक इस्लाम!
उन्होंने लिखा कि-
“चलिये इसे वही कहते हैं जो यह है: अर्थात राजनीतिक इस्लाम हमारी सड़कों पर और तेज़ी से घुस रहा है। हिंसा बढ़ रही है। कायर मुखौटों के पीछे छिप रहे हैं। और अल्बानीज़ आईएसआईएस चरमपंथियों को वापस ला रहे हैं और हमास समर्थकों को शरण दे रहे हैं।”
“बुर्के पर प्रतिबंध बस सामान्य ज्ञान है” — पौलीन हैन्सन
उन्होंने आगे लिखा कि
“बुर्के पर प्रतिबंध बस सामान्य ज्ञान है। किसी भी महिला को अपना चेहरा ढकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी अपराधी बुर्के के पीछे छिपकर बच नहीं निकलना चाहिए। वन नेशन सार्वजनिक सुरक्षा, महिलाओं के अधिकारों और उन मूल्यों के लिए खड़ा है जिनसे यह देश बना है। और हम पीछे नहीं हटेंगे।”
यूरोप में भी बुर्के पर प्रतिबंध की बढ़ रही मांग
यूरोप में बार-बार महिलाओं की गरिमा को लेकर बुर्के का विरोध हो रहा है और यूके में भी इसके प्रतिबंध को लेकर तमाम बातें हो रही हैं। सितंबर में ही एक बार फिर बहस ताजा हुई थी कि आखिर यूके में बुर्के को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जा सकता है? सांसद रूपर्ट लो नकाब और बुर्के पर प्रतिबंध पर संसद में प्रस्ताव भी ला चुके हैं, परंतु उन्हें समर्थन नहीं मिला था। हालांकि अभी वहाँ पर ऐसी किसी मांग का समर्थन होने की संभावना भी नहीं है।
यूके में बुर्का फैशन शो और विरोध
वर्ष 2024 में बर्मिंघम में एक कैथीड्रल में बुर्का फैशन शो हुआ था और इसे लेकर भी काफी हंगामा हुआ था। परंतु इन सबके बावजूद यूके में बुर्के पर प्रतिबंध के लिए आवाजें उठ रही हैं और हाल ही में जून में ही बुर्के पर प्रतिबंध के लिए अभियान चलाया गया था। लोगों का कहना है कि यह शोषण का प्रतीक है और इसका स्थान किसी भी आजाद सोसाइटी में नहीं है।

















