गत दिनों चित्रकूट के मझगवां में वीरांगना रानी दुर्गावती जी की 501वीं जयंती पर दीनदयाल शोध संस्थान ने विविधि कार्यक्रमों का आयोजन किया। एक कार्यक्रम में कृष्णा देवी विद्यालय की वनवासी बालिकाओं ने वीरांगना दुर्गावती पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया।
इस अवसर पर संत राघव दास महाराज ने कहा कि आज समाज को अलग-अलग जातियों में बांटने की कोशिश की जा रही है। हमें भेदभाव के इस कुचक्र को तोड़ते हुए समरस भाव से छुआछूत और अस्पृश्यता की खाई को कम करने का प्रयास करना है। हमें अपनी नई पीढ़ी को पाश्चात्य के प्रभाव से दूर रखते हुए अपनी संस्कृति और सनातन परंपरा के संस्कार देने का कार्य करना होगा। रानी दुर्गावती का जैसा नाम था, वैसा ही उन्होंने अपने रण कौशल से साबित करके दिखाया।
मुख्य अतिथि डॉ. रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि रानी दुर्गावती स्वाभिमान और स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। वीरांगना दुर्गावती ने बलिदान की जिस परंपरा की शुरुआत की, उस पथ का कई वीरांगनाओं ने अनुसरण किया। दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले ने कहा कि भारतभूमि सदैव से श्रेष्ठ रही है और हमारी मातृशक्ति ने सदैव पथ-प्रदर्शक का कार्य किया है। विश्व की प्रथम महिला वीरांगना दुर्गावती हैं, जिनकी हम 501वीं जयंती मना रहे हैं, साथ ही वे पहली नारी हैं जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को हराया।
एक अन्य कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां द्वारा ‘रबी फसलों की उत्पादन तकनीकी एवं उन्नत किस्म के बीज’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य था बीज उत्पादन तकनीकी, फसल प्रदर्शन, उत्पादकता और नवीन तकनीकी के प्रयोग को बढ़ावा देना। ग्राम पटनाकला में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि चित्रकूट-मझगवां जनजातीय बहुल क्षेत्र है। भारतरत्न नानाजी ने इन्हीं सब लोगों को साथ लेकर उनकी पहल, पुरुषार्थ से ही सेवा का प्रकल्प खड़ा किया। रानी दुर्गावती जी का जीवन दर्शन हम सबके के लिए प्रेरणास्पद है। उनके बताए मार्ग पर हम बढ़ें, जिससे बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी।

















