आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब औरतों को अपने साथ जोड़ने के लिए एक नया संगठन बना रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 के बाद उसने औरतों को अपने साथ जोड़ने का विचार किया था और उसके बाद अब उसने औरतों के लिए “जमात अल मु’मिनात” का भी गठन कर लिया है।
न्यूज 18 के अनुसार खूफिया स्रोतों के अनुसार जमात-अल-मु’मिनात जैश का औरतों का मोर्चा है, जो मनोवैज्ञानिक युद्ध में सहायता करेगा और आम लोगों को साथ जोड़ने के लिए कार्य करेगा, जिसमें वह जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण राज्यों की औरतों को एक संगठित ऑनलाइन नेटवर्क के माध्यम से जोड़ेगा। और वह यह काम इस्लामिक सुधार और पाकीगी के नाम पर करेगा।
कुरआन की आयतें और मक्का-मदीना के चित्र
सूत्रों ने यह भी बताया कि जो घोषणा “जमात अल मु’मिनात” के लिए जैश ने की है, उसमें कुरआन की आयतें और मक्का-मदीना के चित्र लगाए गए हैं। इसमें औरतों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार की भावनात्मक बातें भी लिखी हैं। इसमें मुस्लिम औरतों को मजहबी जिम्मेदारियों के नाम पर एक होने की अपील की जाएगी और ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम औरतों को जोड़ा जाएगा।
वे ऐसा क्यों कर रहे हैं?
अब प्रश्न यह उठता है कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? तो इसका उत्तर बहुत ही सरल है। ये वह जैश के विचारों को मुस्लिम औरतों के माध्यम से आगे ले जाने के लिए और अपने पुरुषों को बचाने के लिए कर रहे हैं। वे औरतों को कई कामों के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं, जैसे कि लोगों को साथ जोड़ने वाली औरतों के रूप में, संदेशवाहक के रूप में, और पैसे उगहाने के लिए। न्यूज़ 18 के अनुसार जो समूह की पैमप्लेट है, उसमें पूरी तरह से मजहबी जिम्मेदारियों की बात की गई है और यह भी बात सत्य है कि जो भी वैश्विक आतंकी समूह हैं, वे अपनी महिला सदस्यों के लिए जो साइबर भूमिकाएं हैं या फिर और जो भी काम हैं, उन्हें सही ठहराने के लिए इसी शब्द का प्रयोग करते हैं। चूंकि इसे रबी-उल-थानी की 13वीं तारीख (8 अक्टूबर, 2025) जैसी खास तारीख पर जारी किया गया है, तो इससे यह भी पता चलता है कि यह योजनाबद्ध तरीके से मरकज के स्तर की बैठकों का आयोजन करेंगे। सूत्र यह भी बताते हैं कि ये मजहबी आयोजन और सभाएं हवाला या जकात आधारित फंडिंग चेन के लिए एक परदे का काम करती हैं, जिन्हें गुप्त रूप से इस्लाह-ए-उममा (समुदाय में सुधार) के बैनर के नीचे, मजहबी गैर-सरकारी संगठनों और मदरसा नेटवर्क के माध्यम से भेजा जाता है।
महिलाओं की मतांतरण में बढ़ रही हैं भूमिकाएं
जैश का औरतों का यह संगठन जमात अल मु’मिनात” अब एक संगठित रूप से सामने आ रहा है, मगर ऐसा नहीं है कि मजहबी मतांतरण में औरतों की भूमिका अभी नहीं है। हाल ही में कई मामले ऐसे आए हैं, जिनमें मुस्लिम औरतों को जबरन मतांतरण के मामले में आरोपी बनाया गया है।
केरल स्टोरी फिल्म में भी उस पूरे नेटवर्क और मनोवैज्ञानिक युद्ध के विषय में विस्तार से दर्शाया गया है, जो मुस्लिम औरतें मतांतरण के लिए करती हैं। गैर-मुस्लिम लड़कियों को जाल में फंसाने के लिए वे जितना सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक द्वन्द उत्पन्न करती हैं, वह इनकी पीड़ित कई गैर-मुस्लिम लड़कियों के बयानों से भी पता चलता है। अभी हाल ही में आगरा से भी दो सगी बहनों के अपहरण और मतांतरण का मामला सामने आया था, जिसमें यह निकलकर सामने आया था कि कैसे कश्मीर की छात्राओं ने इन लड़कियों को अपने जाल में फँसाया था।
ऐसे अनेक उदाहरण रोज ही सामने आ रहे हैं और अब ऐसे में जैश का मुस्लिम औरतों के लिए बना संगठन “जमात अल मु’मिनात” एक और बड़ा खतरा है, जिसे जैश के सरगना रच रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि जो काम “जमात अल मु’मिनात” के लिए तय किये हैं, जैसे कि साइबर ऑपरेशन, पैसे को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाना और उनके विचारों को फैलाना, उनका तरीका, लेआउट, और मजहबी टोन पाकिस्तान आधारित अल मुजाहिरात के जैसी है, जो जैश ए मोहम्मद का औरतों के कैडर वाला कदम है। जैश-ए-मोहम्मद की औरतों की इकाइयां इनफार्मेशन वारफेयर, ऑनलाइन दावा और गलत सूचना के लिए बनाई जा रही हैं जो उनके पुरुषों को सीधे खतरों से बचाते हुए पैसों का लेनदेन आदि करेंगी।

















